होर्मुज में अमेरिकी हमले में 5 की मौत... ईरानी मीडिया का बड़ा दावा, इधर UAE में मिसाइल अटैक

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग भीषण होती जा रही है. एक तरफ अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए नौसैनिक अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरानी मीडिया ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी हमले में दो नागरिक नौकाएं तबाह हो गई हैं.

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यूएई में फिर से अटैक हुआ है. (File Photo: Reuters) यूएई में फिर से अटैक हुआ है. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:29 AM IST

पश्चिम एशिया में 18 दिन के सीजफायर के बाद तनाव फिर बढ़ गया है. UAE में ईरानी ड्रोन अटैक, बहरीन में रेड अलर्ट और होर्मुज स्ट्रेट संकट ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. ईरानी मीडिया ने सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान की ओर सामान ले जा रही दो नागरिक नौकाओं को निशाना बनाया है. ईरान का कहना है कि ये आईआरजीसी की स्पीडबोट्स नहीं बल्कि आम मालवाहक नौकाएं थीं, जिनमें सवार 5 नागरिकों की मौत हो गई है. 

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दूसरी तरफ, अमेरिका ने इन दावों पर चुप्पी साधते हुए होर्मुज स्ट्रेट के जरिए वाणिज्यिक जहाजों को निकालने का अभियान तेज कर दिया है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, दो अमेरिकी फ्लैग वाले जहाजों ने सफलतापूर्वक इस जलमार्ग को पार कर लिया है. 

अमेरिका ने ईरान के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उसने एक अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला किया है. अमेरिकी अधिकारियों ने इसे पूरी तरह 'मनगढ़ंत' बताया है.

यूएई के तेल ठिकानों पर हमला

बहरीन ने आज रात नेशनल इमरजेंसी का ऐलान कर दिया है. वहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सोमवार को बताया कि एक ईरानी ड्रोन ने फुजैराह स्थित तेल सुविधा केंद्र में आग लगा दी. यह केंद्र होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करने वाला एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन हब है. इसके तुरंत बाद ब्रिटिश सेना ने भी अमीरात तट के पास एक मालवाहक जहाज में आग लगने की जानकारी दी. इन हमलों के बाद ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में 6 फीसदी का भारी उछाल आया है. 

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हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन हमलों में हाथ होने से इनकार करते हुए कहा कि अमेरिका और यूएई को इस 'दलदल' में वापस आने से बचना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सियासी संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इसे सिर्फ कूटनीति से सुलझाया जा सकता है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "होर्मुज़ में हुई घटनाओं से यह साफ़ हो जाता है कि किसी भी राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं होता. पाकिस्तान की कोशिशों से बातचीत आगे बढ़ रही है, इसलिए अमेरिका को इस बात से सावधान रहना चाहिए कि कहीं कुछ दुर्भावना रखने वाले लोग उसे फिर से दलदल में न घसीट लें. यूएई को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए. 'प्रोजेक्ट फ़्रीडम' असल में 'प्रोजेक्ट डेडलॉक' है."

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने होर्मुज के जरिए जहाजों को ले जा रहे अमेरिकी जहाजों पर हमला किया, तो उसे 'मिटा दिया जाएगा.' ट्रंप ने यह भी बताया कि ईरान ने दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज पर भी हमला किया है. इस बीच, अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि अमेरिका, बहरीन और खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर एक सुरक्षा परिषद प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिससे जलमार्ग को बाधित करने के लिए ईरान की जवाबदेही तय की जा सके. जर्मनी के चांसलर मैर्ज़ ने भी ईरान से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है.

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अमेरिकी खुफिया आकलन के मुताबिक, ईरान द्वारा परमाणु हथियार बनाने की समय सीमा पिछले साल के मुकाबले नहीं बदली है. जानकारों का मानना है कि संभावित अमेरिकी-इजरायली हमलों ने इसे एक साल तक पीछे धकेल दिया है. इस बीच ओमान में भी कर्मचारियों के एक आवासीय भवन को निशाना बनाने की खबर आई है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और जनरल डैन केन मंगलवार को इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. अमेरिका अब चीन से भी अपील कर रहा है कि वह ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी और भारत जैसे देशों को एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करे.

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