रूसी टीके Sputnik V के साथ मिलेगा बूस्टर डोज, डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ होगा असरदार

स्पुतनिक वी का इस्तेमाल सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि भारत समेत कई अन्य देशों में भी किया जा रहा है. कोरोना वायरस से बचने के लिए भारत ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी. रूस की कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक वी ने जल्द ही बूस्टर डोज देने की घोषणा की है.

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Sputnik V Sputnik V

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2021,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST
  • स्पुतनिक वी का जल्द ही बूस्टर डोज देने का ऐलान
  • रूस की कोरोना वैक्सीन है स्पुतनिक वी

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में जीत हासिल करने के लिए दुनियाभर में लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है. अब तक करोड़ों लोगों को डोज लगाई जा चुकी है. इस बीच, रूस की कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक वी (Sputnik V) ने जल्द ही बूस्टर डोज देने की घोषणा की है. यह बूस्टर डोज कोरोना वायरस के भारत में सबसे पहले मिले डेल्टा वैरिएंट पर असरदार साबित होगी. बता दें कि स्पुतनिक वी दुनिया की सबसे पहली कोरोना वैक्सीन है, जिसे रूस के गामालेया रिसर्च सेंटर ने पिछले साल बनाया था. 

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स्पुतनिक वी का इस्तेमाल सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि भारत समेत कई अन्य देशों में भी किया जा रहा है. कोरोना वायरस से बचने के लिए भारत ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इस वैक्सीन की मंजूरी दी थी. देश में इस वैक्सीन का प्रोडक्शन हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैब कर रहा है. इस साल के अंत तक स्पुतनिक वी की दस करोड़ डोज बनाए जाने का फैसला किया गया है.

उधर, डॉ. रेड्डीज लैब ने जानकारी दी है कि स्पुतनिक वी का टीका देश में 9 और शहरों में उपलब्ध होगा. इन शहरों के नाम दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, विशाखापत्तनम, बद्दी, कोल्हापुर और मिर्यालगुडा हैं. वहीं, स्पुतनिक वी बनाने वाले गामालेया रिसर्च सेंटर तथाकथित मॉस्को स्ट्रेन के खिलाफ टीके के असरदार होने को लेकर स्टडी कर रहा है. रूस के अधिकारियों ने नए स्ट्रेन को लेकर लोगों को अलर्ट किया है. टीके के डेवलपर्स को यकीन है कि वैक्सीन नए वैरिएंट के खिलाफ भी असरदार साबित होगी.

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बता दें कि दुनियाभर में पिछले एक साल से अधिक समय से कोरोना वायरस तबाही मचा रहा है. दुनिया में कोरोना के 17 करोड़ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 38 लाख से ज्यादा लोगों की महामारी के चलते मौत हो चुकी है. सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में सामने आए हैं, जिसके बाद भारत का स्थान है. कोरोना को रोकने के लिए भारत, अमेरिका, रूस, चीन समेत कई देश वैक्सीन का निर्माण कर चुके हैं और बड़ी आबादी का टीकाकरण भी हो चुका है.

 

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