यूरोप में पहली बार तेज हुआ Monkeypox का कहर, 'महामारी' घोषित करने पर छिड़ी बहस

यूरोप के देशों में मंकीपॉक्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ये ट्रेंड पहले कभी नहीं देखा गया, इसी वजह से WHO भी सक्रिय हो गया है. इस समय यूरोप के कुल 9 देशों में मंकीपॉक्स ने जोरदार दस्तक दी है

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Monkeypox बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के हाथ (फाइल फोटो) Monkeypox बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के हाथ (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2022,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST
  • यूरोप में 100 के करीब मंकीपॉक्स के मामले
  • कोरोना जैसा खतरनाक नहीं, वैक्सीन असरदार

दुनियाभर में मंकीपॉक्स के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं. असल खतरे की घंटी तो यूरोप में बजी जहां पर पहली बार रिकॉर्ड संख्या में मंकीपॉक्स के मामले दर्ज किए जा रहे हैं. अभी तक यूरोप में 100 के करीब मंकीपॉक्स मरीज मिल चुके हैं. इस ट्रेंड को गंभीरता से लेते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक इमरजेंसी बैठक की है. उस बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. बहस इस बात पर भी रही क्या मंकीपॉक्स को महामारी घोषित कर देना चाहिए.

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अभी इस समय यूरोप के कुल 9 देशों में मंकीपॉक्स ने जोरदार दस्तक दी है- बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, पॉर्चुगल, स्पेन, स्वीडन और ब्रिटेन. इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में भी मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ाई है. लेकिन इन बढ़ते मामलों के बीच एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ये बीमारी महामारी नहीं बन पाएगी क्योंकि ये कोरोना की तरह तेजी से नहीं फैलती है. इससे संक्रमित होना भी आसान नहीं है.

इस बारे में Robert Koch Institute के प्रोफेसर फैबियन बताते हैं कि ऐसा मुश्किल लगता है कि ये एपिडेमिक ज्यादा लंबा खिचने वाला है. इस बीमारी के मामलों को आसानी से आइसोलेट किया जा सकता है, एक जगह पर रोका जा सकता है. वैक्सीन भी मंकीपॉक्स के असर को काफी कम कर सकती है. लेकिन WHO के यूरोपीयन चीफ इस मंकीपॉक्स को लेकर ज्यादा ही चिंतित हैं. उनकी माने तो अगर यूरोप में लोगों ने ज्यादा पार्टी अटेंड की, अगर गर्मी में वे छुट्टी मनाने गए तो इस बीमारी के ज्यादा फैलने की संभावना है.

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जानकारी के लिए बता दें कि यूरोपीयन देशों में मंकीपॉक्स का पहला मामला 7 मई को सामने आया था. वो शख्स भी नाइजीरिया से आया था. मंकीपॉक्स के ज्यादातर मामले अफ्रीकी देशों में पाए जा रहे हैं. वहां पर 2017 से ही मामले बढ़ रहे हैं. लेकिन चिंता वाला ट्रेंड ये है कि अब यूरोप भी इस रेस में शामिल हो गया है.

अभी के लिए रिसर्च ये बता रही है कि स्मॉलपाक्स के खिलाफ इस्तेमाल में लाए जाने वाली वैक्सीन मंकीपॉक्स के खिलाफ भी असरदार है. 85 फीसदी तक उस वैक्सीन को असरदार माना गया है. अस्पताल में भी जो मरीज भर्ती हो रहे हैं, किसी भी कोई गंभीर लक्ष्ण नहीं है.

मंकीपॉक्स के लक्षण की बात करें तो संक्रमित होने के पांच दिन के भीतर बुखार, तेज सिरदर्द, सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं. मंकीपॉक्स शुरुआत में चिकनपॉक्स, खसरा या चेचक जैसा दिखता है. बुखार होने के एक से तीन दिन बाद त्वचा पर इसका असर दिखना शुरू होता है. शरीर पर दाने निकल आते हैं. हाथ-पैर, हथेलियों, पैरों के तलवों और चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं. ये दाने घाव जैसे दिखते हैं और खुद सूखकर गिर जाते हैं. 

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