'अगर $200 प्रति बैरल खरीद सकते हो...', तेल की बढ़ती कीमतों के बीच ईरान की अमेरिका-इजरायल को चुनौती

ईरान ने अपने ऊर्जा ढांचे पर हमलों को लेकर इजरायल-अमेरिका और उनके सहयोगियों को चुनौती दी है कि अगर वे 200 डॉलर प्रति बैरल की कीमत पर कच्चा तेल खरीद सकते हैं, तो ये खेल जारी रखें. ईरान ने यह धमकी भी दी है कि उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने से युद्ध का नया चरण शुरू हो गया है.

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अमेरिकी-इजरायली हमले के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान के दक्षिण में स्थित एक ऑयल स्टोरेज फैसिलिटी से उठतीं आग की लपटें. (Photo: AP) अमेरिकी-इजरायली हमले के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान के दक्षिण में स्थित एक ऑयल स्टोरेज फैसिलिटी से उठतीं आग की लपटें. (Photo: AP)

aajtak.in

  • तेहरान,
  • 09 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:55 PM IST

अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष अब एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने तक पहुंचता दिख रहा है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिगारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर बमबारी किए जाने से युद्ध का एक नया अध्याय शुरू हो गया है. 

अल जजीरा पर जारी एक वीडियो संदेश में जुल्फिगारी  ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल चुकाने के लिए तैयार हैं, तो वे यह खेल जारी रख सकते हैं. उनका इशारा इस बात की ओर था कि ऊर्जा ढांचे पर हमले का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है.

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वहीं एक खुफिया आकलन के अनुसार हाल में इजरायल द्वारा तेहरान के आसपास स्थित प्रमुख ऑयल स्टोरेज और रिफाइनरी फैसिलिटी पर किए गए हमलों से ईरान की घरेलू ईंधन आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में कई बड़े ऑयल स्टोरेज टैंकों को निशाना बनाया गया. माना जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की घरेलू ईंधन आपूर्ति को बाधित करना था.

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ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमला

इन हमलों में शाहर-ए-रे रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स, शाहरान ऑयल डिपो, कोहक और करज/फरदिस जैसे स्थानों को निशाना बनाया गया. इन ठिकानों पर हमले ईरान की मिलिट्री लॉजिस्टिक्स, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, बिजली उत्पादन पर दबाव बनाने की कोशिश मानी जा रही है. संघर्ष की शुरुआत में हमले मुख्य रूप से सैन्य ठिकानों, न्यूक्लियर और मिसाइल साइट तक केंद्रित थे, लेकिन अब यह इकोनॉमिक और एनर्जी एसेट तक फैलता दिखाई दे रहा है. 

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हालांकि रिपोर्ट के अनुसार हमले ईरान के प्रमुख एक्सपोर्ट सेंटर जैसे खर्ग आइलैंड या सदर्न रिफाइनरियों जैसे अबादान रिफाइनरी और बंदर अब्बास पर नहीं किए गए. ईरान ने भी कुछ दिन पहले अपने मिसाइल हमलों में खाड़ी क्षेत्र में स्थित एनर्जी फैसिलटी को निशाना बनाया था. इनमें सऊदी अरामको के रस तनुरा संयंत्र के साथ-साथ यूएई और कतर में कुछ ऊर्जा और समुद्री जल शोधन संयंत्र शामिल बताए गए हैं. 

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ईरान संघर्ष 11वें दिन भी जारी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच लेबनान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष समन्वयक ने सोमवार को इजरायल की आधिकारिक यात्रा शुरू की है, जहां वह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चर्चा करेंगे. बता दें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी, 2026 की सुबह ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे, जिसमें इस्लामिक रिपब्लिक के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए. यह संघर्ष 11वें दिन भी जारी है.

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