पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) भारी बढ़त बनाए हुए है. राज्य के 293 सीटों पर हुए चुनाव में 207 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है जो कि बहुमत (148) से कहीं ज्यादा है. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) महज 80 सीटों पर आगे चल रही है.
रुझानों से साफ है कि टीएमसी का 15 साल पुराना शासन खत्म होने की ओर है और बीजेपी पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की ओर बढ़ रही है.
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बीजेपी की बढ़त को खूब कवरेज दिया जा रहा है. वर्ल्ड मीडिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक विस्तार और विपक्ष के लिए बड़ा झटका बता रही है.
रॉयटर्स (ब्रिटेन)
ब्रिटेन के लंदन स्थित समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा कि भाजपा की जीत कई मायनों में अहम है. एजेंसी ने लिखा, 'सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी राज्य चुनावों में बड़ी जीत दर्ज करने की ओर बढ़ती दिख रही है. इस जीत के साथ ही समान नागरिक संहिता और बुनियादी ढांचा निर्माण जैसी उसकी प्रमुख नीतियों को और गति मिल सकती है. बीजेपी के लिए यह 2029 के आम चुनाव के मद्देनजर भी अच्छी खबर है.'
एजेंसी ने लिखा कि विपक्ष और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि बीजेपी की सफलता के पीछे बंगाल में मतदाता सूची के संशोधन (SIR) जैसे कारण हैं, जिसके चलते लाखों लोग, खासकर मुसलमान, वोटर लिस्ट से बाहर हो गए. विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों में उनके समर्थकों की संख्या ज्यादा है. हालांकि चुनाव आयोग ने कहा है कि यह प्रक्रिया स्थापित नियमों के तहत की गई.
रॉयटर्स की रिपोर्ट में आगे लिखा गया, 'विश्लेषकों का यह भी कहना है कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, आर्थिक विकास के एजेंडे और मजबूत हिंदुत्व आधारित राजनीति का मेल विपक्ष के लिए भारी पड़ रहा है.'
दिल्ली स्थित थिंकटैंक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के फेलो राहुल वर्मा के हवाले से एजेंसी ने लिखा, 'बीजेपी के पास एक करिश्माई राष्ट्रीय नेता है, पार्टी बेहद संगठित है, उसके पास संसाधनों की बढ़त है जो कई दलों के पास नहीं है, और एक स्पष्ट वैचारिक नैरेटिव है- ये सभी कारक हिंदू आबादी के कुछ वर्गों को एकजुट करने में मदद करते हैं.'
बीबीसी (ब्रिटेन)
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर BBC ने अपनी खबर को शीर्षक दिया है- 'मोदी की बीजेपी ने भारत के सबसे कठिन राजनीतिक गढ़ों में से एक, बंगाल पर फतह हासिल की'
रिपोर्ट में लिखा गया, 'कई सालों तक भारत का पश्चिम बंगाल राज्य नरेंद्र मोदी की राजनीतिक बढ़त के बावजूद एक बड़ा अपवाद बना रहा... वहां सोमवार को बीजेपी की जीत मोदी के 12 साल के शासन के सबसे अहम राजनीतिक सफलताओं में गिनी जाएगी.'
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर के अनुसार, 10 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले इस राज्य की जीत मोदी के हिंदू राष्ट्रवादी एजेंडे को नई गति देगी और पूर्वी भारत में BJP का विस्तार पूरा करेगी.
डीडब्ल्यू (जर्मनी)
जर्मन ब्रॉडकास्टर डीडब्ल्यू (Deutsche Welle) ने अपनी खबर को शीर्षक दिया है- 'नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में जीत का दावा किया'
डीडब्ल्यू ने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी पार्टी पहली बार राज्य में सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है. मोदी की नजर अब अन्य विपक्षी गढ़ों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने पर है.
डीडब्ल्यू ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान को प्रमुखता दी है. पीएम मोदी ने बंगाल में जीत को 'शानदार जनादेश' बताया. रिपोर्ट में लिखा गया, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी पार्टी पहली बार राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में है.'
