नेपाल में सोशल मीडिया से बैन हटा, पीएम ओली का इस्तीफा... फिर भी क्यों डटे हैं Gen-Z प्रोटेस्टर्स

नेपाल पिछले 24 घंटे से सुलग रहा है और सड़कों पर आवाम का आक्रोश साफ देखा जा सकता है. राजधानी काठमांडू में राष्ट्रपति भवन से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो चुका है. Gen-Z प्रोटेस्टर्स की सभी मांगें भी मान ली गई हैं, बावजूद इसके गुस्सा थम नहीं रहा है. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है?

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नेपाल में अब भी जारी है Gen-Z का प्रदर्शन (Photo: AP) नेपाल में अब भी जारी है Gen-Z का प्रदर्शन (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

नेपाल में सोमवार से शुरू हुए Gen-Z रिवोल्यूशन नाम के प्रदर्शन को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीच चुका है और इस एक दिन के भीतर काठमांडू में काफी कुछ बदल गया है. नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा हो चुका है. विपक्षी दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के 25 से ज्यादा सांसद सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं. नेपाल के संसद भवन से लेकर सुप्रीम कोर्ट अब प्रदर्शनकारियों की जद में हैं और पूरे काठमांडू पर आम जनता का कब्जा है. 

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अंतरिम सरकार के गठन की मांग

सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगाने का फैसला बीते दिन ही वापस ले लिया था और मंगलवार को पीएम ओली ने भी पद से इस्तीफा दे दिया. बावजूद इसके प्रदर्शनकारी वापस लौटने को तैयार नहीं हैं. कई मंत्री निशाने पर हैं, यहां तक कि नेपाल में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और विदेश मंत्री आर्जू राणा देउबा पर हमला किया और उनकी पिटाई कर दी. प्रदर्शनकारियों ने वित्त मंत्री को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.

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सोशल मीडिया बैन, भ्रष्टाचार और नेपोटिज्म के खिलाफ शुरू हुआ यह Gen-Z प्रोटेस्ट अब तख्तापलट की शक्ल ले चुका है. प्रधानमंत्री ओली का इस्तीफा इसका सबूत है. लेकिन अब प्रदर्शनकारियों की मांग है कि काठमांडू के मेयर बालेन शाह को अंतरिम सरकार में प्रधानमंत्री बनाया जाए. साथ ही ओली के इस्तीफे के बाद संसद को भंग किया जाए और देश में फिर से चुनाव कराए जाएं. प्रदर्शनकारी बीते दिन पुलिस फायरिंग से भी नाराज हैं, जिसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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बालेन शाह की युवाओं से अपील

बालेन शाह ने एक्स पर प्रदर्शनकारियों से शांति बनाने की अपील की है. उन्होंने कहा, 'संयम बरतें और शांति बनाए रखें, क्योंकि मांगें पूरी हो चुकी हैं. आपके शहीदों के जवाब में पहले ही इस्तीफा आ चुका है. अब समय है कि देश का नेतृत्व करने का. आपकी पीढ़ी को ये करना होगा, इसके लिए तैयार रहें. साथ ही, सेना प्रमुख से बातचीत करने के लिए भी तैयार रहें. लेकिन याद रहे, किसी भी बातचीत से पहले संसद को भंग करना ज़रूरी है.'

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बालेन शाह जिन्हें बालेंद्र शाह के नाम से भी जाना जाता है, काठमांडू के मेयर हैं और उन्हें इस पूरे Gen-Z आंदोलन का चेहरा माना जा रहा है. बालेन शाह ने सिविल इंजीनियर के तौर पर अपना करियर शुरू किया और फिर राजनीति में दाखिल हो गए. खास लाइफस्टाइल और पहनावे ने बालेन शाह को नेपाल में एक यूथ आइकन बना दिया. उनका प्रभाव ऐसा है कि साल 2023 में टाइम मैगजीन ने बालेन शाह को 100 सबसे प्रभावशाली लोगों को शामिल किया था. वह निर्दलीय चुनाव लड़कर काठमांडू के मेयर बने हैं और उनका कोई राजनीतिक इतिहास नहीं रहा है. यही बात युवाओं के दिल में उन्हें खास जगह देती है.  

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काठमांडू में सोमवार से शुरू हुए प्रदर्शन को बालेन शाह ने अपना नैतिक समर्थन दे रखा है और उनका कहना कि आयु सीमा की वजह से वह सड़कों पर उतरकर इसका हिस्सा नहीं बन सकते. बालेन शाह ने सोशल मीडिया पर बताया कि ये Gen-Z प्रदर्शन है, आयोजकों ने इसमें शामिल होने के लिए 28 साल से कम की उम्र तय की है, फिर भी वह युवाओं की आवाज को सुनना जरूरी समझते हैं.

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