अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच ईरान ने दोनों देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'वाशिंगटन की योजना बिल्कुल साफ है. उनका उद्देश्य ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करना, देश को विभाजित करना और उसके विशाल तेल भंडार पर अवैध कब्जा करना है.' उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले करके सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और कूटनीतिक परंपराओं को तोड़ दिया है.
इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ऐसे समय हमले किए गए जब ईरान कूटनीतिक बातचीत में शामिल था. उन्होंने आरोप लगाया कि इन सैन्य कार्रवाइयों ने चल रही वार्ताओं को पूरी तरह पटरी से उतार दिया. बघाई ने कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि उस पर जबरन सैन्य आक्रमण थोपा गया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई को अब 11 दिन हो चुके हैं और इस दौरान ईरान की प्राथमिकता केवल अपनी रक्षा करना है.
इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि जब तक सैन्य हमले जारी रहेंगे, तब तक किसी भी तरह के युद्धविराम या बातचीत की गुंजाइश नहीं है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ईरानी जनता अपने देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और देश का भविष्य ईरान की जनता की इच्छाशक्ति से तय होगा. उन्होंने कहा कि ईरान एकजुट होकर अपने दुश्मनों का सामना करेगा और अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा.
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मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर
इस बीच, देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है. इस्लामी क्रांति के नए नेता के रूप में अयातुल्ला सैय्यद मोजतबा हुसैनी खामेनेई के चयन के बाद ईरान के खुफिया मंत्रालय ने उनके प्रति निष्ठा की शपथ ली है. ईरानी संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने यह फैसला लिया. इस संस्था के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से आयतुल्ला सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का तीसरा सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है.
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सर्वसम्मत फैसला
इसकी घोषणा आयतुल्ला खामेनेई के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से दी गई. पोस्ट में कहा गया कि अल्लाह अयातुल्ला सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई की हिफाजत करे और देश के धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी अब उनके हाथों में होगी. बता दें कि ईरान की 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (विशेषज्ञों की सभा) एक उच्च-स्तरीय संवैधानिक निकाय है, जो देश के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) का चयन, पर्यवेक्षण और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हटाने का कार्य करती है. 88 इस्लामी न्यायविदों (ज्यूरिस्ट्स) वाली यह सभा, जनता द्वारा 8 साल के कार्यकाल के लिए चुनी जाती है, और इसके सदस्य गार्डियन काउंसिल द्वारा अनुमोदित होते हैं.
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