'बड़े तेल टैंकरों की तलाश', ईरान ने दोस्त समझ होर्मुज में छूट दी, पीठ पीछे 'गेम' खेलने लगा PAK

ईरान ने पाकिस्तान को मित्र बताते हुए उसके 20 जहाजों को होर्मुज पार करने की अनुमति दी है. लेकिन पाकिस्तान के पास उतने जहाज नहीं हैं जिसे देखते हुए वो दूसरे जहाज ऑपरेटर्स को ऑफर दे रहा है. वो अपनी शर्तों पर जहाज ऑपरेटरों को ऑफर कर रहा है और कंपनियां उसका ऑफर ठुकरा रही हैं.

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ईरान ने पाकिस्तान के 20 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है (File Photo: Reuters) ईरान ने पाकिस्तान के 20 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत दी है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट पार करने का इंतजार कर रहे जहाजों के साथ पाकिस्तान ने अपना खेल खेलना शुरू कर दिया है. दरअसल, ईरान ने पाकिस्तान को अपना मित्र देश बताते हुए कहा है कि उसके 20 जहाज होर्मुज पार कर सकते हैं. पाकिस्तान के इन जहाजों को भारी-भरकम टोल भी नहीं देना होगा जिन्हें अब ईरान ने जहाजों से वसूलना शुरू किया है.

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अब मसला ये है कि फारस की खाड़ी में पाकिस्तान के जहाज कम हैं और उसे दुनिया को दिखाना भी है कि युद्ध के बीच उसने अपने 20 जहाज बिना किसी रोक-टोक और फीस के निकाल लिए. इस चक्कर में वो दूसरे देशों के जहाजों को अपना प्रस्ताव भेज रहा है.

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में फारस की खाड़ी में फंसे एक तेल टैंकर के ऑपरेटर को एक दिलचस्प प्रस्ताव मिला. प्रस्ताव ये था कि हफ्तों तक लंगर डाले रहने और ऊपर से मिसाइलों व ड्रोन के गुजरने के बाद अब वह सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर खुले समंदर में जा सकता था, ईरानी नौसेना की सुरक्षा के साथ.

जहाज कंपनी के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस प्रस्ताव के साथ शर्त ये रखी गई कि तेल टैंकर को अपनी रजिस्ट्रेशन बदलकर पाकिस्तान का झंडा लगाना होता.

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पाकिस्तान सरकार की तरफ से आए इस प्रस्ताव को कंपनी ने स्वीकार नहीं किया. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने 20 पाकिस्तानी जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत तो दी है लेकिन खाड़ी में पाकिस्तानी झंडे वाले जहाज बहुत कम हैं. इसके बाद पाकिस्तान ने दुनिया के कुछ बड़े कमोडिटी ट्रेडर्स से संपर्क किया कि क्या उनके पास ऐसे जहाज हैं जो अस्थायी रूप से पाकिस्तानी झंडे के तहत होर्मुज पार कर सकें.

बड़े जहाजों को होर्मुज पार कराने के लिए तलाश रहा पाकिस्तान

एक सूत्र ने बताया कि पाकिस्तान क्षेत्र में सबसे बड़े जहाजों की तलाश कर रहा था, जिनमें 20 लाख बैरल तक तेल ले जाने वाले सुपरटैंकर भी शामिल हैं. पाकिस्तान इतने बड़े टैंकरों के होर्मुज पार करने की व्यवस्था कर दिखाना चाहता है कि युद्ध खत्म करने के उसके कूटनीति प्रयासों को सफलता मिल रही है. कम से कम दो बड़े तेल जहाज ऑपरेटरों  को यह प्रस्ताव मिला है.

होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और एलएनजी गुजरता है. शिपिंग उद्योग से जुड़े लोगों और बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि ईरानी सेना यानी IRGC पहले से ही गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल रही है और अपने हिसाब से 'दोस्त' देशों के जहाजों को प्राथमिकता दे रही है. दुश्मन माने जाने वाले देशों के जहाजों को हमले की धमकी दी जा रही है.

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ईरान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने एक विधेयक को मंजूरी दी है, जिसके तहत होर्मुज पर शुल्क लगाया जा रहा है. अब एक औपचारिक सिस्टम की रूपरेखा सामने आ रही है.

होर्मुज को अब कैसे पार कर रहे जहाज?

जहाज ऑपरेटरों को IRGC से जुड़ी एक मध्यस्थ कंपनी से संपर्क करना होता है और अपने जहाज के मालिकाना हक, झंडा, कार्गो, गंतव्य, क्रू लिस्ट और ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) का डेटा देना होता है. AIS वो ट्रांसपोंडर है जिससे जहाज अपनी स्थिति के बारे में बताते रहते हैं.

इसके बाद मध्यस्थ कंपनी फाइल को IRGC नौसेना के होर्मोजगान प्रांतीय कमांड को भेजती है, जहां जांच होती है कि जहाज का इजरायल, अमेरिका या ईरान के दुश्मन माने जाने वाले किसी देश से कोई संबंध तो नहीं है.

अगर जहाज मंजूरी पा जाता है तो टोल पर बातचीत शुरू होती है. बताया गया कि ईरान के पास देशों की एक से पांच तक की रैंकिंग है, जिसमें दोस्त देशों के जहाजों को बेहतर शर्तें मिलती हैं.

तेल टैंकरों के लिए शुरुआती कीमत आमतौर पर प्रति बैरल करीब 1 डॉलर होती है, जिसकी पेमेंट चीन की मुद्रा युआन या स्टेबलकॉइन (स्थिर मूल्य वाली क्रिप्टोकरेंसी) में की जाती है. एक बहुत बड़ा कच्चा तेल वाहक (VLCC) आमतौर पर करीब 20 लाख बैरल तेल ढोता है.

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टोल चुकाने के बाद IRGC एक परमिट कोड और रूट निर्देश जारी करती है. जहाजों को उस देश का झंडा लगाना होता है, जिसने उनके लिए समझौता किया है, और कुछ मामलों में अपनी आधिकारिक रजिस्ट्रेशन भी बदलनी पड़ती है.

होर्मुज के पास पहुंचने पर जहाज अपने पासकोड को रेडियो पर प्रसारित करता है, जिसके बाद एक गश्ती नौका उसे तट के पास द्वीपों के बीच से एस्कॉर्ट करते हुए पार कराती है. इस रास्ते को अब 'ईरानी टोलबूथ' कहा जाने लगा है.

वेसल ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि पिछले हफ्ते होर्मुज से जहाजों की आवाजाही में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, हालांकि यह अभी भी युद्ध से पहले के स्तर का केवल एक हिस्सा है. होर्मुज जलडमरूमध्य से दो-तरफा जहाजों की आवाजाही पिछले हफ्ते बढ़ी है.

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