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फिल्‍मों के साथ समाज में गहराता आकर्षण नाभि का

वह रोजमर्रा के ड्रेस डेनिम की जींस और शर्ट में होटल में प्रवेश करती हैं. बालों में कलर्स लगे हुए हैं. 20 मिनट बाद वे सुनहरे ब्लाउज और चमचमाती हुई साड़ी में नमूदार होती हैं.

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वह रोजमर्रा के ड्रेस डेनिम की जींस और शर्ट में होटल में प्रवेश करती हैं. बालों में कलर्स लगे हुए हैं. 20 मिनट बाद वे सुनहरे ब्लाउज और चमचमाती हुई साड़ी में नमूदार होती हैं. उन्होंने दोनों को बड़ी नजाकत और आत्मविश्वास के साथ संभाला हुआ है.

बड़ी सहजता से वे फोटोग्राफरों को कुछ पोज देती हैं, फिर कैमरे के व्यूफाइंडर में खुद तस्वीरें देखती हैं. जो तस्वीरें नापसंद हैं, उन्हें मिटा देती हैं और जो पसंद हैं उन्हें चुन लेती हैं.

दीपिका पादुकोण की कमर 26 इंच है और उन्हें कोई एतराज नहीं कि तस्वीरों में उनका कटिप्रदेश दिखाई दे रहा है. न ही उन्हें इस बात से एतराज है कि फिल्म दम मारो दम को बेचने के लिए उसके पोस्टर पर उनके कटिप्रदेश की बड़ी-सी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि उस फिल्म में उनकी कोई बड़ी भूमिका भी नहीं थी. और न ही उन्हें नेसकैफे के 30 करोड़ रु. के शेक इट बेबी कैंपेन पर ही कोर्ई आपत्ति है.

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जबसे फिल्म तीस मार खां  के गाने शीला की जवानी ने कैटरीना कैफ को महज एक बार्बी डॉल से बढ़कर एक नई छवि प्रदान की, तब से नाभि सुर्खियों में हैं. अब वक्षस्थल प्रदर्शन की चीज नहीं रहा. छोटी-सी नाभि ने अश्लील क्लीवेज को बाहर कर दिया है.

राखी सावंत भले अपनी छातियों की सर्जरी करवाएं, लेकिन टॉप की तारिकाएं तो अपनी कमर पतली करने में लगी हुई हैं. एकल परदे की सीधी-सादी खुली कामुकता ने अब मल्टीप्लेक्स की संयमित मादक कामुकता के लिए रास्ता साफ कर दिया है.

रैंप से लेकर डियो के विज्ञापनों तक हर जगह यह साफ नजर आ रहा है. रैंप पर सव्यसाची मुखर्जी जैसे फैशन डिजाइनरों ने साड़ी की वापसी करवाई है, तो डियो के विज्ञापनों में साड़ी में सजी स्त्री खुली छाती वाले पुरुष की ओर आकर्षित हो रही है.

प्रियंका चोपड़ा, जिन्हें सात खून माफ जैसी फिल्म में 40 साल की दिखने के लिए बॉडी पैडिंग का इस्तेमाल करना पड़ता है, कहती हैं, ''मेरी पीढ़ी बिल्कुल फिट है. बहुत लंबे समय तक मेरी कमर 23 इंच थी.'' और 2002 में बॉलीवुड में आने के बाद उन्हें लाइट्स और कैमरे की समझ आई, जिसने उन्हें और भी कमसिन बना दिया.

सिने कलाकारों की नर्ई पीढ़ी बखूबी जानती है कि प्रिंट, टीवी और इंटरनेट पर एक तस्वीर का क्या असर होता है. ''फिट होना अच्छी बात है, लेकिन सिर्फ पतले होने की कामना करना ठीक नहीं,'' यह कहना है बिपाशा बसु का, जिन्होंने 25 इंच कमर पाने के लिए सात साल तक मेहनत की. उन्होंने फिटनेस पर एक डीवीडी भी बनाई और रिबॉक के लिए ड्रेस की पूरी सीरीज जारी की.

