'ये खबर दी तो 1.5 करोड़ डॉलर इनाम देंगे', अब अमेरिका ने ईरान को लेकर किया ऐसा ऐलान!

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े 60 से ज्यादा जहाजों को वापस लौटाया है. अब अमेरिका ने नाकेबंदी के संबंध में ही इनाम की घोषणा की है.

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अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इनाम की घोषणा की है अमेरिका ने ईरान के खिलाफ इनाम की घोषणा की है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर रखी है जिसकी वजह से ईरान का तेल लेकर जहाज होर्मुज स्ट्रेट से निकल नहीं पा रहे हैं. हालांकि, कुछ टैंकर चोरी-छिपे होर्मुज पार कर अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच रहे हैं जिससे अमेरिका की नाकेबंदी पर सवाल उठ रहे हैं. लेकिन अमेरिका ने अब ईरानी तेल शिपमेंट्स की जानकारी देने पर इनाम की घोषणा कर दी है.

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अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसके सहयोगियों से जुड़े तेल शिपमेंट्स की जानकारी देने पर 1.5 करोड़ डॉलर तक के इनाम की घोषणा की है.

‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस प्रोग्राम’ के तहत जारी बयान में अमेरिका ने कहा कि वो IRGC से जुड़े तेल की डिलीवरी, इसमें शामिल टैंकरों, संस्थाओं और उन लोगों के बारे में जानकारी चाहता है जो कथित अवैध ट्रांसफर से जुड़े हैं.

यह घोषणा ईरान के खिलाफ अमेरिका की नाकेबंदी ऑपरेशन का हिस्सा है जिसके तहत IRGC से जुड़े तेल निर्यात, शिपिंग नेटवर्क और वित्तीय चैनलों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं.

ईरान से जुड़े 60 से अधिक जहाजों को अमेरिका ने वापस लौटाया

रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के हवाले से बताया गया कि पिछले महीने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी लागू होने के बाद से अमेरिकी सैनिकों ने ईरानी बंदरगाहों से आ रहे या वहां जा रहे 61 कमर्शियल जहाजों को वापस लौटाया है.

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एनर्जी बाजार के विश्लेषकों और खुफिया आकलनों से परिचित दो पश्चिमी अधिकारियों ने हाल ही में एनबीसी न्यूज को बाताया कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की सैन्य नाकेबंदी से आखिरकार तेहरान की अहम तेल आय पर असर पड़ेगा लेकिन ईरानी शासन कई महीनों तक इस प्रेशर को झेल सकता है. उन्होंने कहा कि इससे ईरान में कोई बड़ा आर्थिक संकट नहीं आएगा या उसके तेल के कुओं को स्थायी नुकसान भी नहीं पहुंचेगा.

करीब एक महीने पहले नाकेबंदी लगाए जाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने संकेत दिया था कि इससे ईरान के तेल सेक्टर में तुरंत संकट पैदा हो जाएगा.

ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और फिर ट्रंप की धमकी

ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि ईरान का तेल ढांचा 'तीन दिनों के भीतर फट सकता है', क्योंकि नाकेबंदी के चलते ईरान अपने तेल कुओं से निकाले जा रहे तेल का निर्यात नहीं कर पाएगा. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, 'अगर उनका तेल बाहर नहीं जा पाया, तो उनका पूरा तेल ढांचा बर्बाद हो जाएगा.'

हालांकि ऐसा नहीं हुआ. लेकिन नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान के दर्जनों टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से आगे नहीं बढ़ पाए हैं.

इस महीने की शुरुआत में दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास के पास होर्मुज स्ट्रेट में कई टैंकर खड़े देखे गए. पिछले 15 सालों में अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान को दो बार अपने तेल उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ी थी.

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अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस नाकेबंदी का मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना है, जो उसकी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है. अमेरिका ने यह नाकेबंदी इसलिए लागू की है ताकि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोले और बातचीत की मेज पर अमेरिकी मांगों के आगे झुके. लेकिन ईरान ने भी साफ कह दिया है कि वो अपनी शर्तों पर समझौता करेगा.

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