जीका वायरस से निपटने को सुरक्षित DNA टीका विकसित

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जीका वायरस मच्छरों के काटने से होने वाला संक्रमण है जिससे जन्म के समय बच्चों में विकृतियां होने की आशंका होती है और वयस्कों में तंत्रिका तंत्र संबंधी जटिलताएं होती हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

नंदलाल शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 05 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 7:33 PM IST

वैज्ञानिकों के अनुसार जीका वायरस के प्रकोप से बचने के लिए शुरुआती दौर में मनुष्य पर क्लीनिकल ट्रायल में एक डीएनए आधारित जीका वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी पाया गया है.

जीएलएस-5700 टीके में सिंथेटिक डीएनए निर्देश होते हैं जो विशेष जीका वायरस एंटीजन के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम करते हैं.

अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जीका वायरस मच्छरों के काटने से होने वाला संक्रमण है जिससे जन्म के समय बच्चों में विकृतियां होने की आशंका होती है और वयस्कों में तंत्रिका तंत्र संबंधी जटिलताएं होती हैं.

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जीका वायरस 2015 और 2016 में ब्राजील, कैरेबियन और दक्षिण अमेरिका से फैला था. हालांकि इस संक्रमण का अभी कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है.

यह पहला अध्ययन है जो दिखाता है कि डीएनए का टीका इस वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित कर सकता है जिसमें प्रतिकूल प्रभाव कम से कम होते हैं. इससे टीके के और अधिक क्लीनिकल ट्रायल के रास्ते खुल रहे हैं.

गुजरात में जीका के 3 मामले

इसी साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुजरात में जीका के तीन मामलों की पुष्टि की, लेकिन राज्य सरकार ने कहा था कि 'चिंता की कोई बात नहीं है', क्योंकि सभी प्रभावी उपाय किए जा रहे हैं. भारत में पहली बार जीका विषाणु से पीड़ित होने का मामला सामने आया है.

डब्ल्यूएचओ ने पुष्टि की थी कि अहमदाबाद में संदिग्ध मरीज जीका विषाणु से ही पीड़ित हैं, जिनमें एक गर्भवती महिला भी शामिल है.

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जीका के तीनों मामले अहमदाबाद के औद्योगिक उपनगरीय इलाके बापूनगर में सामने आए हैं. जीका पीड़ितों में एक 64 वर्षीया महिला, हाल ही में मां बनी एक 34 वर्षीया महिला और एक 22 वर्षीया गर्भवती महिला शामिल हैं.

पहला मामला जहां पिछले वर्ष फरवरी में सामने आया था और दूसरा मामला नवंबर में सामने आया. ताजा मामला इसी वर्ष जुलाई में सामने आया.

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