ईरान-US समझौते की शर्तें लीक हुई, तेहरान को बंपर फायदा!

ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम समझौते की कथित शर्तें सामने आने के बाद नई बहस छिड़ गई है. लीक दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिका ईरान को तुरंत तेल बेचने की अनुमति देगा, होर्मुज फिर से खोला जाएगा और भविष्य में प्रतिबंध हटाने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे. यदि ये शर्तें सही साबित होती हैं तो इन्हें डोनाल्ड ट्रंप की पहले की सख्त नीति से बड़ा यू-टर्न माना जा सकता है.

Advertisement
ट्रंप ने जी7 के मंच से अमेरिका की ओर से ईरान में बड़े निवेश को सीधे खारिज कर दिया है (File Photo- ITG) ट्रंप ने जी7 के मंच से अमेरिका की ओर से ईरान में बड़े निवेश को सीधे खारिज कर दिया है (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण युद्ध को खत्म करने के लिए जो गुप्त अंतरिम समझौता तैयार हुआ है, कथित तौर पर उसकी शर्तें लीक हो गई हैं. लीक हुए दस्तावेजों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कारण, ट्रंप ने जी7 के मंच से अमेरिका की ओर से ईरान में बड़े निवेश को सीधे खारिज कर दिया है, जिसमें 300 बिलियन डॉलर की बात है.

Advertisement

लेकिन सामने आई शर्तों के मुताबिक, समझौते पर दस्तखत होते ही ईरान को तुरंत कई बड़े फायदे मिलेंगे, जिनमें होर्मुज को फिर से खोलना, ईरानी तेल की बिना रोक-टोक बिक्री की अनुमति और आगे चलकर अमेरिकी तथा संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में बातचीत शामिल है.

हालांकि अमेरिका और ईरान, दोनों ने अभी तक इस समझौते का आधिकारिक मसौदा सार्वजनिक नहीं किया है. ऐसे में दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा है कि लीक हुआ मसौदा अंतिम समझौते से काफी हद तक मेल खाता है. 

अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले एक औपचारिक कार्यक्रम में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. लेकिन इससे पहले ही सऊदी मीडिया नेटवर्क 'अल अरबिया' और 'ब्लूमबर्ग' द्वारा लीक की गई इस गोपनीय रिपोर्ट ने वाशिंगटन से लेकर यरूशलम तक हड़कंप मचा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट के राजनयिकों और अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि लीक हुए दस्तावेज पूरी तरह प्रामाणिक हैं.

Advertisement

ईरान को तुरंत मिलेगा बड़ा फायदा

लीक दस्तावेजों के अनुसार, जैसे ही अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, ईरान तत्काल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू करेगा. अमेरिका तुरंत ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लेगा. समझौते के 30 दिनों के भीतर हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व के स्तर पर लाना होगा.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अगले 60 दिनों की अंतिम बातचीत के दौरान भी ईरान बिना किसी प्रतिबंध के दुनिया भर में अपना कच्चा तेल बेच सकेगा. अमेरिका ने इसके लिए तुरंत 'ऑयल वेवर' देने पर सहमति जताई है. यही वह पॉइंट है जिसने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल मचा दी है. अब तक अमेरिका ईरान पर दबाव बनाने के लिए तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को सबसे बड़ा हथियार मानता रहा है.

300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण पैकेज का प्रस्ताव

समझौते की सबसे चौंकाने वाली शर्तों में युद्ध से तबाह हुए ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि सीधे अमेरिकी खजाने से नहीं बल्कि खाड़ी देशों के निवेश के जरिए उपलब्ध कराई जा सकती है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पहले भी संकेत दे चुके हैं कि खाड़ी देश ईरान के पुनर्निर्माण में निवेश कर सकते हैं.

Advertisement

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि युद्ध में ईरान को घेरने का दावा करने वाले ट्रंप अब उसी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर का इंतजाम करवा रहे हैं, जो तेहरान की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है.

प्रतिबंध हटाने का रास्ता भी खुलेगा

साल 2015 के समझौते में अमेरिका ने ईरान पर से केवल कुछ चुनिंदा प्रतिबंध हटाए थे, वह भी तब जब ईरान ने यूरेनियम एनरिचमेंट को पूरी तरह रोक दिया था. लेकिन इस नए अंतरिम समझौते के तहत यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतिम सहमति बन जाती है, तो अमेरिका तेहरान पर लगे सभी अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रतिबंधों को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए काम करेगा. इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को भी तुरंत रिलीज किया जाएगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से भी कहीं बड़ी रियायत होगी.

ट्रंप ने कभी इसे बताया था सबसे खराब समझौता

दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकालते हुए उसे दुनिया का सबसे खराब समझौता बताया था. उस समय ट्रंप का तर्क था कि ईरान को प्रतिबंधों से राहत देकर अमेरिका ने बहुत बड़ी रियायत दे दी थी. अब यदि लीक हुई शर्तें सही साबित होती हैं तो अमेरिका ईरान को उससे भी ज्यादा आर्थिक राहत देने के लिए तैयार दिखाई देता है. यही वजह है कि वॉशिंगटन में इस प्रस्ताव को लेकर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना जताई जा रही है.

Advertisement

नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका?

समझौते का एक और अहम हिस्सा लेबनान से जुड़ा है. मसौदे में कहा गया है कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच तुरंत युद्धविराम होगा. विश्लेषकों का मानना है कि यह इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि उन्होंने युद्ध के दौरान साफ कहा था कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच इस समझौते को लेकर मतभेद सामने आए हैं.

60 दिन में होगा अंतिम परमाणु समझौता?

अंतरिम समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक ईरान और अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत करेंगे. ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का कहना है कि ईरान के पास इतना उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है जिससे वह चाहे तो कई परमाणु बम तैयार कर सकता है. इसी वजह से अंतिम समझौते का सबसे कठिन हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने का रहेगा.

वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत

यदि होर्मुज पूरी तरह खुल जाता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलेगा. दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. युद्ध के दौरान इस मार्ग पर हमलों और खतरों के कारण ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आया था. जलडमरूमध्य खुलने से तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक बाजार में ऊर्जा और खाद्य कीमतों पर दबाव कम हो सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »