अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को पाकिस्तान में शांति वार्ता होने जा रही है. इस बातचीत को लेकर पाकिस्तान ने बयान दिया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्थायी युद्धविराम के लिए वार्ता का यह चरण निर्णायक है. शहबाज शरीफ ने कहा दोनों देशों के नेतृत्व शनिवार को इस्लामाबाद में वार्ता शुरू करेंगे.
इसके अलावा पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करना सिर्फ पाकिस्तान के लिए गर्व का क्षण नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम विश्व के लिए भी गर्व की बात है.
शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के नेतृत्व का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनके अनुरोध पर युद्धविराम के लिए सहमति जताई और शांति वार्ता के लिए तैयार हुए. शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और नागरिकों से भी अपील की कि वे इन वार्ताओं की सफलता के लिए प्रार्थना करें.
बढ़ते तनाव के बीच होने वाली इन वार्ताओं में वॉशिंगटन और तेहरान के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पिछले कई हफ्तों से धीरे-धीरे मजबूत होती आई है, हालांकि इस बैकचैनल कूटनीति के विवरण अब भी गोपनीय रखे गए हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स में सबसे पहले इस्लामाबाद की भूमिका की ओर इशारा किया गया था, जिसे बाद में अधिकारियों ने स्वीकार किया. उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिका का एक प्रस्ताव तेहरान तक पहुंचाया गया था. हालांकि, यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि इन अप्रत्यक्ष वार्ताओं में ईरान की ओर से मुख्य संपर्क बिंदु कौन रहा है.
मीटिंग से पहले दिखाए सख्त तेवर
बता दें, इस बातचीत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जेडी वेंस पाकिस्तान के लिए निकल गए हैं. ईरान के 2 प्लेन भी पाकिस्तान रवाना हुए हैं. वहीं, मीटिंग से पहले ट्रंप, ईरान और वेंस ने सख्त तेवर दिखाए हैं.
ईरान ने कूटनीतिक बातचीत को लेकर सख्त रुख अपनाया है. ईरान ने साफ कर दिया है कि शांति वार्ता आगे बढ़ाने से पहले अमेरिका को उसकी दो अहम शर्तें माननी होंगी.
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने कहा कि जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसी भी स्तर पर बातचीत संभव नहीं है.
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि किसी भी वार्ता की शुरुआत से पहले दो अहम मुद्दों पर आपसी सहमति से समाधान जरूरी है.
उन्होंने कहा कि पहली शर्त लेबनान में तत्काल और प्रभावी युद्धविराम लागू करना है, जबकि दूसरी शर्त ईरान के ब्लॉक किए गए फंड्स को रिलीज करना है.
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