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जैसे बॉलीवुड के पुरुष मोटे से पतले होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, वैसे ही स्त्रियां भी अपनी कमर को खूबसूरत और छरहरी बनाने की कोशिशों में जुटी हुर्ई हैं. राजा रवि वर्मा के चित्रों में जो क्लासिकल किस्म की मोटी-सी दिखने वाली नाभि थी और खजुराहो की दीवारों पर उत्कीर्ण मूर्तियों में उसका जो रूप था, वह गुजरे जमाने की बात हुई. 1968 में फिल्म ब्रह्मचारी में सबसे पहले परदे पर नारंगी रंग की साड़ी में लिपटी मुमताज की नाजुक, भीगी हुई-सी नाभि नजर आई. उसके बाद तो परदे पर लगातार सुडौल, तराशे हुए कटिप्रदेश के प्रदर्शन का सिलसिला ही चल पड़ा.

अब तो ये आलम है कि पुरुषों के आइटम सांग में भी यह नजर आ रहा है. जैसे हाल ही में फिल्म लव का दि एंड में घाघरा-चोली पहने युवक गाना गा रहा है-नाभि में पिअर्सिंग होल हुए. मिलन लूथरिया की आगामी फिल्म द डर्टी पिक्चर में विद्या बालन ने दक्षिण की हीरोइन सिल्क स्मिता का किरदार निभाया है.

यह किरदार करने के लिए उन्होंने तीन महीने तक 80 के दशक के बांधनी वाले ब्लाउज, छोटे-छोटे स्कर्ट पहनने की प्रैक्टिस की और अपनी नाभि का भी प्रदर्शन किया. अभिनेत्रियों के लिए भी यह आसान नहीं है. लूथरिया की कॉस्ट्यूम डिजाइन करने वाली टीम में पांच लड़कियां हैं, सह-निर्देशक भी महिला है और फिल्म के सेट पर भी बहुत ज्यादा भीड़भाड़ नहीं रहती.

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विद्या बालन का मानना है कि नाभि की मांग इसलिए ज्यादा बढ़ गर्ई है क्योंकि अब महिलाओं की छातियां लगभग सपाट होने लगी हैं. बालन  कहती हैं, ''आजकल ऐसी काया का चलन है कि स्त्री और पुरुष में फर्क ही न पता चले. अगर आपकी देह से यह फर्क साफ नजर आता है तो लोग ही आपको सचेत कर देते हैं. लेकिन हमारी देह तो मूर्तियों की तरह है. हमें पश्चिम की नकल भला क्यों करनी चाहिए, जहां स्त्री-पुरुष सब एक ही जैसे नजर आते हैं?''

 करीना कपूर के जीरो फिगर का शुक्रिया कि उसके बाद लड़कियां ऊपर से सपाट होने लगी हैं. अब फिल्म निर्माता परदे पर नितंबों और पैरों का प्रदर्शन तो कर नहीं सकते, इसलिए अगली सबसे बेहतरीन चीज जो बच जाती है वह है कमर. ऐसी कमर पाना भी आसान नहीं है.

आहार विशेषज्ञ शिखा शर्मा कहती हैं कि बहुत सी महिलाएं उनके पास झुलसी हुई त्वचा के साथ आती हैं. छरहरी दिखने के लिए वे ऐसे-ऐसे तरीके आजमाती हैं कि कई बार उनकी त्वचा झुलस जाती है और उस पर धब्बे पड़ जाते हैं.

फिटनेस विशेषज्ञ लीना मोगरे कहती हैं, ''किसी की देह बिल्कुल तराशी हुई नहीं होती. हर किसी को फिटनेस के लिए कोशिश करनी पड़ती है.'' बॉलीवुड के डे्रस भी छोटे से छोटे होते जा रहे हैं. उन कपड़ों में परदे पर थोड़ी भी मोटी कमर बहुत भद्दी और खराब नजर आती है.

