अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के लिए रवाना हो गए हैं. जहां ईरान के साथ बातचीत होगी. लेकिन जाने से पहले वेंस ने ईरान को सीधी चेतावनी भी दे दी है. इस्लामाबाद रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वो इस बातचीत को लेकर उम्मीद रखते हैं और सोचते हैं कि यह अच्छी रहेगी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान सच में और ईमानदारी से बातचीत करना चाहता है तो अमेरिका भी खुले दिल से बात करने को तैयार है.
लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को चेतावनी भी दी. वेंस ने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिका के साथ 'खेलने' की कोशिश की यानी बातचीत में धोखा देने या टालमटोल करने की कोशिश की तो अमेरिकी टीम बिल्कुल भी नरम नहीं रहेगी.
इस्लामाबाद को क्यों चुना गया?
यह बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को होगी. इसीलिए इसे 'इस्लामाबाद टॉक्स' कहा जा रहा है. पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है और ईरान का पड़ोसी भी है. साथ ही पाकिस्तान के अमेरिका से भी रिश्ते हैं. इसलिए यह जगह दोनों पक्षों को बातचीत के लिए ठीक लगी.
राष्ट्रपति ट्रंप की क्या भूमिका है?
उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें इस बातचीत के लिए कुछ खास निर्देश दिए हैं. यानी वेंस अपनी मर्जी से नहीं बल्कि ट्रंप की तय की हुई सीमाओं और शर्तों के हिसाब से बातचीत करेंगे.
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यह बातचीत कितनी अहम है?
यह बातचीत बहुत अहम है क्योंकि इस पर पूरी दुनिया की नजर है. अगर यह बातचीत कामयाब रही तो जंग रुकेगी, तेल का रास्ता खुलेगा और दुनिया भर में तेल के दाम नीचे आ सकते हैं. लेकिन अगर यह बातचीत फेल हुई तो हालात फिर से बिगड़ सकते हैं.
अब तक क्या-क्या हुआ?
कुछ समय पहले अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे. इसके बाद दोनों तरफ से जंग शुरू हो गए थे. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी दुनिया के सबसे जरूरी तेल के रास्ते को बंद कर दिया था जिससे पूरी दुनिया में तेल के दाम बढ़ गए. हाल ही में एक सीजफायर यानी थोड़े समय के लिए जंग रोकने का समझौता हुआ. अब इस सीजफायर को पक्का करने और जंग को हमेशा के लिए बंद करने के लिए बातचीत होनी है.
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