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Exclusive: कैसे खुला 1 हजार से ज्यादा लोगों के धर्म परिवर्तन का मामला? UP ATS को ऐसे मिली लीड

उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कराने वाले एक रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया है. उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने कहा है कि आरोपियों की पहचान मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी और मोहम्मद उमर गौतम के रूप में हुई है.

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मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासिम कराते थे धर्म परिवर्तन.
मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर कासिम कराते थे धर्म परिवर्तन.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मूक-बधिर बच्चों का भी कराया जाता था धर्मांतरण
  • धर्मांतरण रैकेट को मिल रही थी विदेश से फंडिंग

उत्तर प्रदेश के नोएडा में धर्मांतरण कराने वाले एक रैकेट का खुलासा हुआ है. यूपी एटीएस ने इस केस में 2 मौलानाओं को गिरफ्तार कर लिया है. बीते 2 साल से चल रहे धर्मांतरण के इस रैकेट में मूक-बधिर बच्चों और महिलाओं का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता था. अब तक यह रैकेट 1000 लोगों का धर्म परिवर्तन करा चुका है.

पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी फंडिंग से चल रहे इस रैकेट में 100 से ज्यादा लोग शामिल हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रशांत कुमार खुद कह चुके हैं कि बीते एक साल के भीतर 350 लोगों का धर्मांतरण कराया जा चुका है. धर्मांतरण के लिए लोगों को धमकाया और डराया भी गया है. 

नोएडा के एक मूक बधिर स्कूल में भी 18 बच्चों के धर्मांतरण का मामला सामने आया है. धर्मांतरण कराने वाले आरोपियों के नाम मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर है. दोनों राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जामिया नगर के रहने वाले हैं. यूपी एटीएस ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया है. 

यूपी में धर्मांतरण के रैकेट का पर्दाफाश, करीब एक हजार लोगों के धर्म बदलवाने का आरोप

कैसे हुआ धर्मांतरण केस का खुलासा?

दरअसल 2 जून को गाजियाबाद में डासना के स्वामी यति नरसिंहानंद के आश्रम से शाम 8 बजे 2 संदिग्धों को पकड़ा गया था. दोनों संदिग्ध आश्रम में घुस गए थे. जब पूछताछ हुई तो एक ने अपना नाम विपुल विजयवर्गीय बताया और दूसरे ने अपना नाम काशी गुप्ता बताया. जब पुलिस ने काशी गुप्ता से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला उसका असली नाम काशिफ है.

 

पुलिस में दर्ज शिकायत.

दोनों संदिग्धों की तलाशी में उनके पास से 6 से 7 सर्जिकल ब्लेड, बोतल में लिक्विड, कुछ दवाइयां जो देखने में जहर लग रही थीं, वहीं कुछ धार्मिक किताबें बरामद हुईं. मकसद साफ था, धर्मांतरण रैकेट के ये भी एक्टिव मेंबर थे.

कैसे मिली यूपी एटीएस को लीड?

आश्रम से पकड़े गए विपुल विजयवर्गीय और काशी गुप्ता उर्फ काशिफ से ATS ने लंबी पूछताछ की, जिसमें पता चला कि विपुल विजयवर्गीय भी धर्मांतरण कर चुका है. काशी गुप्ता उर्फ काशी और विपुल विजयवर्गीय महराष्ट्र में काफी दिन रहे हैं. इन्हीं दोनों से पूछताछ के बाद मौलाना गौतम का सुराग मिला और धर्म परिवर्तन के इस बड़े रैकेट का खुलासा हुआ. उत्तर प्रदेश एटीएस अब तक 20 लड़कियों के परिवारों से पूछताछ कर चुका है.

 

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