पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के रावलाकोट में पाकिस्तानी सेना ने महंगाई, बिजली के बढ़े बिल और बुनियादी हकों की मांग कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं. इस फायरिंग में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और 37 से ज्यादा घायल हो गए. 5 जून से अब तक इस पूरे आंदोलन में मरने वालों की तादाद बढ़कर 53 हो गई है.
PoK यानी पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर. वहां के लोग काफी वक्त से परेशान हैं. महंगाई इतनी बढ़ गई है कि आम आदमी के लिए गुजारा मुश्किल हो गया है. बिजली के बिल आसमान छू रहे हैं. गेहूं और चावल जैसी जरूरी चीजें इतनी महंगी हो गई हैं कि लोग खरीद नहीं पा रहे. अस्पताल नहीं हैं, रोजगार नहीं है और सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं है.
इन सब मांगों को लेकर एक संगठन आगे आया जिसका नाम है JAAC यानी संयुक्त अवामी एक्शन कमिटी. यह एक जन संगठन है जो लोगों की इन तकलीफों को आवाज दे रहा था.
5 जून को आंदोलन शुरू हुआ. लोग सड़कों पर उतरने लगे. पाकिस्तान सरकार ने इसे दबाने की कोशिश की. JAAC पर पाबंदी लगा दी. प्रदर्शनकारियों को पकड़ा जाने लगा. आंदोलन के आगेवाले नेताओं पर 1 करोड़ रुपये का इनाम रख दिया गया. कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया गया ताकि खबरें बाहर न जा सकें. लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगाई गई.
लेकिन इतनी सख्ती के बावजूद लोग डरे नहीं.
गुरुवार को रावलाकोट में बड़ी रैली हुई. रावलाकोट की ईदगाह मैदान में हजारों की तादाद में लोग जमा हुए. वहां पुरुष, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सब थे. यह एक शांतिपूर्ण रैली थी. तभी पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने भीड़ पर गोलियां चलाना शुरू कर दिया.
भगदड़ और खून का मंजर
गोलियां चलाने की वजह से लोग चारों तरफ भागने लगे. अस्पतालों में घायलों की लाइन लग गई. डॉक्टर और नर्सें इतने ज्यादा मरीजों को संभालने में नाकाम होने लगे. कम से कम 16 लोग मारे गए और 37 से ज्यादा घायल हुए.
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इस फायरिंग की खबर जैसे ही फैली, POK के दूसरे इलाकों में भी गुस्सा भड़क उठा. खाई गला जैसे कस्बों में बाजार बंद हो गए और लोग सड़कों पर निकल आए. महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सब मारे गए लोगों के लिए इंसाफ मांगने लगे.
आंदोलन के नेताओं ने साफ कहा कि हम झुकेंगे नहीं. रैली में बोलते हुए सरदार अमान खान ने कहा कि हम निहत्थे लोग हैं. हम सिर्फ अस्पताल, रोटी और रोजगार मांग रहे हैं. लेकिन पाकिस्तानी सेना हमें आतंकवादी बुला रही है.
उन्होंने पाकिस्तान के दूसरे सूबों का भी हवाला दिया. बोले कि बलोचिस्तान से पूछो कि असली आतंकवादी कौन है. खैबर पख्तूनख्वा से पूछो. सिंध और पंजाब से पूछो. और आज PoK भी यही कह रहा है. उन्होंने एक नारा दिया, "यह जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है."
भारत सरकार ने कड़ी निंदा की
भारत ने इस पूरी घटना को 'नरसंहार' बताया. दिल्ली ने कहा कि यह साबित करता है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले इलाकों में लोगों को बुनियादी हक भी नहीं देता. भारत ने यह भी उम्मीद जताई कि दुनिया पाकिस्तान को इस हिंसा के लिए जवाबदेह ठहराए और वहां के लोगों के अधिकारों का सम्मान हो.
अभी भी जारी है आंदोलन
5 जून से अब तक 53 लोग जान गंवा चुके हैं. आंदोलन के नेताओं ने कहा है कि जानें गई हैं लेकिन लड़ाई नहीं रुकेगी. लोग रोटी, बिजली और अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे.
शिवानी शर्मा