जर्मन मीडिया ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के जश्न की तस्वीरें भी प्रकाशित की हैं जिनमें दिख रहा है कि बीजेपी कार्यकर्ता कोलकाता की सड़कों पर ढोल-नगाड़े बजाते हुए रंग-गुलाल उड़ा रहे हैं.
रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि, 'बीजेपी की बढ़त को तृणमूल कांग्रेस के प्रति अस्वीकृति ज्यादा माना जा रहा है. लोग टीएमसी से नाराज थे इसलिए उन्होंने बीजेपी को वोट दिया. यह उनका बीजेपी को पूर्ण समर्थन नहीं माना जाना चाहिए.'
टीआरटी वर्ल्ड (तुर्की)
तुर्की के सरकारी न्यूज चैनल टीआरटी वर्ल्ड ने भी भारत के पांच राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु के चुनाव नतीजों पर खबर प्रकाशित की है. चैनल ने लिखा, 'भारत के प्रमुख राज्यों के चुनावों में मतगणना ऐसे समय हो रही है जब मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर विवाद बना हुआ है.
TRT World ने बीजेपी बंगाल प्रमुख समिक भट्टाचार्य के हवाले से कहा, 'यह चुनाव अस्वीकृति का था. राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस हार जाएगी.'
रिपोर्ट में SIR के तहत मतदाता सूची से नाम काटे जाने, खासकर अल्पसंख्यकों पर इसके असर और चुनाव के दौरान हिंसा के आरोपों का भी जिक्र किया.
गल्फ न्यूज (यूएई)
यूएई स्थित न्यूज वेबसाइट गल्फ न्यूज ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी बढ़त पर जश्न की खूब सारी तस्वीरें प्रकाशित की हैं. वेबसाइट ने अपनी खबर को शीर्षक दिया- बीजेपी को बढ़त, टीएमसी को झटका!
गल्फ न्यूज ने लिखा, 'भारत के सबसे राजनीतिक रूप से मजबूत राज्यों में से एक बंगाल में जगह बनाने की बीजेपी की सालों लंबी कोशिश आखिरकार सफल होती दिखी. पार्टी 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े को पार कर करीब 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और राज्य में पहली बार सरकार बनाने की ओर बढ़ती नजर आ रही है.'
प्रथम आलो (बांग्लादेश)
बांग्लादेश के स्थानीय अखबार, प्रथम आलो में एक विश्लेषणात्मक लेख प्रकाशित किया गया है जिसका शीर्षक है- पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है.
लेख में लिखा गया है, 'इस साल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भारतीय चुनावी इतिहास में दो कारणों से याद किए जाएंगे. पहला, मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR), जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों का वोट देने का अधिकार छिन गया. और दूसरा, चुनाव को हिंसा-मुक्त बनाने के लिए केंद्रीय बलों की अभूतपूर्व तैनाती.'
लेख में कहा गया है कि अगर बंगाल में बीजेपी जीतती है तो यह उसके लिए बड़ा मील का पत्थर साबित होगी. यह बीजेपी की उन राज्यों में जीत होगी जिन्हें अब तक जीत पाना मुश्किल माना जाता रहा है (अन्य दो हैं- तमिलनाडु और केरल). अगर यह जीत मिलती है, तो यह हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण के सहारे आएगी. इससे यह साबित होगा कि हिंदी पट्टी का हिंदुत्व अब बंगालियों के मन में भी गहराई से बैठ गया है. बंगाली लंबे समय से समन्वयवादी हिंदू परंपरा से पहचाने जाते रहे हैं.
लेख में आगे लिखा गया, 'जहां बीजेपी की जीत से राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण और केंद्र से फंडिंग का रास्ता खुल सकता है, वहीं इससे तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट भी आ सकता है.'
बांग्लादेशी अखबार में लिखा गया कि वामपंथ की तरह मजबूत वैचारिक आधार के बिना, सवाल यह होगा कि चुनावी हार के बाद पार्टी कितने समय तक टिक पाएगी. सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन के दौरान जिस तरह तृणमूल ने वामपंथ के जमीनी कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ा था, क्या हार की स्थिति में वही कार्यकर्ता बीजेपी की ओर चले जाएंगे? इससे पार्टी की अंदरूनी कमजोरियां और उजागर हो सकती हैं.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क