ईरान के खिलाफ सीधी जंग में उतरा तुर्की, समंदर में गिराई मिसाइल, कहा- हमारी चेतावनी सबके फायदे में

तुर्की ईरान के खिलाफ खुलकर जंग में आ गया है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसने पूर्वी भूमध्यसागर में ईरान से फायर किए गए बैलेस्टिक मिसाइल को समंदर में ही दफन कर कर दिया है. तुर्की ने ये कार्रवाई तब की है जब उसने उत्तरी साइप्रस में 6 F-16 फाइटर जेट को तैनात किया है.

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तुर्की ने युद्धपोत (File Photo: Turkey defence ministry) तुर्की ने युद्धपोत (File Photo: Turkey defence ministry)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:12 PM IST

ईरान जंग में तुर्की ने एक्टिव रूप से एंट्री ले ली है. तुर्की ने ईरान की ओर से आ रहे एक बैलेस्टिक मिसाइल को पूर्वी भूमध्यसागर में ही मार गिराया है. तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने ईरान को चेतावनी दी है कि वे इलाके की सुरक्षा और आम लोगों को खतरे में डालने वाले कदम न उठाएं. रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हम याद दिलाते हैं कि इस मामले में तुर्की की चेतावनियों को मानना ​​सभी के हित में है. तुर्की को मिलने वाले खतरों के खिलाफ हम सभी जरूरी कदम बिना किसी झिझक के उठाए जाएंगे. 

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इससे पहले तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में जंगी जहाजों का भारी भरकम जखीरा तैनात कर दिया था. तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में 6 एफ-16 फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं.

अब तुर्की ने ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल को तबाह कर दिया है. तुर्की ने ये कदम तब उठाए हैं जब ईरान ने साइप्रस पर ड्रोन्स से हमला किया है. तुर्की और साइप्रस पड़ोसी देश हैं.

लेकिन उत्तरी साइप्रस तुर्की के नियंत्रण में है. उत्तरी साइप्रस में ही तुर्की ने F-16 तैनात किया है. तुर्की को डर सता रहा है कि ईरान की ओर से या ईरान की समर्थक ताकतें यहां हमला कर सकती हैं. इससे पहले तुर्की ने ईरान को चेतावनी दी कि कोई मिसाइल उसके हवाई क्षेत्र के पास न गिरे, लेकिन ईरान ने इसे नजरअंदाज किया. इससे दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़े. इसके बाद तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में F-16 फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं. 

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तुर्की के रक्षा मंत्रालय का बयान

अब अगर उत्तरी साइप्रस पर हमला होता है तो तुर्की का जवाब तय है. ऐसी स्थिति में ये जंग पश्चिम एशिया से निकलकर पूर्वी भूमध्यसागर तक फैल जाएगा. 

तुर्की का F-16 एक्शन के लिए तैयार

1 मार्च को ईरान-समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने लेबनान से ईरानी शाहेद-136 ड्रोन लॉन्च किए, जो ब्रिटिश RAF अक्रोटिरी एयर बेस  पर गिरे. ये क्षेत्र साइप्रस के दक्षिणी हिस्से में स्थित है. इस शाहेद ड्रोन से कई धमाके हुए. 

यह यूरोपीय संघ के सदस्य साइप्रस पर पहला बड़ा हमला था. तुर्की ने इसे "क्षेत्रीय अस्थिरता" का सबूत माना. 

अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों से के बाद यह युद्ध पूर्वी भूमध्यसागर तक पहुंच गया. पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित छोटे सा आईलैंड साइप्रस एक फ्लैशपॉइंट बन गया है.  तुर्की जो NATO सदस्य है और सुन्नी प्रधान मुल्क है, पहले से ही ईरान (शिया बहुल और अमेरिका-विरोधी) के साथ कॉम्पीटिशन की भावना रखता है.

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने एक एक बयान में कहा, "हमारे इलाके में हुए नए डेवलपमेंट को देखते हुए आज से टर्किश रिपब्लिक ऑफ़ नॉर्दर्न साइप्रस में छह F-16 फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं." साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह अलग हुए देश की सिक्योरिटी को मज़बूत करने की फेज़वाइज प्लानिंग का हिस्सा है."

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तुर्की ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो और कदम उठाए जाते रहेंगे. 

पिछले हफ़्ते NATO के डिफेंस ने ईरान से तुर्की के एयरस्पेस में दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया. यह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल की लड़ाई में एक बड़ा बदलाव है, जो अब पूरे इलाके में फैल गई है.  NATO के सदस्य अंकारा ने शनिवार को ईरान को चेतावनी दी कि वह उसकी तरफ़ और मिसाइलें न दागे. 

ग्रीस ने भी तैनात किए फाइटर जेट

इधर ग्रीस ने ईरान और हिजबुल्लाह के ड्रोन/मिसाइल खतरे को देखते हुए दक्षिणी साइप्रस में सैन्य तैनाती की है. ग्रीस ने साइप्रस के सपोर्ट में पाफोस एयर बेस पर चार F-16 फाइटर जेट्स कर दिया है. ग्रीस के F-16 ने 4 मार्च को दो ईरानी ड्रोन भी इंटरसेप्ट कर गिराए.

इसके अलावा ग्रीस ने अपने सबसे एडवांस युद्धपोत को भी यहां तैनात कर दिया है. 

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