भविष्य के लिए बचत के मकसद से म्यूचुअल फंड में निवेश करना एक बेहतर विकल्प है. लेकिन बीते 1 जुलाई से म्यूचुअल फंड में निवेश के नियम बदल गए हैं. नए नियम के तहत अब म्यूचुअल फंड में निवेश पर स्टांप ड्यूटी भी देना होगा. जाहिर सी बात है कि, म्यूचुअल फंड में निवेश महंगा हो जाएगा. ऐसे में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. आइए जानते हैं कि इस नए नियम का आप पर कितना असर पड़ेगा.
कितना लगेगा स्टांप ड्यूटी
नए नियम के मुताबिक निवेशकों को 0.005 प्रतिशत की दर से स्टांप ड्यूटी देना होगा. अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपको कुल निवेश की रकम पर ये चार्ज देना है. ये नियम सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट यानी एसआईपी या एसटीपी के जरिए निवेश करने वालों पर भी लागू होगा. इसके अलावा आप चाहे डेट में निवेश करें या फिर इक्विटी में, आपको सभी तरह से स्टांप ड्यूटी चार्ज देनी ही है.
म्यूचुअल फंड की खरीदारी के अलावा बाजार में अथवा बाजार बंद होने के बाद एक डीमैट खाते से दूसरे डीमैट खाते में यूनिटों के ट्रांसफर पर 0.015 प्रतिशत की दर से स्टांप शुल्क लगेगा. हालांकि, म्यूचुअल फंड यूनिटों के समयावधि समाप्त होने पर उनकी डिलिवरी पर स्टांप शुल्क नहीं देना होगा.
1 लाख के निवेश उदाहरण से समझें
उदाहरण के तौर पर प्रत्येक एक लाख रुपये की खरीद पर निवेशकों को 5 रुपये का भुगतान करना होगा. इस लिहाज से एक लाख रुपये के निवेश पर 99,995 रुपये के यूनिट आवंटित किये जाएंगे.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
अधिकतर एक्सपर्ट का मानना है कि स्टांप ड्यूटी का छोटे या आम निवेशकों पर मामूली प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, जो लोग करोड़ों में निवेश करते हैं उनके लिए चुनौती बढ़ गई है. प्राइम इन्वेस्टर की सह- संस्थापक विद्या बाला ने कहा, ‘‘खुदरा निवेशकों पर इसका बहुत मामूली या फिर कोई प्रभाव नहीं होगा. खुदरा निवेशक यदि तीन माह के भीतर म्यूचुअल फंड में करोड़ों रुपये का निवेश करते हैं तभी उनपर इस स्टांप शुल्क का कुछ असर हो सकता है.’’
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सैम्को सिक्युरिटीज से जुड़े ओंकेश्वर सिंह ने कहा कि इसका असर यूनिट रखने की अवधि पर निर्भर करेगा. लंबे समय के निवेशकों पर मामूली असर होगा. बाला ने स्टांप शुल्क के असर के बारे में बताया कि स्टांप ड्यूटी काटने के बाद ही यूनिट आवंटित किये जाएंगे.