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मोगरे कहती हैं, ''पहले महिलाओं की क्लीवेज (वह्नों के बीच की दरार पर ज्यादा जोर होता था, क्योंकि कपड़ों में शरीर का अधिकांश हिस्सा ढका रहता था. ऐसे में आप ज्यादा से ज्यादा क्लीवेज ही दिखा सकते थे.''

सेलिब्रिटीज की देह की एक खास तरह की छवि का अर्थ होता है कि आम स्त्रियों पर भी उन्हीं की तरह खूबसूरत दिखने का एक सांस्कृतिक दबाव बनता है. आजकल पेट और कमर की चर्बी घटाने के लिए ऑपरेशन और सर्जरी करवाना बहुत आम बात हो गई है.

कुछ ऑपरेशन के नतीजे खतरनाक भी होते हैं, लेकिन फिर भी इसमें कमी नहीं आ रही. फिटनेस विशेषज्ञ डीन्नी पांडेय कहती हैं, ''इस बिजनेस में बहुत पैसा है. जिन्हें ऑपरेशन की जरूरत नहीं है, डॉक्टर उन्हें भी ऑपरेशन न करवाने की सलाह नहीं देते.'' वे कहती हैं कि उनके पास आने वाली पचास फीसदी से ज्यादा महिलाएं अपने शरीर पर कोर्ई-न-कोई सर्जरी करवा चुकी होती हैं.

फिटनेस के बहुत सारे फैशन की तरह नाभि दिखाने का फैशन भी बाहर से आयात किया गया है. फैशन डिजाइनर स्वप्निल शिंदे का कहना है कि भारत का फैशन उद्योग नाभि को तरह-तरह से इस्तेमाल करने के तरीके ईजाद कर रहा है. रैंप पर नाभि को नई अदाओं और छटाओं में पेश करने की कोशिश की जा रही है.

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मॉडल कैंडिस पिंटो कहती हैं, ''हर मॉडल या हीरोइन सफलता के साथ अपनी नाभि का इस्तेमाल और प्रदर्शन नहीं कर सकती.'' कैंडिस के मुताबिक यह हर व्यक्ति की निजी पसंद और नापसंद होनी चाहिए कि वह नाभि का प्रदर्शन करेगी या नहीं करेगी. वे कहती हैं, ''नाभि मानवीय देह का सबसे खूबसूरत और कामुक हिस्सा है.''

शमिता सिंघा कहती हैं कि अधिकांश मॉडल छरहरी काया के लिए बहुत कठोर अनुशासन के साथ खाने-पीने का ख्याल रखती हैं. वे सलाद, सूप इत्यादि का सेवन करती हैं और वजन घटाने के लिए नियमित रूप से कार्डियो और अन्य प्रकार के व्यायाम भी करती हैं ताकि वे रैंप पर सुंदर, सुडौल और छरहरे कटिप्रदेश का प्रदर्शन कर सकें.

नाभि ने अपने आप में एक बड़े उद्योग का रूप ले लिया है. चाहे नेवल ज्वेलरी हो या उसे सजाने के तरह-तरह के कॉस्मेटिक, सब एक बड़े व्यवसाय के रूप में उभर रहे हैं. नाभि को सजाने के हीरों से लेकर कमर के श्रृंगार की चीजों की कीमत 35,000 रु. तक है.

