अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर यह कहकर हमला किया था कि वह परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया है. इस हमले में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. इससे जंग और भड़क गई और पूरे मिडिल ईस्ट के साथ-साथ दुनिया पर संकट गहरा गया.
ईरान में जंग के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी. इस बातचीत के दौरान पुतिन ने ट्रंप के सामने जंग खत्म करने को लेकर कुछ सुझाव दिए थे. इनमें एक अहम सुझाव ईरान के यूरेनियम को रूस ट्रांसफर करने का था, जिसे ट्रंप ने ठुकरा दिया था.
पुतिन ने क्यों दिया था ऐसा प्रस्ताव?
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फोन कॉल में पुतिन ने ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को रूस भेजने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था.
पुतिन का यह प्रस्ताव अमेरिका या इजरायल के सैनिकों को जमीन पर उतारे बिना भी ईरान के परमाणु भंडार को हटाने में मदद कर सकता है. रूस पहले से ही एक न्यूक्लियर पावर है और उसने 2015 के परमाणु समझौते के तहत पहले भी ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखा था. रूस उन गिने-चुने देशों में से एक है, जिसके पास इस यूरेनियम को अपने पास रखने की तकनीकी क्षमता है.
हालांकि, यह पहली बार नहीं था जब पुतिन ने अमेरिका को ईरानी यूरेनियम को लेकर ऐसा प्रस्ताव दिया. पिछले साल जून में जब अमेरिका ने ईरान की तीन न्यूक्लियर फैसिलिटी- नतांज, इस्फहान और फोर्दो पर हमला किया था, उससे पहले भी पुतिन ने ट्रंप के सामने ऐसा ऑफर रखा था. हालांकि, उस वक्त ईरान ने भी इसे खारिज कर दिया था और कहा था कि वह अपना यूरेनियम ईरानी सुविधाओं के भीतर ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निगरानी में रखने के लिए तैयार है.
ट्रंप ने क्यों ठुकरा दिया ऑफर?
अमेरिका और इजरायल दावा करते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है और वह ऐसा कभी नहीं होने देंगे. लेकिन सवाल उठता है कि जब पुतिन ने ऐसा ऑफर रखा तो ट्रंप ने इसे क्यों नहीं माना?
एक अमेरिकी अधिकारी ने Axios से कहा कि 'राष्ट्रपति ट्रंप सभी से बात करते हैं और समझौता करने को तैयार रहते हैं. लेकिन वह समझौता अच्छा होना चाहिए. राष्ट्रपति कभी बुरा सौदा नहीं करते.'
शुक्रवार को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम पर नियंत्रण पाने के लिए अमेरिका के पास कई विकल्प मौजूद हैं. एक विकल्प यह है कि ईरान अपनी मर्जी से परमाणु भंडार सौंप दे. उन्होंने कहा, 'हम यह नहीं बताएंगे कि हम क्या करने के लिए तैयार हैं और किस हद तक जा सकते हैं, लेकिन हमारे पास विकल्प जरूर मौजूद हैं.'
इसी बीच फॉक्स न्यूज रेडियो को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित करना फिलहाल उनकी टॉप प्रायोरिटी नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी हमारा उस पर ध्यान नहीं है लेकिन हो सकता है कि किसी समय हम उस पर भी ध्यान दें. इसी इंटरव्यू में ट्रंप ने पहली बार खुलकर यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि रूस इस जंग में ईरान की मदद कर रहा है.
ईरान के पास कितना यूरेनियम?
परमाणु हथियारों पर नजर रखने वालीं संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रॉसी ने कहा था कि ईरान का लगभग आधा यूरेनियन इस्फहान में एक टनल कॉम्प्लेक्स में स्टोर किया गया था और शायद अभी भी वहीं है.
IAEA का अनुमान है कि जब इजरायल ने जून में हमले किए थे, तो ईरान के पास 440.9 किलो 60% एनरिच्ड यूरेनियम था. एजेंसी का मानना है कि अगर इसे और एनरिच किया जाता है तो इससे 10 परमाणु हथियारों के लिए जरूरी विस्फोटक मिल जाएगा.
ईरान के तीन न्यूक्लियर फैसिलिटी- नतांज, इस्फहान और फोर्दो हैं, जहां यूरेनियम को एनरिच किया जाता है. जून के हमलों में नतांज में दो और फोर्दो में एक प्लांट बुरी तरह डैमेज हो गए थे. ग्रॉसी के मुताबिक, नतांज में भी 60% एनरिच्ड यूरेनियम अभी है.
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