ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमले के बीच इस हफ्ते की शुरुआत में वैश्विक बाजारों में आर्थिक मंदी की आशंका बढ़ गई. अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में गिरावट आई, जबकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं.
अमेरिका के कच्चे तेल बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. यह 2022 के बाद पहली बार है जब अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर गई है. उस समय रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तेल बाजार में उथल-पुथल हुई थी.
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी करीब 24 प्रतिशत बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया. साल की शुरुआत में अमेरिकी तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से भी कम थी.
कीमतों में यह उछाल मध्य-पूर्व में उत्पादन में रुकावट के बाद आया है. होर्मुज की खाड़ी के लगातार बंद रहने के कारण क्षेत्र के कई प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन घटा दिया है. आम तौर पर दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरता है.
तेल की कीमतों का बढ़ना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए झटका
मंगलवार को हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. उनके इस बयान के बाद 10 मार्च को WTI क्रूड लगभग 83-88 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट क्रूड 88-91 डॉलर के आसपास रहा.
फिर भी, पिछले महीने की कीमतों की तुलना में यह 28-36% की बढ़ोतरी है. तेल की कीमतों में इस तेज उछाल ने अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट में चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.
युद्ध के जल्द खत्म होने के ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि मंगलवार को ईरान पर अमेरिकी हमले का अब तक का सबसे भीषण दिन होगा. उन्होंने कहा कि आज अमेरिका ईरान पर भीषण हमले करेगा.
उनकी इस धमकी के बाद साफ है कि अमेरिका युद्ध की तीव्रता और बढ़ा रहा है. इस माहौल में तेल की कीमतें और ऊपर ही जाएंगी.
तेल का 120 डॉलर के लेवल तक जाना अहम क्यों है?
तेल की कीमतों में ताजा उछाल से पहले ही अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अगर तेल की कीमत 120 डॉलर के करीब पहुंचती है तो मंदी का खतरा काफी बढ़ सकता है. अगर ऐसा होता है तो टैरिफ के दबाव से जूझ रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान की संभावना है.
मैरेथन एसेट मैनेजमेंट के सीईओ ब्रूस रिचर्ड्स ने कहा कि अगर ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर तक पहुंच जाता है तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ लगभग जीरो हो सकती है. उन्होंने 4 मार्च को ब्लूमबर्ग इन्वेस्ट कॉन्फ्रेंस में कहा कि 120 डॉलर का लेवल अर्थव्यवस्था के लिए मंदी का ट्रिगर बन सकता है.
अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने भी चेतावनी दी कि अगर तेल की कीमत 120 डॉलर तक पहुंचती है तो इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने अपने एक लेख में लिखा कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से महंगाई दर लगभग 1 प्रतिशत तक बढ़ सकती है और मंदी का रिस्क भी बढ़ जाएगा.
हालांकि क्रुगमैन का मानना है कि सिर्फ तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से तुरंत मंदी या महंगाई नहीं आएगी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह स्थिति को और नाजुक बना सकती है.
उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का एक नया स्तर जोड़ दिया है. उनके मुताबिक ईरान में युद्ध पर्याप्त प्लानिंग के बिना शुरू हुआ और इससे आर्थिक जोखिम बढ़ गए हैं.
क्रुगमैन ने कहा कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो यह अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आखिरी झटका साबित हो सकता है. यह पहले से दबाव झेल रही अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकता है.
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