जंग से पहले 'टॉयलेट वॉर'! ईरान को घेरकर खड़े US सैनिक आपस में क्यों लड़ रहे

अमेरिका का जेराल्ड आर. फोर्ड जहाज पिछले साल जून से लगातार समुद्र में तैनात है. आमतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती नौ महीने की होती है, लेकिन सैन्य गतिविधि बढ़ने पर इसे बढ़ाया भी जाता है.

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 USS जेराल्ड आर. फोर्ड में क्या दिक्कत है. (Photo:AP) USS जेराल्ड आर. फोर्ड में क्या दिक्कत है. (Photo:AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:37 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी वक्त जंग हो सकती है. ईरान पूरी तरह से अलर्ट है. माना जा रहा है कि अमेरिका ने भी पूरी तैयारी कर ली है. अमेरिका का दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर. फोर्ड तेजी से मिडिल ईस्ट में तैनात है. लेकिन अब यह जहाज एक बड़ी मुसीबत भी लेकर आया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के अधिकतर टॉयलेट जाम हो चुके हैं. इससे विमान में मौजूद सैनिकों की जिंदगी बदहाल हो गई है. 4,500 से ज्यादा नौसैनिकों को रोजाना 45 मिनट तक लाइन में लगना पड़ रहा है. सीवेज सिस्टम फेल हो चुके हैं. 

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यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड जून 2025 से समुद्र में तैनात है. जनवरी में इसी जहाज ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया था. अब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस युद्धपोत को मध्य पूर्व में तैनात कर दिया गया है.

लेकिन हालात को और बदतर बना दिया है जहाज पर टॉयलेट जाम होने और सीवेज सिस्टम के ठप पड़ जाने ने. दुनिया का सबसे महंगा युद्धपोत माने जा रहे इस जहाज पर करीब 650 टॉयलेट हैं, जिनमें से अधिकांश काम नहीं कर रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और नौसैनिकों से बातचीत के मुताबिक, लगातार समुद्र में रहने के कारण नियमित रखरखाव नहीं हो पाया है, जिससे यह स्थिति पैदा हुई है.

हालात इतने खराब हैं कि टॉयलेट की कमी के कारण रोजाना 45 मिनट तक लंबी कतारें लग रही हैं. प्लंबिंग और मरम्मत के लिए जिम्मेदार टेक्नीशियन और नौसैनिकों के बीच अक्सर कहासुनी भी हो रही है. टेक्नीशियन रोज 19 घंटे तक काम कर रहे हैं ताकि सिस्टम को ठीक किया जा सके. यह पहली बार नहीं है जब यह समस्या सामने आई हो. 

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दरअसल, समस्या एक तकनीकी खामी से जुड़ी है. अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यह युद्धपोत एक नाजुक वैक्यूम आधारित सीवेज सिस्टम पर निर्भर है. इसका मतलब है कि एक वॉल्व की खराबी जहाज के सभी टॉयलेट को बंद कर सकती है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, हर बार सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए एसिड फ्लश पर करीब चार लाख डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन समस्याओं से उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ रहा, लेकिन घर से दूर रह रहे सैनिकों ने अपने परिवारों को जहाज की हकीकत बताई है.

जेराल्ड फोर्ड पर तैनात कई नौसैनिक 20 से 25 साल की उम्र के हैं. लगातार ड्यूटी और लंबी तैनाती के कारण उनके चेहरों पर थकान साफ दिखने लगी है. परिवार से दूर रहने का असर भी गहरा है. इस स्थिति ने कुछ सैनिकों को मौजूदा मिशन के बाद सेना छोड़ने तक का विचार करने पर मजबूर कर दिया है.

पिछले साल भी ऐसी ही स्थिति अमेरिका के लिए भारी पड़ी थी. अप्रैल-मई 2025 में रेड सी में हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन ने कई फाइटर जेट गंवा दिए थे. बाद में जांच में सामने आया कि अत्यधिक काम के बोझ और तेज ऑपरेशनल गति के कारण यह नुकसान हुआ था.

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