पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. खासकर ईरानी मीडिया ने जिस तरह से सीधे तौर पर पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर निशाना साधा है. ईरान का आरोप है कि पाकिस्तान, जो खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बता रहा था, अब निष्पक्ष नहीं दिख रहा. तेहरान को लग रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में इस्लामाबाद का झुकाव साफ तौर पर अमेरिका की तरफ है, जिससे भरोसे का संकट पैदा हो गया है.
ईरान में जंग खत्म कराने को लेकर पाकिस्तान शेखी बघारने की कोशिश में था. पहले दौर की बातचीत इस्लामाबाद में हुई भी लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला था. इसके बाद दूसरे दौर की बातचीत के लिए पहल की जा रही थी लेकिन दो हफ्ते का सीजफायर खत्म होने के बावजूद बैठक तय नहीं हो पाई.
यह भी पढ़ें: 'हर चीज का सही वक्त होता है, भविष्य में भारत की भूमिका संभव', ईरान-US मध्यस्थता पर बोले राजनाथ
राष्ट्रपति ट्रंप को इस सीजफायर को आगे बढ़ाना पड़ा और साथ ही बताया कि ये एक्सटेंशन भी पाकिस्तान के अनुरोध पर किया गया है. अब आइए समझते हैं कि आखिर अचानक क्या हो गया कि ईरान भी पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल खड़े करने लगा है.
1. निष्पक्ष मध्यस्थ पर उठे सवाल
ईरानी सरकारी मीडिया ने पहली बार खुलकर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. कहा गया है कि एक मध्यस्थ को दोनों पक्षों के बीच बराबरी से खड़ा होना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान इस कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा. तेहरान को लग रहा है कि इस्लामाबाद संतुलित भूमिका नहीं निभा रहा.
2. अमेरिका की तरफ झुकाव का आरोप
ईरान का सबसे बड़ा आरोप यही है कि पाकिस्तान का रुख अमेरिका की तरफ ज्यादा झुका हुआ है. पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सरकार पर यह आरोप है कि वे कूटनीतिक और नैरेटिव, दोनों स्तर पर वॉशिंगटन के हितों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे मध्यस्थता की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहा है.
3. संदेश पहुंचा या नहीं? यहीं अटका मामला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिम मुनीर तेहरान गए थे और वहां से एक प्रस्ताव लेकर लौटे. उम्मीद थी कि यह प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचेगा और उस पर जवाब आएगा. लेकिन ईरान का कहना है कि अब तक कोई साफ प्रतिक्रिया नहीं मिली. इससे शक गहरा गया है कि क्या पाकिस्तान ने संदेश ठीक से पहुंचाया भी या नहीं.
यह भी पढ़ें: 'ईरान कंगाल, कैश के लिए तड़प रहा', ट्रंप का बड़ा दावा- सेना-पुलिस को सैलरी देने के भी पैसे नहीं
4. 'डबल गेम' का सीधा आरोप
ईरानी मीडिया ने पाकिस्तान और उसके फील्ड मार्शल पर 'डबल गेम' खेलने का आरोप लगाया है. मतलब एक तरफ वह खुद को शांतिदूत बता रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के साथ खड़ा नजर आ रहा है. यह आरोप पाकिस्तान की छवि को सीधे तौर पर प्रभावित करता है और उसकी मध्यस्थता की भूमिका को कमजोर करता है.
5. बातचीत पर असर और बढ़ता अविश्वास
इस पूरे विवाद का असर शांति वार्ता पर भी पड़ रहा है. अगर एक पक्ष को लगता है कि मध्यस्थ निष्पक्ष नहीं है, तो बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि मुनीर पर अब ईरान की शर्तों को नजरअंदाज करने और बातचीत के सिर्फ दिखावे की बात भी कही जा रही है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क