खामेनेई के बेटे की ताजपोशी! क्या अमेरिका-इजरायल को ईरान ने आर-पार की जंग का इशारा दे दिया?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान से एक बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आया है. खबरों के मुताबिक, ईरान ने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के बेटे को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है. माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने से इनकार का संकेत है.

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मोजतबा खामेनेई ने संभाली 'सुप्रीम लीडर' की कुर्सी (File Photo: AFP) मोजतबा खामेनेई ने संभाली 'सुप्रीम लीडर' की कुर्सी (File Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:58 PM IST

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग के बीच ईरान से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे, मोजतबा खामेनेई को देश का नया 'सुप्रीम लीडर' नियुक्त कर दिया है. यह कदम न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक सीधी चुनौती भी माना जा रहा है. खबरों के मुताबिक, मोजतबा की इस नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि ईरान अब अमेरिका और इजरायल के सामने झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है.

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ट्रंप की चेतावनी को किया नजरअंदाज

मोजतबा खामेनेई की ताजपोशी ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिकी अखबार 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, मोजतबा की नियुक्ति ट्रंप की उस मांग की सीधी अवहेलना है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नया नेता उनकी पसंद का होना चाहिए. ट्रंप ने पिछले हफ्ते ही एक इंटरव्यू में कहा था कि 'खामेनेई का बेटा उन्हें स्वीकार्य नहीं है.' लेकिन ईरान ने ट्रंप की परवाह न करते हुए मोजतबा के हाथों में कमान सौंप दी.

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कौन हैं 56 साल के मोजतबा खामेनेई?

मोजतबा खामेनेई को ईरान के कट्टरपंथी धड़े का बड़ा चेहरा माना जाता है. उनका ईरान की सबसे ताकतवर सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर' (IRGC) के साथ बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है. जानकारों का कहना है कि उनकी नियुक्ति से ईरान में कट्टरपंथियों का दबदबा और बढ़ जाएगा. वहीं, चैथम हाउस में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम की निदेशक सनम वकिल का मानना है कि मोजतबा का सत्ता में आना ईरान की पुरानी रणनीति को ही आगे बढ़ाएगा, जिसमें देश के अंदर सख्त शासन और बाहर अमेरिका-इजरायल का डटकर मुकाबला करना शामिल है.

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मोजतबा खामेनेई के लिए यह लड़ाई सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी है. अमेरिका-इजरायल के हमलों में उन्होंने न सिर्फ अपने पिता अली खामेनेई को खोया है, बल्कि अपनी मां, पत्नी और एक बेटे को भी गंवा दिया है. ऐसे में माना जा रहा है कि वे इजरायल और अमेरिका के खिलाफ और भी ज्यादा आक्रामक रुख अपनाएंगे. उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद ही ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों की बौछार कर दी, जिससे उनके इरादे साफ जाहिर होते हैं.

इजरायल की किल लिस्ट में नया नाम

इधर इजरायल ने भी अपनी तेवर कड़े कर लिए हैं. इजरायल ने रविवार को साफ कह दिया कि वे ईरान के नए सर्वोच्च नेता को भी अपना निशाना बनाएंगे. लेकिन ईरान ने इस खतरे के बावजूद मोजतबा को गद्दी पर बैठाया ताकि दुनिया को यह संदेश दिया जा सके कि युद्ध के बावजूद ईरान की सरकार और व्यवस्था पूरी तरह काम कर रही है. ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारीजानी के अनुसार, मोजतबा ने अपने पिता से नेतृत्व के गुण सीखे हैं और वे दुश्मनों की उम्मीदों को नाकाम कर देंगे.

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ईरान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ

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ईरान के 1979 के बाद के इतिहास में यह पहली बार है जब सत्ता पिता से बेटे के हाथ में गई है. पहले के नेता इसे गैर-इस्लामी मानते थे, लेकिन मौजूदा युद्ध के हालात ने ईरान को इस वंशानुगत फैसले के लिए मजबूर कर दिया है. अब देखना यह होगा कि मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में यह महायुद्ध किस मोड़ पर मुड़ता है और ट्रंप इस चुनौती का क्या जवाब देते हैं.
 

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