मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कुवैत ने ईरान पर बड़ा आरोप लगाया है. कुवैत का दावा है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े लोग चीन की मदद से बन रहे एक बड़े पोर्ट प्रोजेक्ट को निशाना बनाने पहुंचे थे. इस बीच अमेरिका, इजरायल और यूएई भी ईरान को लेकर नई रणनीति बना रहे हैं.
कुवैत के मुताबिक, 1 मई को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी एक टीम ने फारस की खाड़ी में स्थित बुबियान आइलैंड में घुसपैठ की कोशिश की. यह इलाका इराक और ईरान की सीमा के पास पड़ता है. कुवैती सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि दो लोग भागने में सफल रहे.
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इसी बुबियान आइलैंड पर मुबारक अल कबीर पोर्ट बनाया जा रहा है, जो चीन की वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर योजना का हिस्सा माना जाता है. यह वही प्रोजेक्ट है, जिसे चीन मध्य पूर्व में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के लिए बेहद अहम मानता है.
कुवैत ने राज खोलने में की देरी
कुवैत ने यह साफ नहीं किया कि उसने इस घटना को सार्वजनिक करने में इतनी देर क्यों की. शुरुआत में 3 मई को सिर्फ घुसपैठ की जानकारी दी गई थी, लेकिन ईरान का नाम नहीं लिया गया था. अब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन दौरे पर जा रहे हैं और उनकी मुलाकात शी जिनपिंग से होने वाली है, तब इस खुलासे को काफी अहम माना जा रहा है.
दरअसल, चीन लंबे समय से ईरानी तेल खरीदता रहा है. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से चीन की ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ा है. इसी वजह से ईरान का यह कथित हमला बीजिंग के लिए भी चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है.
इजरायल-UAE में बढ़ी करीबी
इस बीच इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के रिश्तों में भी नई नजदीकी देखने को मिली है. अमेरिका में इजरायल के राजदूत माइक हकाबी ने दावा किया कि इजरायल ने यूएई में आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य कर्मियों को तैनात किया है. यह पहली बार है जब सार्वजनिक तौर पर माना गया कि इजरायली सैन्य सिस्टम यूएई की जमीन पर मौजूद है.
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यूएई ने 2020 में इजरायल को आधिकारिक मान्यता दी थी, जिसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं. ईरान पहले भी आरोप लगाता रहा है कि यूएई में इजरायल की सैन्य और खुफिया मौजूदगी बढ़ रही है.
उधर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कांग्रेस में दावा किया कि अमेरिका अब भी होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए हुए है. हालांकि ईरानी हमलों और धमकियों की वजह से तेल और गैस सप्लाई लगातार प्रभावित हो रही है. अमेरिका के मुताबिक, युद्ध की लागत अब 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है.
नॉर्वे ने भी ईरान पर दबाव बढ़ाया है. नॉर्वे के उप विदेश मंत्री एंड्रियास क्राविक ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात कर साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट और व्यापारिक जहाजों पर असर पूरी तरह अस्वीकार्य है. नॉर्वे के करीब 25 जहाज अब भी इस इलाके में फंसे हुए बताए जा रहे हैं.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क