यह एक बड़े लाभप्रद उद्योग की शक्ल धारण कर रहा है. महिलाएं सुंदर दिखने के लिए तमाम तरीके आजमा रही हैं. चाहे शूटिंग से पहले कर्ई घंटों तक सिर्फ पानी पीकर गुजारा करना हो या किसी बड़े डांस शूट के पहले तीन दिनों तक सिर्फ संतरे का रस पीकर रहना पड़े या अपनी सांस ही रोकनी पड़े, वे छरहरी कमर के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

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साड़ी एक ऐसा पारंपरिक परिधान है, जिसमें नाभि सबसे खूबसूरत नजर आती है. नाभि दिखाने के बढ़ते चलन के कारण ही पार्टी परिधान के रूप में एक बार फिर साड़ी का शबाब अपने उफान पर है. ब्लाउज जैसे-जैसे ऊंचे और छोटे होते जा रहे हैं, कमर पतली होती जा रही है. यहां तक कि गांव के लोग भी फैशनेबल और टिपटॉप हो रहे हैं.

दबंग जैसी फिल्म ने भोजपुरी देह को भी खूबसूरत और छरहरा बना दिया है. घाघरा-चोली वाले आइटम नंबर में दबंग की मुन्नी की नाभि को बड़ी खूबसूरती से गहनों से सजाया गया है. मलैका अरोड़ा खान की देहयष्टि बेहद खूबसूरत है, लेकिन मातृत्व के कारण उनके पेट पर भी धारियां पड़ गई हैं. फिल्म वेलकम में उनके चाहने वाले यह देखकर थोड़े निराश भी हुए थे, इसलिए इस बार समझ्दार और चतुर डिजाइनरों ने फिल्म दबंग के आइटम नंबर में उनकी कमर को गहनों से बहुत खूबसूरती से सजा दिया.

मनीष मल्होत्रा का कहना है कि अधिकांश लोग नाभि को ढकना पसंद नहीं करते. मनीष के फैशन वीक कलेक्शन में खास तौर पर ऐसे घाघरे और छोटी-छोटी चोलियां होती हैं, जिसमें कमर का बड़ा हिस्सा दिखाई देता है.

वे कहते हैं, ''महिलाओं में अपनी देह और सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी है. यह उनकी पतली छरहरी कमर देखकर ही नजर आता है.'' मल्होत्रा याद करते हैं कि जब 2008 में उन्होंने कैटरीना के लिए फिल्म सिंह इज किंग के गाने तेरी ओर  के लिए कमर से काफी नीचे तक की साड़ी डिजाइन की थी तो उसे कितना पसंद किया गया था. वे कहते हैं, ''नाभि ग्लैमरस होने के साथ-साथ बहुत नाजुक और सुंदर भी लगती है, लेकिन वक्ष के साथ ऐसा नहीं होता.''

अब बॉलीवुड में ढेर सारी ऐसी नर्ई हीरोइनें आ रही हैं, जो अपनी देह के बारे में खुलकर बात करती हैं. वे अपनी देह को लेकर ज्यादा स्वतंत्र और मुक्त हैं. निर्देशक फराह खान याद करती हैं, ''कैटरीना शीला की जवानी गाने में अपनी नाभि दिखाने को लेकर काफी चिंतित थीं.

उन्होंने दो महीने तक इसके लिए मेहनत की और मुझ्से कहा कि अगर कमर पूरी तरह सपाट न हो और कुछ चर्बी नजर आए तो मैं उन्हें दुपट्टे से अपनी कमर ढकने दूं. लेकिन अंत तक आते-आते वह बहुत आत्मविश्वास से भर गई थीं और उन्होंने शॉट के बीच में खुद को बाथरोब वगैरह से ढंकने की भी कोई कोशिश नहीं की. यहां तक कि अपनी वैन से सेट तक आते समय भी वे ऐसे ही आईं.'' यह उनका खुलापन और उनकी हिम्मत है. चाहे अपने पिछले पुरुष मित्रों को बुरा-भला कहना हो या ताजातरीन ब्वॉयफ्रेंड के बारे में बात करनी हो, कैटरीना हमेशा इतनी ही उन्मुक्त होती हैं.

