मध्यस्थता की आस नहीं हुई खत्म... US-ईरान को एक टेबल पर लाने में जुटे पाकिस्तान-तुर्की और मिस्र

पाकिस्तान में ईरान-अमेरिका के बीच हुई बातचीत से कोई हल नहीं निकल पाया है, लेकिन शांति वार्ता की उम्मीदें अब भी बनी हुई हैं. अस्थायी सीजफायर खत्म होने से पहले जंग रोकने की कोशिशें जारी हैं.

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ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने कहा- अगर भरोसा और मजबूत इच्छा हो, तो सभी पक्षों के हितों के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया जा सकता है. (Photo: AP) ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने कहा- अगर भरोसा और मजबूत इच्छा हो, तो सभी पक्षों के हितों के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया जा सकता है. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:29 PM IST

अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता से कोई ठोस हल नहीं निकल पाया है. जंग पर अभी तक पूर्ण विराम नहीं लग सका है. इस बीच बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद में वार्ता के बावजूद पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के साथ बातचीत जारी रखेंगे, ताकि मतभेदों को दूर कर मिडिल ईस्ट में जंग खत्म करने के लिए समझौते की कोशिश की जा सके. सूत्रों के हवाले से Axios ने यह जानकारी दी है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, 12 अप्रैल को तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने अलग-अलग अपने पाकिस्तानी समकक्ष से फोन पर बात की. इसके बाद दोनों नेताओं ने व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के सैयद अब्बास अराघची से भी बातचीत की.

माना जा रहा है कि 21 अप्रैल को सीजफायर खत्म होने से पहले समझौता संभव है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अगर ईरान 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में रखे गए प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो समझौता हो सकता है.

इस बीच, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोगदम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट की है. जिससे बातचीत की उम्मीदें फिर बढ़ गई है. 

रजा अमीरी मोगदम ने कहा कि इस्लामाबाद की बातचीत असफल नहीं रही, बल्कि इसने एक कूटनीतिक प्रक्रिया की नींव रखी है. उन्होंने लिखा, “अगर भरोसा और इच्छाशक्ति मजबूत होती है, तो सभी पक्षों के हितों के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार किया जा सकता है."

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21 घंटे चली अमेरिका–ईरान वार्ता में मुख्य विवाद परमाणु मुद्दों को लेकर रहा है. अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम एन्‍रिचमेंट रोक दे और अपने भंडार को खत्म करे.

इसके अलावा, जमा फंड को कितनी मात्रा में जारी किया जाए इस बात पर भी मतभेद बने हुए हैं. सोमवार से नौसैनिक नाकाबंदी के बाद बातचीत और जटिल होने की आशंका जताई जा रही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वे ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करने से रोकना चाहते हैं.

ट्रंप कर सकते हैं हवाई हमले

यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकाबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी.

सूत्रों के अनुसार, अगर नाकाबंदी के बावजूद ईरान अपना रुख नहीं बदलता, तो ट्रंप दोबारा हवाई हमले शुरू करने पर विचार कर सकते हैं. संभावित निशानों में पावर प्लांट और रेलवे लाइन जैसे नागरिक ढांचे भी शामिल हो सकते हैं, जिन पर हमले की धमकी ट्रंप पहले भी दे चुके हैं.

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जिन्होंने अमेरिकी वार्ता टीम का नेतृत्व किया, बिना किसी ठोस नतीजे के इस्लामाबाद से लौट गए. इसके बावजूद एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वेंस अब भी समझौते की उम्मीद कर रहे हैं. 

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