राजधानी दिल्ली में कोरोना के प्रकोप ने दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. उनकी रोजी-रोटी पर ब्रेक तो लग ही गया है, दिल्ली में कोरोना से संक्रमित होने का खतरा भी उन्हें सता रहा है.
लिहाजा कई मजदूर, रिक्शा चालक हड़बड़ी में अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं. ऐसे ही दो शख्स दिल्ली में अक्षरधाम के पास दिखे. आवागमन के साधनों की कमी में ये दोनों रिक्शा चलाकर ही दिल्ली से कोलकाता जाना चाहते हैं.
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रिक्शा से दिल्ली से कोलकाता?
पश्चिम बंगाल के रहने वाले पंचू मंडल और उनके एक साथी दिल्ली में रिक्शा चलाकर गुजारा करते हैं. लेकिन लॉकडाउन की वजह से न सिर्फ इन्हें काम मिलना बंद हो गया है बल्कि यहां कोरोना से संक्रमित होने का खतरा भी सता रहा है. इनका कहना है कि दिल्ली में इनके पास न रहने के लिए जगह है, न ही सवारियां मिल रही है, इसलिए ये लोग अब अपने घर जा रहे हैं.
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ये दोनों रिक्शा लेकर पश्चिम बंगाल की लगभग असंभव यात्रा पर निकल तो पड़े थे, लेकिन अक्षरधाम में पुलिस ने इन्हें रोककर वापस कर दिया. पंचू मंडल ने कहा कि पुलिस हमें आगे नहीं जाने दे रही है. पुलिस का कहना है कि हमें बसों के जरिए घर भेजा जाएगा. हालांकि पंचू मंडल अभी भी रिक्शा से ही जाना चाहते हैं.
Paanchu Mandal: I was going to West Bengal. Police have turned us back, they say we'll be sent on a bus. We're 2 drivers, we would've taken turns to pull the rickshaw & reach WB. It would've taken us 7 days to reach. We are not getting any work here, don't get passengers anymore. https://t.co/LCC1BEOLPD pic.twitter.com/bABasqHk2n
— ANI (@ANI) March 28, 2020
पंचू मंडल ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल जा रहा था, लेकिन पुलिस ने हमें लौटा दिया, वे कह रहे हैं कि हमें बस से भेजा जाएगा, हम रिक्शा चलाने वाले दो लोग थे, हम बारी बारी से रिक्शा खींचते और पश्चिम बंगाल पहुंच जाते, हमें सात दिन लगता." पंचू मंडल ने कहा कि अब यहां हमें कोई काम नहीं मिल रहा है. कोई सवारी नहीं है, हमारे लिए बहुत मुश्किल वक्त है.
बता दें कि दिल्ली समेत देश भर में लॉकडाउन की घोषणा के बाद दिल्ली एनसीआर में रहने वाले हजारों मजदूर बिहार-झारखंड, यूपी और बंगाल के लिए पैदल ही निकल चुके हैं. दिल्ली से उत्तर प्रदेश जाने वाली खाली सड़कों पर इन मजदूरों का रेला देखने को मिल रहा है. सरकार इन मजदूरों को फिलहाल जहां है वहीं रहने को कह रही है लेकिन अनिश्चितता, रोजी-रोटी की किल्लत और बीमारी के खौफ की वजह से ये मजदूर रुकने को तैयार नहीं हैं.