ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची और भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के बीच बुधवार शाम एक विस्तृत टेलीफोनिक बातचीत हुई. सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए एक अत्यंत जरूरी समुद्री मार्ग है. अराघची ने इस मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर डॉ. जयशंकर से चर्ची की.
ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस बातचीत में सीजफायर से संबंधित नए घटनाक्रमों, द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्थितियों पर चर्चा की गई.
दोनों देशों के नेताओं ने मौजूदा स्थिति के तमाम पहलुओं पर बात की और भविष्य में भी एक-दूसरे के निकट संपर्क में रहने पर सहमति जताई है.
'अराघची का फोन आया...'
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि अराघची से उनकी बात-चीत हुई है. उन्होंने लिखा, "आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फ़ोन आया. हमने मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की. हम एक-दूसरे के साथ लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए."
रणनीतिक सहयोग और वैश्विक चिंताएं
ईरान और भारत के बीच यह संवाद वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में स्थिरता भारत के आर्थिक हितों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस चर्चा से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी बाद में घोषित की जाएगी. मौजूदा परिस्थितियों में दोनों देशों का एक-दूसरे से चर्चा करना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने में भारत की भूमिका अहम है.
प्रणय उपाध्याय