लीक हो गई ईरान पर हमले की ट्रंप की तय की तारीख, 12 वॉरशिप-सैकड़ों फाइटर जेट तैयार

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच युद्ध अब किसी भी समय छिड़ सकता है. इजरायल ने भी कुछ ही दिनों के भीतर युद्ध शुरू होने की आशंका जताते हुए अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं.

Advertisement
ईरान पर अमेरिकी हमले की तारीख तय! (Photo: Reuters) ईरान पर अमेरिकी हमले की तारीख तय! (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • वाशिंगटन,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

तेहरान परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के बावजूद युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही हैं. अब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख तय कर ली है. रिपोर्ट पर ये भी दावा किया गया है कि  पेंटागन संभावित ईरानी जवाबी हमले की तैयारी के लिए आने वाले दिनों में कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से मिडिल ईस्ट से हटा रहा है.

अमेरिकी समाचार एजेंसी एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध निकट है और ये हफ्तों तक चलने वाला पूर्ण पैमाने का संघर्ष हो सकता है. इजरायल भी कुछ दिनों में युद्ध की स्थिति के लिए तैयारियां कर रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मुद्दे पर परेशान हो चुके हैं और उनके करीबी सलाहकार ने आने वाले हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की 90% संभावना जताई है.

एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यदि सैन्य कार्रवाई शुरू हुई तो ये सीमित या प्रतीकात्मक नहीं होगी, बल्कि कई हफ्तों तक चलने वाला व्यापक अभियान होगा. ये कार्रवाई पिछले जून में हुए 12-दिवसीय इजरायली हमले से कहीं बड़ा होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान में ऑपरेशन चला सकते हैं.

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बढ़ाई ताकत

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है. वर्तमान में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 12 युद्धपोत, सैकड़ों लड़ाकू विमान और कई एयर डिफेंस सिस्टम मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. पिछले कुछ दिनों में 150 से अधिक अमेरिकी सैन्य कार्गो विमानों ने हथियारों और गोला-बारूद को मिडिल ईस्ट पहुंचाने के लिए उड़ान भरी. जबकि पिछले 24 घंटों के दौरान अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति और तेज कर दी है, जिनमें 50 से ज्यादा लड़ाकू विमानों (जिनमें F-35, F-22 और F-16 शामिल हैं) ने मिडिल ईस्ट की ओर उड़ान भरी है. इस भारी सैन्य जमावड़े ने दुनिया भर में ये डर पैदा कर दिया है कि क्षेत्र में कभी भी एक बड़ा विनाशकारी युद्ध शुरू हो सकता है.

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के रवैये से काफी नाराज हैं. एक वरिष्ठ सलाहकार ने दावा किया है कि अगले कुछ हफ्तों में सैन्य कार्रवाई की 90 प्रतिशत संभावना है. हालांकि, पेंटागन के कुछ अधिकारी अब भी सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं. ये अभियान पिछले साल के 12 दिनों के युद्ध से कहीं बड़ा और व्यापक होने की उम्मीद है.

Advertisement

'इस वीकेंड हो सकता है हमला'

सीबीएस न्यूज़ के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने बताया है कि अमेरिकी सेना शनिवार को ही ईरान पर हमला कर सकती है. हालांकि, उन्होंने अभी तक हमले को मंजूरी देने या न देने का फैसला नहीं किया है.

वहीं, मामले से जुड़े सूत्रों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन इसका फैसला इस वीकेंड के बाद लेने की संभावनाएं हैं और साथ ही ये भी बताया कि पेंटागन संभावित ईरानी जवाबी हमले की तैयारी के लिए आने वाले दिनों में कुछ कर्मियों को अस्थायी रूप से मिडिल ईस्ट से हटा रहा है.

'बढ़ गई हैं संघर्ष की संभावनाएं'

उधर, इजरायली रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वह अगले कुछ दिनों के अंदर युद्ध शुरू होने के परिदृश्य के लिए तैयार हैं. पूर्व इजरायली सैन्य खुफिया प्रमुख अमोस यादलिन ने कहा कि संघर्ष की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है.

उन्होंने सुझाव दिया कि स्थिति इतनी गंभीर है कि फिलहाल इजरायल से बाहर यात्रा करने से पहले दो बार सोचना चाहिए. इजरायल को अंदेशा है कि अमेरिकी हमले की स्थिति में ईरान उस पर लंबी दूरी की मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई कर सकता है.

Advertisement

ईरान में धमाकों की आवाज

इस भारी तनाव के बीच ईरान के तेहरान प्रांत के परंद में आग लगने की घटना सामने आई है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान में गहरा काला धुआं उठता दिखाई दे रहा है. हालांकि, ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि ये धुआं नदी के किनारे नरकट (reeds) में लगी आग के कारण था, लेकिन स्थानीय नागरिकों ने धमाकों की आवाज सुनने की भी बात कही है. परंद का ये इलाका संवेदनशील सैन्य ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बेस के पास स्थित है.

'ट्रंप की रेड लाइन्स'

दरअसल, भले ही जिनेवा में बातचीत जारी है. लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई गहरी है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को कहा कि ईरान अभी भी वाशिंगटन की 'रेड लाइन्स' को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है.

दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन शुरू कर दिया है. वह ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में रूस के साथ संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने जा रहा है. साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भी सैन्य अभ्यास तेज कर दिया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement