पाकिस्तानी मीडिया में दो बड़ी खबरें एक साथ चल रही हैं. पहली खबर जिसमें पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ कह रहे हैं कि सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते का विस्तार किया जाएगा और दोनों देश मिलकर इस पर फैसला करेंगे. दूसरी खबर भारत-यूएई की है जिसमें दोनों देशों ने सोमवार को तीन अरब डॉलर की LNG डील साइन की, रक्षा और व्यापार संबंधों को बढ़ाने पर सहमति जताई है. ये दोनों ही खबरें दो पड़ोसियों और मध्य-पूर्व के नए-नए कट्टर प्रतिद्वंद्वी या कहें कि दुश्मन बने देशों की ताजा कहानी बयान करती हैं.
एक तरफ जहां पाकिस्तान सऊदी अरब से अपने रक्षा संबंधों को तेजी से बढ़ा रहा है, वहीं, दूसरी ओर भारत-यूएई के संबंधों में भी गर्माहट आई है. इसका ताजा उदाहरण है यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान का दो घंटे का भारत दौरा. अल-नाहयान सोमवार को दो घंटे के भारत दौरे पर आए थे जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की.
भारत और यूएई के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग को मजबूत करने की कोशिशों के तहत सोमवार को भारत ने यूएई से 3 अरब डॉलर का LNG खरीद समझौता किया. इस डील के साथ ही भारत यूएई का सबसे बड़ा ग्राहक बन गया है.
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अगले छह सालों में द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब डॉलर तक दोगुना करने और एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी बनाने का संकल्प जताया.
समझौते के तहत अबू धाबी की सरकारी कंपनी एडीएनओसी गैस अगले 10 सालों तक भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम को हर साल 5 लाख मीट्रिक टन LNG की सप्लाई करेगी.
एडीएनओसी गैस ने कहा कि इस नए करार के बाद भारत के साथ उसके कुल कॉन्ट्रैक्ट का मूल्य 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है.
कंपनी के बयान में कहा गया, 'भारत अब यूएई का सबसे बड़ा ग्राहक है और एडीएनओसी गैस की LNG रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा है.'
यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. यूएई के साथ आई सरकारी प्रतिनिधिमंडल में यूएई के रक्षा और विदेश मंत्री भी शामिल थे. भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने पत्रकारों को बताया कि दोनों देशों ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी की दिशा में काम करने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं.
भारत के कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ आपसी रक्षा समझौता किया था. पिछले सप्ताह एक पाकिस्तानी मंत्री ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच त्रिपक्षीय रक्षा समझौते का ड्राफ्ट तैयार किए जाने की घोषणा की थी.
अब उनके रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सऊदी के साथ रक्षा समझौते को लेकर एक बयान दिया है. आसिफ ने कहा है कि रक्षा समझौते में किसी तीसरे पक्ष को शामिल किए जाने को लेकर फैसला दोनों देश मिलकर करेंगे. उन्होंने कहा, 'तुर्की या कोई अन्य देश इस रक्षा समझौते का हिस्सा तभी बनेंगे जब पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों इस बात पर सहमत होंगे.'
सऊदी अरब और यूएई सालों तक करीबी सहयोगी रहे हैं. लेकिन हाल के सालों में दोनों देशों में क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता बढ़ी है. दोनों देश हाल के समय में क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अलग-अलग रुख अपनाते दिखे हैं. यमन में दोनों देशों के बीच हाल ही में गहरे मतभेद देखने को मिले हैं और तेल उत्पादन को लेकर भी उनके बीच असहमति रही है. इस बीच यूएई ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा जारी करना भी बंद कर दिया है.
सऊदी-यूएई के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता से बनते नए समीकरण को लेकर बोस्टन (अमेरिकी शहर) के नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ मैक्स अब्राहम्स ने एक्स पर लिखा, 'पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी अरब के गठबंधन को टक्कर देने के लिए भारत-इजरायल-यूएई को अपना गठबंधन मजबूत करना चाहिए.'
हालांकि, विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने साफ किया है कि यूएई के साथ लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि भारत क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल होगा.
उन्होंने कहा, 'किसी क्षेत्रीय देश के साथ रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर हमारे सहयोग का मतलब ये नहीं है कि हम उस क्षेत्र के संघर्षों में किसी खास तरीके से शामिल होंगे.'
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