ईरान जंग का एक महीना... ट्रंप के सामने बचे दो रास्ते, एक तरफ 'कुआं' दूसरी ओर 'खाई'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के साथ युद्ध आसान नहीं है, क्योंकि तेल और गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने उनकी स्थिति को कमजोर कर दिया है. ट्रंप के पास युद्ध को खत्म करने के लिए सीमित विकल्प हैं. ऐसे में वो कहीं न कहीं फंस गए हैं.

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ट्रंप के लिए ईरान युद्ध आसान नहीं है. (Photo: ITG) ट्रंप के लिए ईरान युद्ध आसान नहीं है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध को शुरू हुए एक महीना बीत चुका है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए जंग की ये राह आसान नहीं दिख रही है. तेल और गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और अपनी घटती अप्रूवल रेटिंग के बीच ट्रंप खुद ही फंसते नजर आ रहे हैं.

ट्रंप के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं, या तो वो किसी समझौते के साथ इस युद्ध को खत्म कर दें, या फिर हमले तेज कर दें. लेकिन दूसरा ऑप्शन चुनने से एक लंबे समय तक चलने वाली जंग का खतरा पैदा हो सकता है.

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अमेरिकी और इजरायली सेना के संयुक्त अभियान का ईरान भी जमकर जवाब दे रहा है. ईरान ने अभी भी खाड़ी के तेल और गैस शिपमेंट पर अपनी पकड़ मजबूत रखी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 'ब्लैकमेल' भी कर रहा है.

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वो एक हमेशा चलने वाले युद्ध से बचना चाहते हैं. एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के मुताबिक, 'ट्रंप इस युद्ध को 4 से 6 सप्ताह के भीतर खत्म करना चाहते हैं, हालांकि हालात को देखते हुए ये समय-सीमा अस्थिर नजर आ रही है.'

युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाशने के लिए ट्रंप ने पाकिस्तान के जरिए ईरान के सामने 15 शर्तें रखी थीं. लेकिन कहा जा रहा है कि ट्रंप ज्यादा शर्तें रखने की स्थिति में नहीं हैं. पूर्व खुफिया अधिकारी जोनाथन पिकोफ का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती ये साफ न होना है कि इस युद्ध का नतीजा क्या होगा.

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व्हाइट हाउस का कहना है कि जंग तब खत्म होगी जब कमांडर-इन-चीफ ये तय करेंगे कि हमारे उद्देश्य पूरे हो गए हैं.

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और जमीनी सेना का खतरा

सैन्य मोर्चे पर ट्रंप ने हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है. विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत एक अंतिम बड़ा हवाई हमला कर सकता है. इसके बाद ट्रंप अपनी जीत की घोषणा करके ईरान से हट सकते हैं. लेकिन चुनौती ये है कि जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापार के लिए पूरी तरह नहीं खुलता, तब तक जीत का दावा करना बेकार है. वहीं, जमीनी सेना भेजने का कोई भी फैसला अमेरिकी मतदाताओं को नाराज कर सकता है.

इसमें कोई दो राय नहीं है कि अमेरिका और इजरायल पर ईरान की जवाबी कार्रवाई ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का 20% तेल गुजरता है, इसके लगभग बंद होने से ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं. इसका सीधा असर ट्रंप की राजनीति पर पड़ा है. 

रॉयटर्स/इप्सोस पोल के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36% रह गई है. नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में डर का माहौल है.

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ईरान का रुख और भविष्य

दूसरी तरफ, ईरान का मानना है कि वो अपने दुश्मनों के मुकाबले ज्यादा समय तक जंग सह सकते हैं. उन्होंने ट्रंप की 15 शर्तों को ठुकराकर खुद भी बड़ी मांगे कर दीं. ईरानी शर्तों में खाड़ी देशों के अमेरिकी ठिकानों का सफाया भी शामिल है.

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क्यों ट्रंप बदल रहे बयान?

दो नाव पर सवार ट्रंप ने अब दुनिया को भी सस्पेंस में रखा हुआ है. वो कभी बाजार को शांत करने वाले बयान देते हैं, तो कभी ऐसी धमकियां जिससे तेल की कीमतें फिर बढ़ जाती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयान देकर अपने दुश्मनों को हमेशा असमंजस में रखना चाहते हैं.

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