तेल-गैस की सप्लाई रुकी, जहाजों पर ब्रेक... मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच क्यों अहम है होर्मुज

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित हो गई है. यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है.

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होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर किए अटैक के बाद मिडिल ईस्ट में टेंशन बरकरार है. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ रहा है. समुद्री व्यापार पर भी इसका असर है. खाड़ी क्षेत्र से होने वाली ट्रेड शिपिंग बाधित हो गई है, जो दुनिया में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का बड़ा सोर्स है. इस दिक्कत के चलते इंटरनेशनल मार्केट में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आ गई है.

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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कुछ तेल रिफाइनरियों ने भी अपने कच्चे तेल की प्रोसेसिंग यूनिट अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं. चीन, भारत और मिडिल ईस्ट के कुछ रिफाइनिंग केंद्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है. सप्लाई कम होने की आशंका के चलते यूरोपीय डीजल फ्यूचर्स की कीमत अक्टूबर 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर 1130 डॉलर तक पहुंच गई.

होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है

Strait of Hormuz ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है. यह फारस की खाड़ी को दक्षिण में ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है. अपने सबसे संकरे हिस्से में इसकी चौड़ाई लगभग 21 मील (करीब 33 किमी) है, जबकि जहाजों के आवागमन के लिए दोनों दिशाओं में करीब 2-2 मील का मार्ग निर्धारित है. दुनिया में खपत होने वाले कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है. एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन इसी रास्ते से वैश्विक बाजारों तक पहुंचा.

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खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देश सऊदी अरब, ईरान, यूएई, कुवैत, और ईराक अपना अधिकांश कच्चा तेल इसी मार्ग से एशियाई देशों को निर्यात करते हैं. इसके अलावा कतर, जो दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है, अपने लगभग सभी तरलीकृत प्राकृतिक गैस निर्यात इसी जलडमरूमध्य के जरिए भेजता है. यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम कर दी है और अब वह खाड़ी क्षेत्र से ज्यादा तेल और गैस आयात कर रहा है. ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट यूरोप के लिए विशेष रूप से चिंताजनक हो गया है. ब्रिटेन, इटली, बेल्जियम और पोलैंड जैसे देशों की एलएनजी आपूर्ति काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है.

खाड़ी क्षेत्र प्रोपेन, ब्यूटेन और एथेन जैसी गैसों का भी बड़ा निर्यातक है, जिनका इस्तेमाल हीटिंग, ईंधन और कृषि क्षेत्र में किया जाता है.

जहाजों की आवाजाही लगभग ठप

शिपिंग डेटा के अनुसार ईरान संघर्ष के बाद 200 से अधिक तेल और गैस टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र में लंगर डालकर खड़े हैं. इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है और तेल-गैस की कीमतों में तेजी आई है. यूरोप और एशिया के बीच होने वाला बड़ा समुद्री व्यापार आमतौर पर Suez Canal के रास्ते होता है. लेकिन क्षेत्रीय तनाव के कारण कई शिपिंग कंपनियां जहाजों को अफ्रीका के चारों ओर घुमाकर भेज रही हैं. इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ने और आयातित वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है.

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टैंकरों पर हमले जारी

खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरें भी सामने आई हैं. बहामास के झंडे वाले कच्चा तेल टैंकर 'सोनांगोल नामीबे' को इराक के खोर अल जुबैर बंदरगाह के पास विस्फोट से नुकसान पहुंचा. जहाज की बाहरी संरचना में दरार आने की सूचना है. करीब 300 तेल टैंकर अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य के भीतर फंसे हुए हैं और जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसी बीच रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूरोप को चेतावनी दी है कि रूस अपनी बची हुई गैस आपूर्ति भी रोक सकता है. इसके साथ ही कतर ने एलएनजी शिपमेंट पर ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया है.

ऊर्जा बाजार में बढ़ती चिंता के चलते यूरोपीय गैस कीमतों में भी तेजी आई है. यूरोपीय बेंचमार्क गैस की कीमत लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 51.44 यूरो प्रति मेगावाट-घंटा तक पहुंच गई. विश्लेषकों के अनुसार यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है तो कुछ ही दिनों में इराक और कुवैत से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है. जेपी मॉर्गन के आकलन के मुताबिक संघर्ष के आठवें दिन तक वैश्विक बाजार में करीब 33 लाख बैरल प्रतिदिन तेल की कमी हो सकती है.

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