ट्रंप की दबंगई के बीच साथ छोड़ रहे करीबी, जिनपिंग से मिलकर अब ब्रिटिश PM स्टार्मर ने क्या कह दिया

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर चार दिनों के चीन दौरे पर पहुंचे हैं. इस दौरे में उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की. यह दौरा अमेरिका के बदलते विदेश नीतियों के बीच यूरोप के चीन की ओर रुख को दिखाता है.

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ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने शी जिनपिंग से मुलाकात की है (Photo: Reuters) ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर ने शी जिनपिंग से मुलाकात की है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:23 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पारंपरिक यूरोपीय सहयोगियों को खुद ही चीन की तरफ धकेल रहे हैं. दूसरी बार सत्ता में आते ही उन्होंने अपने दुश्मनों और करीबी दोस्तों, सभी को एक ही लाठी से हांकना शुरू किया और इसका नतीजा ये हुआ कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सारे किए-धरे पर पानी फिर रहा है. अब अमेरिका के पिछलग्गू देश उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी चीन के पास जा रहे हैं जो लॉन्ग टर्म में उसकी 'सुपरपावर' इमेज को भारी नुकसान पहुंचाएगा. इसी कड़ी में अमेरिका को एक बड़ा नुकसान हुआ है. ब्रिटेन चीन की तरफ झुक रहा है और प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर चार दिनों के लिए चीन पहुंच गए हैं.

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर बुधवार को करीब 60 ब्रिटिश बिजनेसमैन और सांस्कृतिक क्षेत्र के लीडर्स के साथ आधिकारिक दौरे पर बीजिंग पहुंचे हैं. चीनी मीडिया के मुताबिक, यह दौरा शनिवार तक चलेगा.

स्टार्मर से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन का दौरा किया था. दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ ने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लिया है. इससे साफ है कि यूरोपीय देश अमेरिका से निर्भरता घटाने के लिए तेजी से भारत और चीन का रुख कर रहे हैं.

शी जिनपिंग से मुलाकात में ब्रिटिश पीएम स्टार्मर ने क्या कहा?

अपने चीन दौरे में स्टार्मर ने गुरुवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की है. मुलाकात में स्टार्मर ने जिनपिंग से कहा कि वो विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देने के मकसद से दोनों देशों के बीच एक मैच्योर और बैलेंस रिलेशन चाहते हैं. यह बयान बीते कई वर्षों के तनाव के बाद द्विपक्षीय रिश्तों में संभावित सुधार का संकेत माना जा रहा है.

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स्टार्मर का यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले आठ सालों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का यह पहला चीन दौरा है. इस दौरे में स्टार्मर ने ग्रेट हॉल ऑफ द पीपुल में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वार्ता की. इसके बाद दोनों नेताओं ने साथ में लंच  किया.

बैठक की शुरुआत में स्टारमर ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा, 'चीन ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर एक अहम खिलाड़ी है और यह जरूरी है कि हम एक अधिक मैच्योर संबंध बनाएं, जिसमें सहयोग के मौके पहचाने जा सकें लेकिन साथ ही उन मुद्दों पर भी बातचीत हो, जहां हमारे मतभेद हैं.'

इस पर शी जिनपिंग ने कहा कि ब्रिटेन के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव आए हैं, जो किसी भी देश के हित में नहीं रहे. उन्होंने कहा कि चीन ब्रिटेन के साथ लॉन्ग टर्म की स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के लिए तैयार है.

एक-एक कर चीन के पास जा रहे यूरोपीय देश

जिनपिंग के साथ स्टार्मर की यह बैठक बताती है कि ब्रिटेन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तेजी से बदलती नीतियों और उनके टैरिफ धमकियों से नाराज है. डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर कंट्रोल करने की ट्रंप की जिद से भी ब्रिटेन समेत सभी यूरोपीय देश परेशान हैं.

स्टार्मर से पहले चीन गए कनाडाई पीएम कार्नी ने चीन के साथ एक आर्थिक समझौता किया था. कनाडा व्यापार के लिए अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर था लेकिन ट्रंप उसे अमेरिका का 51वां राज्य बताते आए हैं और उसे भी कब्जे की धमकी दे चुके हैं. इसे देखते हुए कार्नी अपने ट्रेड पार्टनर्स में विविधता लाने के लिए चीन के साथ सहयोग बढ़ा रहे हैं. लेकिन ट्रंप चीन-कनाडा की व्यापार साझेदारी से नाराज बताए जा रहे हैं.

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स्टार्मर के चीन दौरे को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

किंग्स कॉलेज लंदन में चीनी स्टडीज के प्रोफेसर केरी ब्राउन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ब्रिटेन और चीन के बीच कई समझौतों की घोषणा होगी, ताकि यह दिखाया जा सके कि द्विपक्षीय संबंधों में सुधार आया है. उन्होंने कहा, 'यह जरूर ऐसा दिखना चाहिए कि यह एक सफल दौरा रहा. दोनों पक्ष ऐसी मीटिंग नहीं चाहते, जहां केवल मतभेदों पर बहस हो.'

ब्रिटिश अखबार 'द टाइम्स' में प्रकाशित एक लेख में ब्रिटेन में चीन के राजदूत झेंग जेगुआंग ने लिखा, 'यह तथ्य है कि चीन और ब्रिटेन हर मुद्दे पर एकमत नहीं हैं. कुछ मतभेद राजनीतिक व्यवस्था, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जबकि कुछ आपसी हितों से और कई बातचीत व आपसी समझ की कमी से पैदा होते हैं. इससे नॉर्मल लगने वाले मुद्दे भी बड़े बन जाते हैं.'

उन्होंने कहा कि इन मतभेदों को सुलझाने का सही तरीका बातचीत, आपसी सम्मान और व्यावहारिक होकर समाधान तलाशना है. इसके लिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और नियमित तौर पर हाई-लेवल मीटिंग्स की जरूरत है.

चीन, अमेरिका को लेकर ब्रिटिश जनता का रुख भी बदल रहा है

इस बीच, ब्रिटिश जनता का रुख भी चीन को लेकर कुछ नरम होता दिख रहा है. YouGov के इस महीने के एक सर्वे के मुताबिक, 27 प्रतिशत ब्रिटिश नागरिक चीन को 'मित्र और सहयोगी' या 'मैत्रीपूर्ण प्रतिद्वंद्वी' मानते हैं. अक्टूबर में यह आंकड़ा 19 प्रतिशत था.

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वहीं, अमेरिका को लेकर भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है. YouGov के अनुसार, लगभग उतने ही ब्रिटिश नागरिक अमेरिका को ब्रिटेन के लिए बड़ा खतरा मानते हैं जितने चीन को, खासकर ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की हालिया धमकियों के बाद ब्रिटेन के लोगों में अमेरिका को लेकर असंतोष बढ़ा है.

अपने चीन दौरे से पहले ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन को अमेरिका और चीन के बीच किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. उन्होंने इस बात को भी खारिज किया कि वो ब्रिटेन के पारंपरिक सहयोगियों की कीमत पर चीन के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं. 

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