25 जुलाई को पाकिस्तान में होने वाले आम चुनाव में आतंक का अंतरराष्ट्रीय आका, मिल्ली मुस्लिम लीग का संस्थापक, लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उत-दावा का सरगना हाफिज सईद और उसके बड़े-बड़े आतंकी गुर्गे चुनावी मैदान में हैं. हाफिज सईद प्रत्यक्ष तौर पर चुनावी मैदान में नहीं है, लेकिन उसके 250 उम्मीदवार इस्लामाबाद को फतह करने का पूरा सपना देख रहे हैं. बंदूक और बम के जरिए भारत को गीदड़ भभकी देने वाले हाफिज सईद के सुर में भारत पर परमाणु हमले का हर दिन राग रहता है.
LoC से हटाकर आतंकियों को दिया पोलिंग एजेंट का काम
सूत्रों ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने चुनावों के नजदीक आते ही LoC पर मौजूद लॉन्चिंग पैड से आतंकियों को कम किया है जो पहले 600 के आसपास थे. उनकी संख्या लगभग 50 प्रतिशत होकर 270 से 280 के आसपास बची है. सूत्रों ने ये जानकारी दी है कि हाफिज़ सईद ने पाक आर्मी और आईएसआई की मदद से अपने 300 आतंकियों को LoC के लॉन्चिंग पैड से बुलाकर चुनाव में पोलिंग एजेंट का काम दिया है. सूत्रों के मुताबिक़ सरकारी सुरक्षा पर को भरोसा नहीं है, इसलिए उसने लश्कर के ट्रैंड लड़ाकों को अपने बेटे ताल्हा और अपने दामाद की सुरक्षा में लगाया है.
आतंकी बनेंगे हाफिज़ के बेटे के चुनावी एजेंट
इतना ही नहीं खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव में गड़बड़ी की आशंका के बाद हाफिज़ ने पार्टी का संगठन और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बजाय लश्कर सरगना ने कश्मीर में घुसपैठ के लिए तैयार आतंकियों को चुनाव प्रचार में लगाने का फैसला किया है. लश्कर ने फिलहाल वापस बुलाए गए आतंकियों को चुनाव प्रचार के काम में लगाने के आलावा अपने संगठन के इलेक्शन ऑफिस की सुरक्षा में भी लगाया है. यानी लश्कर के आतंकी हाफिज़ के बेटे के पोलिंग एजेंट बनेंगे. खुफिया सूत्र ने बताया कि जब आतंक के आका हाफिज़ सईद का वारिस चुनाव लड़कर नेता बनना चाहता है तो ये स्वाभाविक है कि लश्कर के आतंकी अपने आका के निर्देश पर चुनाव एजेंट बनेंगे.
खुफिया सूत्रों के मुताबिक़ ने खुद रविवार को मुज़फराबाद में नए ट्रेंड आतंकियों को अपने ट्रेनिंग कैंप से बुलाया था और उन्हें चुनावी जिम्मेदारी सौंपी. उसने भारत के खिलाफ ज़हर भी उगला था, लेकिन पेशावर की चुनावी रैली में धमाके के बाद सीमापार से आतंकियों के घुसपैठ को कवर फायर देने के बजाय पाकिस्तानी सेना की प्राथमिकता अब 25 जुलाई को होने वाले पाकिस्तान नेशनल असेंबली के लिए आम चुनाव की सुरक्षा है.
7000 जवानों को चुनाव की सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया
सूत्रों के मुताबिक़ इसके लिए पाक सेना ने एलओसी से लगभग 7000 जवानों को वापस बुलाकर चुनाव की सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया है, जबकि अंतराष्ट्रीय सीमा से रेंजर्स के 6000 जवान और अफसरों को वापस बुलाकर चुनाव की सुरक्षा ड्यूटी में लगाया है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक़ पाकिस्तान सेना के बदले रणनीति की वज़ह से सीमापार से होने होने वाली फायरिंग में अचानक बेहद कमी आई है. जनवरी 2018 से 15 जून तक युद्घविराम उल्लंघन की छोटी बड़ी 1100 घटना हुई थी, लेकिन पिछले 20 दिनों में महज 10 बार सीमा पर से फायरिंग हुई है. शांतिपूर्ण चुनाव कराने में पाकिस्तान की सेना ने अपनी ताकत झोंक दी है.
आतंकी सईद ने एलओसी और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर से सेना और रेंजर्स के बटालियन को वापस बुलाकर चुनाव ड्यूटी में लगाया है, जिससे तालिबान के आतंकी हिंसा न फैला सके. सूत्रों के मुताबिक़ पाकिस्तानी सेना एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की दूसरी बड़ी वज़ह ये है कि भारत के तरफ से जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की सेना को होने वाले बड़े नुकसान से बचना. क्योंकि ये भी चुनावी मुद्दा बन सकता है जिसका खामियाजा सेना के समर्थन से चुनाव लड़ रहे लश्कर और इमरान खान की पार्टी को उठाना पड़ सकता है.
चुनाव के बाद बढ़ेंगी घुसपैठ की घटनाएं
खुफिया सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान में चुनाव ख़त्म होते ही पाकिस्तान की तरफ से होने वाले आतंकी घुसपैठ की घटनाओं में तेज़ी आएगी. साथ ही कवर फायर देने के लिए पाकिस्तान से युद्धविराम उल्लंघन की घटनाओं में इज़ाफ़ा होगा. भारत की सेना और बीएसएफ को जवाबी कार्रवाई के चौकस रहने के निर्देश हैं.
सना जैदी / जितेंद्र बहादुर सिंह