मध्य पूर्व की जंग भले ही कागजों पर थमती दिख रही हो, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं. ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की घोषणा के कुछ ही देर बाद ईरान ने ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. जंग खत्म होने से ठीक पहले ईरान ने सऊदी अरब की सबसे अहम तेल पाइपलाइन पर मिसाइल हमला कर दिया.
यह हमला सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर किया गया, जिसे देश की "लाइफलाइन" माना जाता है. यही पाइपलाइन सऊदी तेल को रेड सी के रास्ते वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का सबसे बड़ा जरिया है, खासकर तब जब होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरा बरकरार है.
सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में पाइपलाइन के एक पंपिंग स्टेशन को भारी नुकसान पहुंचा है. इसके चलते करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन (700,000 bpd) तेल सप्लाई ठप हो गई, जो सऊदी के कुल निर्यात का लगभग 10 प्रतिशत है.
7 लाख बैरल तेल सप्लाई प्रभावित
सऊदी सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "इन हमलों में ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के एक अहम पंपिंग स्टेशन को निशाना बनाया गया, जिससे पाइपलाइन के जरिए पंप किए जाने वाले तेल की मात्रा में करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई है." यह पहली बार है जब सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर माना है कि ईरानी हमलों से उसकी ऊर्जा सुविधाओं को सीधा नुकसान पहुंचा है.
दरअसल, यह पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम है. सऊदी अरामको इसी के जरिए रोजाना लाखों बैरल तेल सप्लाई करता है. इसकी कुल क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रतिदिन मानी जाती है, जिसमें से करीब 50 लाख बैरल निर्यात के लिए इस्तेमाल होते हैं.
सऊदी के कई बड़े तेल प्रोडक्शन साइट्स पर जंग के दौरान हमले
हमले के बाद सिर्फ पाइपलाइन ही नहीं, बल्कि सऊदी के कई बड़े तेल प्रोडक्शन और रिफाइनिंग प्लांट भी प्रभावित हुए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मनीफा और खुरैस जैसे बड़े ऑयल फील्ड्स पर भी हमले हुए, जिससे उत्पादन में करीब 3-3 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी आई.
इसके अलावा जुबैल स्थित SATORP रिफाइनरी, रास तनुरा, यनबू की SAMREF रिफाइनरी और रियाद रिफाइनरी जैसे अहम ठिकानों को भी निशाना बनाया गया. इससे न सिर्फ कच्चे तेल, बल्कि गैस और LPG सप्लाई पर भी असर पड़ा है.
सीजफायर के तुरंत बाद ईरान ने दागी थी मिसाइल
सीजफायर के तुरंत बाद ईरान के आईआरजीसी ने बुधवार को बताया था कि उसने पूरे क्षेत्र में कई टारगेट्स पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनमें यनबू में अमेरिकी कंपनियों से जुड़े तेल ठिकाने भी शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश भी है. दिलचस्प बात यह है कि जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति बन रही थी, उसी दौरान यह हमला हुआ.
इस पूरी घटना का असर सिर्फ सऊदी अरब तक सीमित नहीं है. वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर है, और इस तरह के हमले कीमतों में और उछाल ला सकते हैं. खासकर ऐसे समय में जब दुनिया का बड़ा हिस्सा ऊर्जा सप्लाई के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है. विश्लेषकों का कहना है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है.
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