आधुनिक स्त्री ने फिर से अपनी देह और अपनी नाभि पर अपना अधिकार हासिल कर लिया है. एक समय था, जब स्त्री को सिर्फ पुरुष की निगाह से देखा जाता था, जैसे राज कपूर की फिल्म राम तेरी गंगा मैली में झ्रने के नीचे भीगी हुई सफेद साड़ी में या रामगोपाल वर्मा की फिल्म रंगीला में उर्मिला मातोंडकर ऊंची सी चट्टान पर नारंगी रंग के लहराते हुए कपड़ों में.

याद कीजिए फिल्म नमक हलाल  का वह दृश्य, जिसमें अमिताभ बच्चन स्मिता पाटील की भीगी हुई कमर की ओर इशारा कर रहे हैं या फिल्म मोहरा का वह दृश्य, जिसमें अक्षय कुमार उत्साह और उमंग से रवीना टंडन की पूरी तरह भीगी हुई कमर का रुख कर रहे हैं. अब नाभि और कमर की अपनी एक अलग स्वतंत्र पहचान बन गर्ई है.

पुराने जमाने के गानों और फिल्मों की वापसी के कारण भी नाभि का महत्व बढ़ गया है. प्रियंका चोपड़ा कुणाल कोहली की फिल्म में अपनी नाभि में हीरा पहने हुए शिफॉन की साड़ी पहने मुमताज की याद दिलाती हैं. या हाल ही में आई फिल्म चलो दिल्ली के गाने लैला ओ लैला में याना गुप्ता का डांस हेलेन की याद दिलाता है.

वैसे, सिनेमा में फैशन के मामले में बॉलीवुड दक्षिण से पीछे ही रहा है, जहां नाभि प्रदर्शन लंबे समय से चला आ रहा है. बी ग्रेड की फिल्मों में नाभि पर पसीने की बूंदें खूब दिखाई जाती रही हैं. दक्षिण तो उदर स्थल की पूजा करता रहा है, चाहे वह नमिता का हिचकोले खाता उदर हो या सिमरन का सपाट उदर. टॉलीवुड और कॉलीवुड भी उदर के प्रति उतना ही आकर्षित रहा है जितने बाबा रामदेव.  दक्षिण के अभिनेता प्रियामणि कहते हैं कि दक्षिण की नाभि बॉलीवुड के उदर से भिन्न है, ''बॉलीवुड की लड़कियां दक्षिण की लड़कियों से ज्‍यादा दुबली हैं. यहां पुरुष मांसल सौंदर्य को पसंद करते हैं.''

साड़ी का शुक्रिया कि पारंपरिक रूप से भी भारतीय स्त्रियां जानते-बूझ्ते हुए या फिर अनजाने में ही अपनी नाभि पर इतराती रही हैं. ऑनलाइन पोर्न स्टार सविता भाभी से, जो भारतीय घरेलू पत्नियों की छिपी हुई आकांक्षाओं का मूर्त रूप हैं, से बढ़कर इस बात का साकार प्रमाण और कुछ नहीं हो सकता.

कला लेखिका दीपांजना पाल कहती हैं, ''यह परंपरा की वापसी  है, लेकिन यह परंपरा की कलात्मक वापसी नहीं, बल्कि सिनेमाई वापसी है.'' दीपिका पादुकोण कहती हैं कि वक्ष प्रदर्शन में इस बात की संभावना रहती है कि आप अश्लील और अभद्र-सी नजर आने लगें, लेकिन नाभि के साथ ऐसा नहीं होता.

नाभि बहुत सहज और स्वाभाविक ढंग से आकर्षक लगती है. बिपाशा कहती हैं कि अधिकांश भारतीय स्त्रियां अपनी कमर और नितंबों को लेकर बहुत परेशान रहती हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि भारतीय पुरुषों को सपाट और कठोर काया पसंद नहीं. वे चाहते हैं कि उनकी स्त्री हर जगह से ज्यादा गोलाकार और सुडौल हो.

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