scorecardresearch
 

यूरोप से अमेरिका तक Monkeypox का कहर, जानें कितनी खतरनाक है ये बीमारी

Moneypox Explainer: यूरोप से लेकर अमेरिका तक मंकीपॉक्स का संक्रमण फैल रहा है. यूरोप के कई देशों में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए हैं. अमेरिका में भी इसका पहला केस आ गया है. लेकिन क्या है ये बीमारी और क्या है इसका इलाज?

X
मंकीपॉक्स से संक्रमित होने पर शरीर में दाने उठ जाते हैं. (फाइल फोटो)
मंकीपॉक्स से संक्रमित होने पर शरीर में दाने उठ जाते हैं. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहली बार 1958 में बंदरों में फैली थी बीमारी
  • 1970 में इंसान में सामने आया था पहला केस
  • अब तक इस बीमारी का कोई ठोस इलाज नहीं

Monkeypox Explainer: कोरोना के बीच अब मंकीपॉक्स ने भी दस्तक दे दी है. यूरोपीय देशों में मंकीपॉक्स का संक्रमण बढ़ रहा है. अमेरिका में भी मंकीपॉक्स का पहला मामला आ गया है. अमेरिका ने बताया है कि मैसाचुएट्स में रहने वाला एक शख्स पॉजिटिव आया है. वो हाल ही में कनाडा से लौटा था.

कनाडा में भी एक दर्जन से ज्यादा संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है. स्पेन और पुर्तगाल में अब तक 40 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. ब्रिटेन में भी 6 मई से अब तक 9 मामले सामने आ चुके हैं. 

मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के बाद बुखार आता है और कुछ ही हफ्तों में ये बीमारी ठीक भी हो जाती है. कुछ ही मामलों में संक्रमण गंभीर होता था. मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में ये संक्रमण सालों से हजारों लोगों को संक्रमित करता रहा है, लेकिन यूरोप में ये नई बात है.

क्या है मंकीपॉक्स?

- अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, पहली बार ये बीमारी 1958 में सामने आई थी. तब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में ये संक्रमण मिला था. इसलिए इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया है. इन बंदरों में चेचक जैसी बीमारी के लक्षण दिखे थे. 

- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, इंसानों में मंकीपॉक्स का पहला मामला 1970 में सामने आया था. तब कॉन्गो के रहने वाले एक 9 साल के बच्चे में ये संक्रमण मिला था. 1970 के बाद 11 अफ्रीकी देशों में इंसानों के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के मामले सामने आए थे.

- दुनिया में मंकीपॉक्स का संक्रमण अफ्रीका से फैला है. 2003 में अमेरिका में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे. सितंबर 2018 में इजरायल और ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के मामले सामने आए थे. मई 2019 में सिंगापुर में भी नाइजीरिया की यात्रा कर लौटे लोगों में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई थी.

ये भी पढ़ें-- Explainer: केरल में बच्चों में फैल रहा Tomato flu, जानिए कितना खतरनाक और क्या है इलाज

मंकीपॉक्स फैलता कैसे है?

- मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के खून, उसके शरीर का पसीना या कोई और तरल पदार्थ या उसके घावों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है. 

- अफ्रीका में गिलहरियों और चूहों के भी मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के सबूत मिले हैं. अधपका मांस या संक्रमित जानवर के दूसरे पशु उत्पादों के सेवन से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

- इंसान से इंसान में वायरस के फैलने के मामले अब तक बेहद कम सामने आए हैं. हालांकि, संक्रमित इंसान को छूने या उसके संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है. इतना ही नहीं, प्लेसेंटा के जरिए मां से भ्रूण यानी जन्मजात मंकीपॉक्स भी हो सकता है.

क्या हैं इसके लक्षण?

- मंकीपॉक्स वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 6 से 13 दिन तक होता है. कई बार 5 से 21 दिन तक का भी हो सकता है. इन्क्यूबेशन पीरियड का मतलब ये होता है कि संक्रमित होने के बाद लक्षण दिखने में कितने दिन लगे.

- संक्रमित होने के पांच दिन के भीतर बुखार, तेज सिरदर्द, सूजन, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे लक्षण दिखते हैं. मंकीपॉक्स शुरुआत में चिकनपॉक्स, खसरा या चेचक जैसा दिखता है.

- बुखार होने के एक से तीन दिन बाद त्वचा पर इसका असर दिखना शुरू होता है. शरीर पर दाने निकल आते हैं. हाथ-पैर, हथेलियों, पैरों के तलवों और चेहरे पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं. ये दाने घाव जैसे दिखते हैं और खुद सूखकर गिर जाते हैं. 

- शरीर पर उठने वाले इन दानों की संख्या कुछ से लेकर हजारों तक हो सकती है. अगर संक्रमण गंभीर हो जाता है तो ये दाने तब तक ठीक नहीं होते, जब तक त्वचा ढीली न हो जाए.

ये भी पढ़ें-- Blood in Urine: यूरिन में खून आना है इस जानलेवा बीमारी का संकेत, नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी!

कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

- विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकीपॉक्स से संक्रमित हर 10वें व्यक्ति की मौत हो सकती है. मंकीपॉक्स से संक्रमित होने के 2 से 4 हफ्ते बाद लक्षण धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं. 

- छोटे बच्चों में गंभीर संक्रमण होने का खतरा बना रहता है. हालांकि, कई बार ये मरीज के स्वास्थ्य और उसकी जटिलताओं पर भी निर्भर करता है. 

- जंगल के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों में मंकीपॉक्स का खतरा ज्यादा बना रहता है. ऐसे लोगों में एसिम्टोमैटिक संक्रमण भी हो सकता है.

- चेचक के खत्म होने के बाद इस बीमारी का वैक्सीनेशन भी बंद हो गया है. इसलिए 40 से 50 साल कम उम्र के लोगों को मंकीपॉक्स का खतरा ज्यादा बना रहता है. 

क्या है इसका इलाज? 

- विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, अभी मंकीपॉक्स का कोई ठोस इलाज मौजूद नहीं है. हालांकि, चेचक की वैक्सीन मंकीपॉक्स के संक्रमण के खिलाफ 85% तक असरदार साबित हुई है.

- लेकिन अभी चेचक की वैक्सीन भी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है. 2019 में चेचक और मंकीपॉक्स को रोकने के लिए एक वैक्सीन को मंजूरी दी गई थी, लेकिन वो भी अभी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें