मिडिल ईस्ट में फिर भड़का तनाव, ईरान के मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतें बढ़ीं

ईरान के कुवैत और बहरीन की तरफ मिसाइल दागे जाने और अमेरिका की जवाबी कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल मच गई है. कच्चे तेल की कीमतों में 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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अमेरिका-ईरान में तनातनी से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी. (Photo: File/ITG) अमेरिका-ईरान में तनातनी से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी. (Photo: File/ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:02 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक बाजारों पर असर डालता दिख रहा है. मध्य पूर्व में हालात बिगड़ने और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता में कोई खास प्रगति न होने के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

बुधवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.05 डॉलर यानी 1.09 फीसदी बढ़कर 97.05 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1.01 डॉलर यानी 1.08 फीसदी चढ़कर 94.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

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तेल बाजार में यह तेजी उस समय देखने को मिली जब ईरान ने कुवैत और बहरीन की तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. हालांकि अमेरिकी सेना के मुताबिक ये मिसाइलें अपने लक्ष्यों को नहीं भेद सकीं. इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की और वहां कुछ ठिकानों को निशाना बनाया.

इस घटना ने पहले से चल रही ईरान-अमेरिका वार्ता को और मुश्किल बना दिया है. दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर एक संभावित समझौते पर चर्चा जारी है, लेकिन हालिया घटनाओं ने बातचीत की रफ्तार को प्रभावित किया है.

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ईरानी मीडिया का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से अमेरिका-ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि बातचीत जारी है.

होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी संकट बना हुआ है. हाल के दिनों में कुछ जहाजों ने इस मार्ग का इस्तेमाल करने की कोशिश की है, लेकिन कुल ट्रांजिट अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी नीचे है. दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां पैदा होने वाला कोई भी संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है.

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