भारत में रूसी तेल की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड! महंगा बेचकर कितना कमा रहे पुतिन

फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने भारत को सस्ता तेल बेचा था, लेकिन अब रूस के प्रमुख कच्चे तेल यूराल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. अमेरिकी छूट के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे भारत को रूसी तेल रिकॉर्ड महंगा पड़ रहा है.

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भारत को रूसी तेल काफी महंगा पड़ रहा रहा है (File Photo: Reuters) भारत को रूसी तेल काफी महंगा पड़ रहा रहा है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:13 PM IST

फरवरी 2022 में यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों को देखते हुए रूस ने भारत को खूब सस्ता तेल बेचा था. भारत की रिफाइनरियों ने सस्ते रूसी तेल से भारी मुनाफा कमाया लेकिन अब जब दुनिया एक और बड़े युद्ध के बीच फंसी हुई है, भारत को रूसी तेल काफी महंगा पड़ रहा है, बल्कि यूं कहें कि भारत को रूसी तेल 2022 के बाद सबसे महंगा पड़ रहा है.

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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाले रूस के प्रमुख कच्चे तेल यूराल क्रूड की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. रूसी तेल की कीमतों में भारी उछाल की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रूसी तेल पर छूट है जो उन्होंने पूरी दुनिया के देशों के लिए जारी की है.

भारत आ रहे रूसी तेल यूराल की कीमत शुक्रवार को 98.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. ऊर्जा डेटा फर्म Argus Media के अनुसार, इसमें शिपिंग चार्जेज भी शामिल है. भारत को इससे पहले रूसी तेल कभी इतना महंगा नहीं पड़ा था.

भारत के लिए रिकॉर्ड महंगा हुआ रूसी तेल

रूसी तेल की कीमतों में ये बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतें बढ़ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने वाले रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट शुक्रवार को वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के मुकाबले घटकर 4.80 डॉलर प्रति बैरल रह गई.

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28 फरवरी को ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद तेल की बढ़ती कीमतों को देखकर अमेरिका ने सबसे पहले भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट जारी की थी. यह अस्थायी छूट है जो 30 दिनों के लिए जारी की गई थी. इसके बाद पिछले हफ्ते अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने दूसरी बार अनुमति जारी की, जिसके तहत दुनिया के सभी देश समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल कार्गो खरीद सकते हैं. 

अमेरिका ने यह फैसला इसलिए किया है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन तेल की कीमतों पर प्रेशर घटाने की कोशिश कर रहा है. मार्च की शुरुआत में अमेरिका से हरी झंडी मिलने के बाद भारतीय रिफाइनरियों, जिनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल हैं, ने समुद्र में पड़े लगभग 3 करोड़ बैरल बिना बिके रूसी कच्चे तेल की खरीदारी की. इस सौदे से जुड़े लोगों ने पिछले हफ्ते यह जानकारी दी थी.

भारत को महंगा तेल बेचकर कितना कमा रहा रूस?

Argus Media के मुताबिक, शुक्रवार को रूस के पश्चिमी बंदरगाहों पर यूराल क्रूड की औसत कीमत 73.73 डॉलर प्रति बैरल रही, जो जुलाई 2024 के मध्य के बाद सबसे अधिक है.

हालांकि यह साफ नहीं है कि निर्यात कीमत और डिलीवरी कीमत के बीच का अंतर, जिसे डिलीवरी स्प्रेड कहा जाता है, अंततः रूस को कितना फायदा पहुंचाता है. आसान शब्दों में कहें तो, यह साफ नहीं है कि भारत को तेल बेचकर वर्तमान में रूस को कितना फायदा हो रहा है.

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फिर भी यह कीमत रूस के इस साल के बजट में अनुमानित औसत 59 डॉलर प्रति बैरल से काफी अधिक है. पिछले हफ्ते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश की तेल और गैस कंपनियों से तेल-गैस की ऊंची कीमतों का फायदा उठाने को कहा था लेकिन यह चेतावनी भी दी कि यह उछाल 'निश्चित रूप से अस्थायी' है और सरकार व कंपनियों को उसी हिसाब से प्लानिंग करनी चाहिए.

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