हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए मतदान संपन्न हो गया है. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े का अनुसार लोकतंत्र के महापर्व में प्रदेश की 90 सीटों पर अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए 65.57 फीसदी मतदाताओं ने मताधिकार का उपयोग किया.
अगले पांच साल के लिए अपनी नई सरकार चुनने को हुआ यह मतदान पिछले 19 वर्षों में विधानसभा चुनाव के दौरान सबसे कम मतदान प्रतिशत है. इससे पहले शाम पांच बजे तक 53.78 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था. हालांकि शाम 5 बजे के बाद मतदान ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी और शाम 6 बजे तक मतदान का आंकड़ा 61.62 फीसदी पहुंच गया था.

सुबह से ही मतदान की रफ्तार सुस्त रही. लोगों में वह उत्साह नजर नहीं आया, जो पिछले चुनावों में नजर आता रहा है. मतदान समाप्त होने तक 65.57 फीसदी मतदान हुआ. यह 21वीं सदी में, यानी सन 2000 से अब तक हुए विधानसभा चुनावों में सबसे कम है. हरियाणा के चुनाव में वोटरों के घर से न निकलने के पीछे एक्सपर्ट सरकार से निराशा को प्रमुख वजह बता रहे हैं.
लगातार बढ़ा मतदान का आंकड़ा
सन 2000 से अब तक हुए मतदान की बात करें तो चुनाव दर चुनाव मतदान के प्रतिशत में इजाफा होता गया. सन 2000 के विधानसभा चुनाव में 69 फीसदी मतदान हुआ था. 2005 में वोट प्रतिशत 2.9 फीसदी इजाफे के साथ 71.9 फीसदी मतदान हुआ, जबकि 2009 में 0.4 फीसदी की मामूली वृद्धि के साथ वोट प्रतिशत 72.3 फीसदी पहुंच गया था. हर चुनाव में मामूली ही सही, वृद्धि का ट्रेंड रहा, लेकिन इस बार यह टूट गया.
2014 में कितना मतदान
सन 2014 के चुनाव में भी 2009 के 72.3 के मुकाबले 4.3 फीसदी इजाफे के साथ कुल 76.6 फीसदी मतदान हुआ था. भाजपा ने 33.3 फीसदी वोट के साथ 47 सीटें जीतीं थीं. तब की सत्ताधारी कांग्रेस 20.7 फीसदी वोट शेयर के साथ महज 15 सीट पर सिमट गई थी. इंडियन नेशनल लोकदल भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. इनेलो 24.2 फीसदी वोट के साथ 19 सीटें जीतने में सफल रही थी. 10.6 फीसदी वोट के साथ निर्दलियों ने पांच सीटें जीतीं और नोटा का हिस्सा भी 0.4 फीसदी का रहा था.