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पुणे: लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूर बेहाल, कोई सुध लेने वाला नहीं

लॉकडाउन के कारण पुणे के दिहाड़ी मजदूर घर लौट नहीं सकते, जहां काम करते थे उसने घर खाली करवा लिया. अब फुटपाथ पर इसी उम्मीद में बैठे हैं कि कोई उन्हें खाना देने आएगा या प्रशासन उन्हें कोई शेल्टर उपलब्ध कराएगा.

लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ीं (वीडियो से कैप्चर तस्वीर) लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ीं (वीडियो से कैप्चर तस्वीर)

  • जिसके लिए काम करते थे उसने कमरे खाली कराए
  • अब बेसहारा फुटपाथ पर बैठे हैं दिहाड़ी मजदूर

कोरोना वायरस महामारी को मात देने के लिए लोगों का घरों में रहना जारी है. इसलिए देश में जगह-जगह लॉकडाउन का पालन कराया जा रहा है, लेकिन इसी के साथ दिहाड़ी मजदूरों को दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है.

ये मजदूर अपने मूल स्थानों को भी लौट नहीं सकते, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से यात्रा का कोई साधन उपलब्ध नहीं है. पुणे के ऐतिहासिक शनिवारवाड़ा के बाहर 50 से 60 दिहाड़ी मजदूरों को देखा गया जो इसी इंतजार में थे कि दानी लोग या एजेंसियां उनकी सुध लेने आएंगी.

सामाजिक संस्थाओं या प्रशासन पर टिकी उम्मीद

उनके लिए न तो खाने का कोई इंतजाम है और न सिर छुपाने को. इन्होंने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जिसके लिए काम करते थे उसने उनसे कमरे खाली करने के लिए कह दिया. अब फुटपाथ पर इसी उम्मीद से पूरा दिन काट रहे हैं कि कोई उन्हें खाना देने आएगा या प्रशासन उन्हें कोई शेल्टर उपलब्ध कराएगा.

घरों से लोगों के नहीं निकलने की वजह से इन दिहाड़ी मजदूरों की सारी उम्मीद सामाजिक संस्थाओं या प्रशासन पर टिकी हैं. बता दें कि महाराष्ट्र में देश में सबसे अधिक कोरोना वायरस पॉजिटिव केस सामने आए हैं. इसलिए यहां लॉकडाउन समेत कई पाबंदियों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है.

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