US-Israel-Iran War LIVE News & Latest Updates: दुनिया की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए मिडिल-ईस्ट को लेकर फिलहाल अभी तक समझौता नहीं हो सका है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यूएस-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता रुक गई. करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके, जिससे सीजफायर पर संकट गहरा गया है.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान ने जंग खत्म करने के लिए यूएस की शर्तें नहीं मानी. बातचीत में रुकावट आने के बाद वेंस अमेरिका लौट गए. दूसरी तरफ, ईरान ने इस बातचीत को नाकाम बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने बहुत ज़्यादा मांगें रखीं.
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत एक अस्थायी दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी समाधान में बदलने के लिए हो रही थी. इस वार्ता में अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ सहित कई सीनियर अधिकारी शामिल हुए.
47 सालों में उच्चतम स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी तरह से बातचीत की. लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद MoU' से बस कुछ ही इंच दूर थे, तो हमें बहुत ज्यादा मांगों, बदलते टार्गेट्स और रुकावटों का सामना करना पड़ा. कोई सबक नहीं सीखा गया. अच्छाई से अच्छाई मिलती है. दुश्मनी से दुश्मनी का जन्म होता है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट के पास आने की कोशिश करने वाले किसी भी सैन्य जहाज को अमेरिका के साथ दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम का उल्लंघन माना जाएगा और उससे सख़्ती और निर्णायक रूप से निपटा जाएगा.
ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा जारी एक बयान में गार्ड्स ने कहा कि यह स्ट्रेट ईरान की नौसेना के कंट्रोल और 'स्मार्ट मैनेजमेंट' के तहत है. उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज स्ट्रेट नियमों के अनुसार, गैर-सैन्य जहाजों के सुरक्षित गुज़रने के लिए खुला है.
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बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान दौरे के वक्त हिज्बुल्लाह के खतरे को खत्म करने का दावा किया. इस दौरान उन्होंने युद्ध जारी रखने की चेतावनी भी दी.
UK के डाउनिंग स्ट्रीट के मुताबिक, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन से बात की, जिसमें दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि एक स्थायी संघर्ष-विराम की जरूरत है, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए.
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का ईरानी राष्ट्र पर कोई असर नहीं पड़ता. उन्होंने यह भी कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान बहुत अच्छी पहल की थी, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिली. सरकारी मीडिया में छपे बयानों में, ग़ालिबफ़ ने वॉशिंगटन को चेतावनी भी दी और कहा, "अगर आप लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप तर्क के साथ आगे आएंगे, तो हम भी तर्क के साथ ही पेश आएंगे."
पाकिस्तान के झंडे वाले दो तेल टैंकर होर्मुज़ स्ट्रेट के पास पहुंचने के बाद वापस लौट गए. इससे डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी के बाद समुद्री आवाजाही में एक बार फिर रुकावट आने का संकेत मिला है. ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि ये जहाज़ खैरपुर और शालिमार इस अहम जलमार्ग से आगे नहीं बढ़ पाए और होर्मुज के पास से ही वापस लौट गए.