‘भारत ने जब मांगा, हमने तेल दिया...', रूस के बयान से हलचल, बंद होगी सप्लाई?

रूसी तेल पर अमेरिका की ओर से दी गई छूट 16 मई को खत्म होने वाली है. इस छूट का खत्म होना भारत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है. अमेरिका ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि रूसी तेल पर जारी छूट को वो बढ़ाएगा या नहीं. इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव में पीएम मोदी से मुलाकात में तेल के मुद्दे पर बात की है.

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रूसी तेल पर अमेरिकी छूट 16 मई को खत्म हो रही है (Photo: Reuters) रूसी तेल पर अमेरिकी छूट 16 मई को खत्म हो रही है (Photo: Reuters)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:38 PM IST

अमेरिका की ओर से भारतीय कंपनियों को रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट 16 मई को खत्म होने वाली है. इससे ठीक एक दिन पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में 'रूसी ऊर्जा सप्लाई बढ़ाने' का मुद्दा प्रमुखता से उठा.

दो दिवसीय BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली आए लावरोव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि गुरुवार को उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई और जयशंकर के साथ BRICS बैठक के इतर अलग से चर्चा भी हुई.

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लावरोव ने कहा, 'हमने राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई शिखर बैठकों में तय हमारी विशेष रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा की. हमने परिवहन सहयोग और निवेश सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे का विकास भी शामिल है.'

उन्होंने कहा, 'हमने प्रत्यक्ष आपसी भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भी चर्चा की. साथ ही रूसी ऊर्जा, उर्वरकों की बढ़ी हुई सप्लाई और शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग पर भी बात हुई.'

भारत में रूसी तेल खरीद के बढ़ने पर क्या बोले लावरोव

जब उनसे भारत के रूसी तेल खरीद में बढ़ोतरी के संबंध में सवाल पूछा गया तो लावरोव ने कहा कि इसके आंकड़े सबके सामने हैं.

उन्होंने कहा, 'यह कोई छिपा हुआ आंकड़ा नहीं है. जानकारी साफ दिखाती है कि रूस से भारत को तेल सप्लाई बढ़ी है. यह सिर्फ हम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि हमारे भारतीय साझेदारों पर भी निर्भर करता है, जिन्होंने जब भी ऑर्डर दिया, हमने हमेशा हां में जवाब दिया है. इसी तरह हम आगे बढ़ रहे हैं.'

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लावरोव ने बताया कि BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में इस साल भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर फोकस रहा. इसके अलावा पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज स्ट्रेट, लेबनान और फिलिस्तीन के मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

ईरान और यूएई के बीच बढ़ते तनाव पर सवाल पूछे जाने पर लावरोव ने कहा कि BRICS मध्यस्थता करने वाला संगठन नहीं है, लेकिन इसके कुछ सदस्य देश, जैसे भारत, इस भूमिका में योगदान दे सकते हैं. उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका का भी जिक्र किया.

होर्मुज स्ट्रेट पर क्या बोले रूस के विदेश मंत्री

होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी पर लावरोव ने कहा कि यह समस्या ईरान ने पैदा नहीं की.

उन्होंने कहा, 'मैं याद दिलाना चाहता हूं कि 28 फरवरी से पहले, यानी इस आक्रामकता की शुरुआत से पहले, होर्मुज स्ट्रेट में कोई समस्या नहीं थी. वहां से जहाज 100 प्रतिशत सुरक्षित तरीके से गुजर रहे थे.'

लावरोव ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले तथा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा किए जाने के अमेरिका के कदम का जिक्र करते हुए उसकी आलोचना की. उन्होंने कहा कि 'अमेरिका दावा करता है कि उसका मकसद ईरान की ओर से पड़ोसी देशों में कथित तौर पर फैलाए जा रहे डर और आतंक को खत्म करना है, जो कि पूरी तरह गलत है.'

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उन्होंने कहा, 'वेनेजुएला के मामले में भी कहा गया था कि मकसद ड्रग तस्करी रोकना है. लेकिन बाद में साफ हो गया कि अमेरिका की दिलचस्पी ड्रग्स में नहीं, बल्कि तेल में थी. यहां भी वही मामला है. होर्मुज की समस्या ईरान ने पैदा नहीं की.' 

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