MBS का डबल गेम! दुनिया के सामने दिखावा लेकिन फिर भी ईरान पर सऊदी ने बरसाए बम

जंग के बीच सऊदी अरब ने भी ईरान पर एयरस्ट्राइक की थीं. दावा है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में सऊदी एयरफोर्स ने मार्च में जवाबी कार्रवाई की. हालांकि सार्वजनिक तौर पर रियाद लगातार शांति और तनाव कम करने की बात करता रहा.

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ईरान ने सऊदी अरब में कई अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे. (Photo- ITG) ईरान ने सऊदी अरब में कई अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए थे. (Photo- ITG)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:25 AM IST

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने भी ईरान पर गुप्त सैन्य हमले किए थे, लेकिन इन हमलों को सार्वजनिक नहीं किया गया. यह पहली बार माना जा रहा है जब सऊदी अरब ने सीधे ईरानी जमीन पर सैन्य कार्रवाई की.

पश्चिमी अधिकारियों और ईरानी सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मार्च के आखिर में सऊदी एयरफोर्स ने ईरान के खिलाफ कई जवाबी हमले किए. ये हमले उस वक्त हुए जब ईरान लगातार खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा था.

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हालांकि यह साफ नहीं हो पाया कि सऊदी अरब ने ईरान में किन ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह "टिट-फॉर-टैट" यानी जवाबी कार्रवाई थी. सऊदी विदेश मंत्रालय ने सीधे तौर पर हमलों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन यह जरूर कहा कि रियाद हमेशा क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में रहा है.

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ईरान ने एयरपोर्ट से लेकर तेल ठिकानों को बनाया निशाना

फरवरी महीने में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए, उसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव तेजी से फैल गया. ईरान ने जवाब में सिर्फ अमेरिकी ठिकानों को ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों के एयरपोर्ट, तेल ठिकानों और नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया.

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रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने सभी छह गल्फ देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. साथ ही उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ.

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के बारे में भी दावा किया गया कि उसने ईरान पर सैन्य हमले किए थे. हालांकि सऊदी और यूएई का तरीका अलग-अलग रहा. यूएई ज्यादा आक्रामक रुख में दिखा, जबकि सऊदी अरब ने एक तरफ जवाबी हमले किए और दूसरी तरफ लगातार बातचीत भी जारी रखी.

ईरान को सऊदी ने दी थी बड़े हमले की चेतावनी

सऊदी अरब ने हमलों के बाद ईरान को साफ संदेश भेजा कि अगर हमले जारी रहे तो वह और बड़ी कार्रवाई करेगा. इसके बाद दोनों देशों के बीच गुप्त कूटनीतिक बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे तनाव कम करने पर सहमति बनी. रिपोर्ट के मुताबिक, एक ईरानी अधिकारी ने भी माना कि तेहरान और रियाद के बीच तनाव कम करने को लेकर सहमति भी बनी थी, जिसका मकसद हालात को बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से रोकना था.

रॉयटर्स ने एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि दोनों देशों को समझ आ गया था कि अगर संघर्ष बेकाबू हुआ तो नुकसान बहुत बड़ा होगा. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप से जुड़े अली वाएज ने कहा कि यह भरोसे की राजनीति नहीं थी, बल्कि दोनों पक्षों की मजबूरी थी.

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सऊदी अरब लंबे समय तक अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है, लेकिन इस युद्ध ने यह भी दिखाया कि अमेरिकी सुरक्षा ढांचा पूरी तरह अभेद्य नहीं है. ईरानी ड्रोन और मिसाइल कई बार अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदने में सफल रहे. इसी वजह से सऊदी अरब ने पहली बार इतना आक्रामक रुख अपनाया.

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मार्च में सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने खुले तौर पर कहा था कि जरूरत पड़ी तो सऊदी सैन्य कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है. इसके कुछ दिन बाद सऊदी अरब ने ईरान के सैन्य अटैची और चार राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश भी दिया था.

ईरान ने हमले रोके लेकिन इराकी समूह एक्टिव

रिपोर्ट बताती है कि मार्च के आखिरी हफ्ते में सऊदी अरब पर 100 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइल हमले हुए थे, लेकिन अप्रैल के पहले हफ्ते तक यह संख्या काफी घट गई. ईरान ने सीधे हमले कम कर दिए थे, हालांकि इराक में मौजूद उसके समर्थक समूह अब भी सक्रिय रहे.

इस बीच पाकिस्तान भी इस पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे सक्रिय दिखा. जब सऊदी अरब को फिर से हमलों का खतरा महसूस हुआ, तब पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान तैनात कर सऊदी को भरोसा दिलाया और साथ ही संयम बरतने की अपील की.

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पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया कि मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ अमेरिका, इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रही. खाड़ी के बड़े देश भी अब सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं, भले ही दुनिया के सामने वे शांति और बातचीत की बात करते रहें.

सऊदी अरब और ईरान के बीच 2023 में चीन की मध्यस्थता से रिश्ते सुधरे थे, लेकिन मौजूदा युद्ध ने दिखा दिया कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अब भी गहरा है. फिलहाल दोनों देश खुली जंग से बचना चाहते हैं, लेकिन हालात कब फिर बिगड़ जाएं, यह कहना मुश्किल है.

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