वेंस के पाकिस्तान जाने पर सस्पेंस, डील पर ईरान की ना-नुकुर... क्या होगा ट्रंप का अगला दांव?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान में अमेरिकी सरकार को लेकर गहरा अविश्वास बना हुआ है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी संकेतों से पता चलता है कि वे ईरान के सरेंडर की उम्मीद कर रहे हैं.

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अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने पर सस्पेंस. (Photo: AP) अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने पर सस्पेंस. (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:53 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता कराने के लिए पाकिस्तान कमर कस चुका है. डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिका का डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंचने वाला है. लेकिन इसके कई बाद रिपोर्ट्स में सामने आया कि वेंस फिलहाल व्हाइट हाउस में हैं और वह पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए हैं. ऐसे में अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान जाने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. 

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अमेरिकी डेलिगेशन के सस्पेंस के बीच ईरान साफ कह चुका है कि अमेरिका के पास अपनी अत्यधिक मांगों को छोड़ने और ईरानी जनता के अधिकारों का पूरी तरह सम्मान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि इस संकट का एकमात्र समाधान कूटनीति है.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान में अमेरिकी सरकार को लेकर गहरा अविश्वास बना हुआ है, जबकि अमेरिकी अधिकारियों के विरोधाभासी संकेतों से पता चलता है कि वे ईरान के सरेंडर की उम्मीद कर रहे हैं. लेकिन ईरान ताकत के आगे झुकता नहीं है.

ईरान के उपविदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने कहा है कि वेस्ट एशिया के मौजूदा संकट का एकमात्र समाधान कूटनीति ही है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्ध का रास्ता अपनाया है और हो सकता है कि वह फिर से यह कल्पना करे कि वह युद्ध के रास्ते पर बने रहकर कुछ हासिल कर सकता है.

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उन्होंने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है और इस मामले में कभी समझौता नहीं करेगा. ईरान के विरोधियों ने देश को तोड़ने की कोशिश की और कुछ सशस्त्र समूहों को तैयार किया था, लेकिन वे असफल रहे.

खतीबजादेह ने कहा कि दुश्मनों ने सोचा कि वे ईरानी जनता के बीच मानसिक भ्रम पैदा कर सकते हैं और फिर उन्हें अपने ही देश के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उकसा सकते हैं. हालांकि, भारी बहुमत में जनता ने इसके खिलाफ खड़े होकर इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि ईरानी एक ऐसे घृणित दुश्मन का सामना कर रहे हैं, जिसकी बेशर्मी, दुश्मनी और अपराध का स्तर असीमित है.

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद ईरान जैसे लोग, राष्ट्र और देश के पास इस राष्ट्रीय संघर्ष और प्रतिरोध में विजयी होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. हार कोई विकल्प नहीं है.

वहीं, ईरान के नेता मोहम्मद मुखबर का कहना है कि कूटनीति तभी राष्ट्र के लिए स्वीकार्य है, जब वह मैदान और शक्ति के रास्ते के साथ हो. हम सतर्क हैं कि बातचीत कहीं युद्ध को लंबा खींचने का बहाना न बन जाए.

ईरान संग डील पर अड़े ट्रंप

इस असमंजस के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि हम ईरान के साथ जो डील करने जा रहे हैं. वह JCPOA (ईरान न्यूक्लियर डील) से बेहतर होगी. यह डील बराक ओबामा और स्लीपी जो बाइडेन ने की थी, जो हमारे देश की सुरक्षा से जुड़े सबसे खराब डील्स में से एक थी. यह डील ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने की तरफ ले जाने वाली गारंटी थी. अगर हम इस नई डील पर काम नहीं कर रहे होते, तो यह पुरानी डील हो ही जाती. 

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ट्रंप ने कहा कि ओबामा-बाइडेन ने ईरान को 1.7 अरब डॉलर नकद दिए थे. यह पैसा बोइंग 757 विमान में लादकर ईरान के नेताओं को भेजा गया था, ताकि वे इसे अपनी मर्जी से खर्च कर सकें. उन्होंने वर्जीनिया, डीसी और मैरीलैंड के बैंकों से यह सारा पैसा निकाला. उन बैंकरों ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा. इसके अलावा, ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर और दिए गए. अगर मैंने उस डील को खत्म नहीं किया होता, तो 'डील' के तहत न्यूक्लियर हथियार ईरान ने इस्तेमाल कर लिए होते, न सिर्फ इजराइल के खिलाफ, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में, जिसमें हमारे प्यारे अमेरिकी मिलिट्री बेस भी शामिल हैं.

ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप का ऐसे में अगला दांव क्या होता है क्योंकि सीजफायर की अवधि समाप्त हो रही है. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अगर सीजफायर खत्म होने से पहले डील नहीं हुई तो ईरान पर बमों की बौछार होगी.

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