ईरान में जारी युद्ध को लेकर दुनिया भर में अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संघर्ष सिर्फ क्षेत्रीय जंग नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की शुरुआत हो सकता है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जियोपॉलिटिकल कंसल्टेंट एडेल नाज़ेरियन (Adelle Nazarian) ने इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष को सिर्फ युद्ध के तौर पर देखना अधूरा होगा. उनके मुताबिक, यह दरअसल एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की शुरुआत हो सकती है.
Adelle Nazarian ने कहा कि मानवीय स्तर पर किसी भी युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता, लेकिन भू-राजनीतिक नजरिए से देखें तो यह दौर दुनिया के नए शक्ति समीकरण तय करने वाला साबित हो सकता है. उनके मुताबिक आने वाले समय में वही देश मजबूत होकर उभरेंगे जो नए वैश्विक ढांचे के साथ खुद को बेहतर तरीके से जोड़ पाएंगे.
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एडेल ने यह भी कहा कि दुनिया अब उस दौर में प्रवेश कर रही है जिसे एक तरह से "Cold War 2.0" कहा जा सकता है. हालांकि यह पहले वाले शीत युद्ध से काफी अलग होगा. उनके मुताबिक पहले के दौर में लड़ाइयां जमीन पर सेनाओं के जरिए लड़ी जाती थीं, लेकिन अब संघर्ष का स्वरूप बदल चुका है.
Nazarian के अनुसार नई वैश्विक कंपटीशन का केंद्र अब तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताओं और सैन्य तकनीक की श्रेष्ठता बनने जा रहा है. उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन इस बात से तय होगा कि कौन सा देश तकनीकी और सैन्य इनोवेशन में सबसे आगे है.
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एडेल नाज़ेरियन ने यह भी कहा कि इस बदलते वैश्विक हालात में कई देशों के बीच नए तरह के गठजोड़ भी बन सकते हैं. उनके मुताबिक मिडिल ईस्ट में चल रहा मौजूदा संघर्ष इस बड़े भू-राजनीतिक बदलाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
Nazarian का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक व्यवस्था कम टकराव वाली हो सकती है, लेकिन इसके पीछे तकनीकी और रणनीति का बड़ा प्रभाव रहेगा. उनके शब्दों में, यह सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि उस नए दौर की शुरुआत है जहां वैश्विक शक्ति की परिभाषा बदलने वाली है.
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