नेतन्याहू के 'ईसा मसीह बनाम चंगेज खान' वाले बयान पर बवाल, अब इजरायली PM ने दी सफाई

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ईसा मसीह और चंगेज खान का उदाहरण देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि अगर समाज अपनी रक्षा नहीं कर पाता, तो यीशु मसीह भी चंगेज खान को नहीं हरा सकते. इस बयान पर ईसाई जगत और ईरान ने तीखी आपत्ति जताई और इसे ईसा मसीह का अपमान बताया. विवाद बढ़ता देख नेतन्याहू ने सफाई दी कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था.

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जंग के बीच छिड़ी 'धार्मिक' बहस, नेतन्याहू के बयान पर बवाल (File Photo: AP) जंग के बीच छिड़ी 'धार्मिक' बहस, नेतन्याहू के बयान पर बवाल (File Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:01 PM IST

राजनीति में कभी-कभी एक छोटी सी बात भी कितना बड़ा बखेड़ा खड़ा कर देती है, इसका ताजा उदाहरण हैं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू. ईरान के साथ चल रही भीषण जंग के बीच नेतन्याहू ने कुछ ऐसा कह दिया कि अब उन्हें सफाई देनी पड़ रही है. मामला धर्म और इतिहास के ऐसे मोड़ पर जा फंसा है, जहाँ से निकलना उनके लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है. दरअसल, अपनी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ईसा मसीह और 13वीं सदी के क्रूर मंगोल शासक चंगेज खान का जिक्र कर दिया, और बस यहीं से बात बिगड़ गई.

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19 मार्च को यरुशलम में जब नेतन्याहू मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने एक इतिहासकार विल ड्यूरेंट का हवाला देते हुए कहा कि 'सिर्फ नैतिकता ही काफी नहीं है.' उन्होंने तर्क दिया कि अगर कोई समाज अपनी रक्षा खुद नहीं कर पाता, तो इतिहास गवाह है कि 'यीशु मसीह भी चंगेज खान पर बढ़त हासिल नहीं कर सकते.' नेतन्याहू असल में अपने सैन्य अभियान ऑपरेशन रोरिंग लायन को सही ठहराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनका यह उदाहरण लोगों को चुभ गया. सोशल मीडिया पर तुरंत बवाल मच गया और लोगों ने उन पर ईसा मसीह के अपमान और 'ईशनिंदा' तक के आरोप लगा दिए.

विवाद बढ़ा तो ईरान ने भी बहती गंगा में हाथ धोने का मौका नहीं छोड़ा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि नेतन्याहू ईसा मसीह के प्रति तिरस्कार दिखा रहे हैं. उन्होंने इसे इजरायल की सैन्य कार्रवाई की क्रूरता से जोड़ दिया. चौतरफा घिरने के बाद नेतन्याहू को समझ आ गया कि बात हाथ से निकल रही है, इसलिए उन्होंने सोशल मीडिया पर आकर अपनी सफाई पेश की. उन्होंने साफ कहा कि उनका इरादा किसी को ठेस पहुंचाने का बिल्कुल नहीं था. उन्होंने जोर देकर कहा कि वे तो बस एक ऐतिहासिक तथ्य बता रहे थे और इजरायल में ईसाई समुदाय पूरी तरह सुरक्षित है.

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वैसे ये सारा ड्रामा ऐसे वक्त में हो रहा है जब ईरान और इजरायल की जंग चौथे हफ्ते में पहुंच चुकी है. इसी दौरान नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान की परमाणु और मिसाइल ताकत अब काफी कमजोर हो चुकी है. उन्होंने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर की जा रही कार्रवाई का भी बचाव किया. कुल मिलाकर, नेतन्याहू दिखाना तो यह चाहते थे कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए कुछ भी करेगा, लेकिन उनके उदाहरण ने जंग के मैदान से हटकर एक नई धार्मिक बहस छेड़ दी है. अब देखना यह है कि उनकी इस सफाई से दुनिया भर के नाराज लोग शांत होते हैं या नहीं.

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