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National Education Day 2021: जानें मौलाना आजाद के जन्मदिन पर क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस (National Education Day) : भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्म दिवस को राष्ट्रिय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसकी शुरूआत वर्ष 2008 से की गई थी.

राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2021 राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2021
स्टोरी हाइलाइट्स
  • स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षामंत्री थे मौलाना आजाद
  • देश को दिए IIT, UGC समेत कई संस्‍थान

National Education Day 2021: 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है. यह दिवस भारत के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे. उस समय शिक्षा मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय था.

अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन को मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम से जाना जाता है. उनका जन्म 1888 में मक्का, सऊदी अरब में हुआ था. उन्होंने 1912 में ब्रिटिश नीतियों की आलोचना करने के लिए उर्दू में एक साप्ताहिक पत्रिका अल-हिलाल शुरू की थी. अल-हिलाल पर प्रतिबंध लगने के बाद उन्होंने एक और साप्ताहिक पत्रिका अल-बगाह शुरू की.

वे एक शिक्षाविद्, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ थे. कलाम ने भारत की शिक्षा संरचना को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. कलाम ने देश में शिक्षा के ढांचे में सुधार का सपना देखा था और उन्होंने इसे पूरा करने का प्रयास किया.

आजाद ने महिलाओं की शिक्षा की पुरजोर वकालत की. उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर जोर दिया और अंग्रेजी भाषा पर जोर देने को भी कहा. हालांकि उनका मानना था कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए. शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, पहले IIT, IISc, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC )की स्थापना की गई थी.

इसके साथ ही उन्होंने संगीत नाटक अकादमी, ललित कला अकादमी, साहित्य अकादमी के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद सहित प्रमुख सांस्कृतिक, साहित्यिक अकादमियां भी स्थापित कींं.

शिक्षा के क्षेत्र में उनके समर्पण को ध्यान में रखते हुए, 11 नवंबर, 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने उनके जन्‍मदिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया. आजाद को 1992 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. उन्होंने 1958 में अंतिम सांस ली.

 

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