'हिंदुत्व अब बंगालियों के मन में भी बैठ गया', पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की बढ़त पर बांग्लादेश की मीडिया क्या कह रही

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे जारी किए जा रहे हैं. चुनाव नतीजों के रुझानों में बीजेपी करीब 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. बांग्लादेशी मीडिया में भी इस चुनाव को लेकर बहुत चर्चा हो रही है.

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी भारी बढ़त पर है (Photo: Reuters/File) पश्चिम बंगाल में बीजेपी भारी बढ़त पर है (Photo: Reuters/File)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:21 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार, 4 मई को आ रहे हैं. राज्य की 293 सीटों पर हुए वोटिंग की गिनती जारी है और रुझानों में भारतीय जनता पार्टी करीब 200 सीटों पर आगे चल रही है जो कि बहुमत के आंकड़े (148) से काफी ज्यादा है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बढ़त पर सूबे से सटे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी काफी चर्चा है. वहां की मीडिया में चुनाव को लेकर लाइव डिटेल्स बताई जा रही हैं और बीजेपी की संभावित जीत का विश्लेषण भी किया जा रहा है.

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बांग्लादेश के स्थानीय अखबार, प्रथम आलो में एक विश्लेषणात्मक लेख प्रकाशित किया गया है जिसका शीर्षक है- पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है.

लेख में लिखा गया है, 'इस साल के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव भारतीय चुनावी इतिहास में दो कारणों से याद किए जाएंगे. पहला, मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR), जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों का वोट देने का अधिकार छिन गया. और दूसरा, चुनाव को हिंसा-मुक्त बनाने के लिए केंद्रीय बलों की अभूतपूर्व तैनाती.'

बीजेपी का जीतना पार्टी के लिए मील का पत्थर साबित होगी

लेख में कहा गया है कि अगर बंगाल में बीजेपी जीतती है तो यह उसके लिए बड़ा मील का पत्थर साबित होगी. यह बीजेपी की उन राज्यों में जीत होगी जिन्हें अब तक जीत पाना मुश्किल माना जाता रहा है (अन्य दो हैं- तमिलनाडु और केरल). अगर यह जीत मिलती है, तो यह हिंदुत्व आधारित ध्रुवीकरण के सहारे आएगी. इससे यह साबित होगा कि हिंदी पट्टी का हिंदुत्व अब बंगालियों के मन में भी गहराई से बैठ गया है. बंगाली लंबे समय से समन्वयवादी हिंदू परंपरा से पहचाने जाते रहे हैं.

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लेख में आगे लिखा गया, 'जहां बीजेपी की जीत से राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण और केंद्र से फंडिंग का रास्ता खुल सकता है, वहीं इससे तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट भी आ सकता है.'

बांग्लादेशी अखबार में लिखा गया कि वामपंथ की तरह मजबूत वैचारिक आधार के बिना, सवाल यह होगा कि चुनावी हार के बाद पार्टी कितने समय तक टिक पाएगी. सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन के दौरान जिस तरह तृणमूल ने वामपंथ के जमीनी कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ा था, क्या हार की स्थिति में वही कार्यकर्ता बीजेपी की ओर चले जाएंगे? इससे पार्टी की अंदरूनी कमजोरियां और उजागर हो सकती हैं.

बांग्लादेशी अखबार ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल

बांग्लादेशी मीडिया में पश्चिम बंगाल चुनाव की कथित अनियमितताओं की भी चर्चा हो रही है.

'द डेली स्टार' में छपे एक ऑपिनियन लेख में लिखा गया, 'भारत के चुनाव आयोग की एक गौरवशाली परंपरा रही है. लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के चुनाव आयोग ने अपनी चमक खो दी है. वोटर लिस्ट को अपडेट करने के लिए स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) की प्रक्रिया सही लगती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसे जिस तरीके से लागू किया गया, उसने बड़ी संख्या में मतदाताओं को नाराज किया है.'

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, SIR के बाद शुरुआती तौर पर करीब 91 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए. SIR एक प्रक्रिया है जिसमें अयोग्य, डुप्लीकेट या संदिग्ध नामों को हटाकर लिस्ट की जांच की जाती है.

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हालांकि, कई उदाहरण सामने आए हैं जहां लोगों के नाम कथित तौर पर गलत तरीके से हटा दिए गए. कहीं पति और बच्चे मतदाता थे लेकिन पत्नी नहीं, कहीं वर्षों से सेना में सेवा दे रहा व्यक्ति लिस्ट से हटा दिया गया. यहां तक कि नेताजी सुभाष बोस या नंदलाल बसु जैसे प्रसिद्ध लोगों के परिवारजनों को भी बताया गया कि वे वोट नहीं डाल सकते. 

अल्पसंख्यकों के मुद्दे को लेकर बांग्लादेश अखबार ने क्या कहा?

बांग्लादेशी अखबार में आगे लिखा गया, 'बीजेपी के प्रचार में मुस्लिम मुद्दा भी प्रमुख रहा है. नेता शुभेंदु अधिकारी अक्सर कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में करीब एक करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या हैं. यह संख्या काफी बड़ी है, लेकिन वे हैं कहां? और वे पश्चिम बंगाल ही क्यों आएंगे, जहां से खुद लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जा रहे हैं? इतनी कवायद के बावजूद, चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया में एक भी घुसपैठिए की पहचान नहीं कर पाया, जिसे प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने भाषणों में कहते रहे हैं.'

लेख में हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की भी आलोचना की गई है. लेख में लिखा गया, 'तृणमूल कांग्रेस की भी अपनी कमजोरियां हैं. उस पर वसूली, बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक साजिशों के आरोप लगते रहे हैं.'

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बांग्लादेश के एक और अखबार द फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने लिखा है कि तृणमूल पश्चिम बंगाल में हार की तरफ बढ़ रही है. अखबार लिखता है, 'पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो करीब 15 वर्षों से इस पद पर हैं, अब गंभीर चुनौती का सामना कर रही हैं क्योंकि वोट काउंटिंग में उनकी पार्टी पीछे चल रही है. शुरुआती रुझान राज्य में बदलाव के संकेत दे रहे हैं.'

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया अध्याय लिखेगी बीजेपी

बांग्लादेशी अखबार 'दैनिक इत्तेफाक' ने तो साफ लिख दिया है कि बीजेपी बंगाल में जीत चुकी है. अखबार ने अपनी खबर को शीर्षक दिया है- 'भवानीपुर में ममता से पीछे रहने के बावजूद पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने सरकार बना ली'

अखबार लिखता है, 'बीजेपी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की कगार पर है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के डेढ़ दशक लंबे शासन का अंत हो सकता है. चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राज्य भर में जीत का जश्न मनाना शुरू कर दिया है.'

अखबार आगे लिखता है, 'हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में हालांकि ममता बनर्जी अब तक बढ़त बनाए हुए हैं. मतगणना के छठे चरण के बाद वे बीजेपी उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से 7,200 वोटों से आगे हैं. हालांकि शुभेंदु इस नतीजे से निराश नहीं हैं. उनका दावा है कि अब तक सिर्फ उस इलाके के वोटों की गिनती हुई है जिसे ममता का मुख्य वोट बैंक माना जाता है और आने वाले चरणों में नतीजे पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में चले जाएंगे.'

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