ईरानी तेल पर अमेरिका की ओर से दी गई छूट इस हफ्ते खत्म होने वाली है. अमेरिकी ट्रेजरी ने पिछले महीने ईरानी तेल पर 30 दिनों की छूट जारी की थी ताकि युद्ध के कारण बढ़ी तेल की कीमतों को रोका जा सके. तेल बाजार में स्थिति अभी सुधरी नहीं है बल्कि तनाव और बढ़ता ही जा रहा है, फिर भी अमेरिका अब ईरानी तेल पर और छूट नहीं देगा. रूसी तेल के बाद अब ईरानी तेल से छूट खत्म करने से इनके खरीददार भारत और चीन पर सबसे अधिक असर होने वाला है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी की ईरानी तेल पर छूट इस वीकेंड खत्म हो जाएगी. इसके साथ ही अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वो ईरान पर दबाव बनाने की अपनी नीति को कायम रखेगा. होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी पहले से ही लागू है.
20 मार्च को लागू की गई 30 दिन की यह छूट ईरान के केवल उस तेल पर थी जो पहले से ही जहाजों पर लदा हुआ था. अमेरिका की तरफ से दी गई यह छूट वैश्विक तेल बाजार को संभालने के लिए अस्थायी राहत थी.
यह समयसीमा 19 अप्रैल की आधी रात को खत्म हो जाएगी और अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा. इसी तरह रूस के तेल पर दी गई छूट भी हाल ही में खत्म हो गई है. बाजार अस्थिर है फिर भी अमेरिका ने दोनों देशों के तेल पर दिए अस्थायी छूट को खत्म करने का फैसला किया है.
जब यह छूट दी गई थी, तब हालात पहले से ही तनावपूर्ण थे. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था जिसके बाद क्षेत्र में तेल आपूर्ति, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास, प्रभावित हुई थी.
तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और एक समय 50% से ज्यादा ऊपर चली गई थीं. इसे और बढ़ने से रोकने की कोशिश में अमेरिका ने संतुलन बनाने की कोशिश की- एक तरफ ईरान पर दबाव बनाए रखा, दूसरी तरफ बाजार में कुछ तेल की सप्लाई होने दी.
ईरानी तेल पर छूट की वजह से समुद्र में मौजूद लगभग 14 करोड़ बैरल तेल बाजार में पहुंचा जिससे तेल बाजार को थोड़ी राहत मिली.
छूट खत्म होने के बाद भारत-चीन पर कैसा होगा असर?
ईरानी तेल पर अमेरिकी छूट खत्म होने से एशिया के दो देशों- भारत और चीन पर सबसे ज्यादा असर होगा. ईरानी तेल पर छूट मिलते ही इन दोनों देशों ने ईरानी तेल की खरीद शुरू कर दी थी.
भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों को देखते हुए 2019 के बाद ईरान से तेल खरीद बंद कर दी थी और फिर जब प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिली तब जाकर भारत ने ईरान से दोबारा तेल मंगाया. 30 दिनों के अंतराल में ईरानी तेल से भरे दो बड़े टैंकर भारत पहुंचे हैं. इन दोनों टैंकरों में 20-20 लाख बैरल तेल भरा है.
चीन हालांकि, ब्लैक मार्केट के जरिए ईरानी तेल की खरीद जारी रखे हुए था. अब जबकि छूट खत्म हो गई है, भारत अगर ईरानी तेल खरीदता है तो केवल तेल कंपनियां ही नहीं बल्कि पेमेंट से जुड़े बैंक भी प्रतिबंधों की जद में आ सकते हैं.
अमेरिका ने साफ किया है कि वो 'सेकेंडरी सैंक्शंस' के जरिए अपनी सीमा के बाहर भी कार्रवाई कर सकता है. इसी के साथ ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकाबंदी पहले से लागू है. अनुमान है कि अगर ईरानी तेल की सप्लाई पूरी तरह बाधित होती है तो वैश्विक बाजार से रोजाना लगभग 20 लाख बैरल तेल कम हो सकता है.
भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को अब ईरानी तेल का विकल्प ढूंढना पड़ सकता है, जिससे रिफाइनरियों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ सकती है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क