UN में ईरान का 'लेटर बम', इजरायल पर अराघची और गालिबाफ की हत्या की साजिश का आरोप

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखकर अपने विदेश मंत्री अब्बास अराघची और स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ की हत्या की साजिश का आरोप लगाया है. इजरायल पर निशाना साधते हुए इसे 'स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म' बताया गया है.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ. (Photo- ITG) ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

मिडिल ईस्ट की जंग के बीच अब मामला अंतरराष्ट्रीय मंच पर और गर्म हो गया है. ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को एक औपचारिक चिट्ठी लिखकर बड़ा आरोप लगाया है कि उसके दो शीर्ष नेताओं की हत्या की साजिश रची जा रही है.

इन दोनों नेताओं में एक विदेश मंत्री अब्बास अराघची और एक संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ हैं. हाल ही में खबर आई थी कि इजरायल ने इन दोनों को अपनी 'हिट-लिस्ट' से अस्थायी तौर पर हटा दिया है, ताकि जंग खत्म करने के लिए बातचीत की गुंजाइश बनी रहे.

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लेकिन अब ईरान का दावा है कि यह 'राहत' सिर्फ दिखावटी है. संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स यह संकेत देती हैं कि इन नेताओं की हत्या के लिए एक ऑपरेशनल प्लान तैयार किया गया था.

चिट्ठी में साफ लिखा गया है कि "इन दोनों नेताओं को अस्थायी रूप से निशाने से हटाने का मतलब यह नहीं है कि खतरा खत्म हो गया है, बल्कि यह दिखाता है कि खतरा अब भी वास्तविक, जानबूझकर और लगातार बना हुआ है." ईरान ने इस कथित योजना को "स्टेट स्पॉन्सर्ड टेररिज्म" यानी राज्य प्रायोजित आतंकवाद करार दिया है.

यह घटना ऐसे समय सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर एक अहम बैठक होने वाली है. बताया जा रहा है कि यह बंद कमरे में होने वाली बैठक रूस की मांग पर बुलाई गई है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के हमलों पर चर्चा होगी.

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इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग काफी अहम मानी जा रही है. एक तरफ जंग जारी है, दूसरी तरफ पर्दे के पीछे बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं. पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और तेहरान-वॉशिंगटन के बीच संवाद की कोशिश कर रहे हैं.

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विशेषज्ञों के मुताबिक, मोहम्मद बाकर गालिबाफ को अमेरिका के लिए संभावित वार्ताकार माना जा रहा है, जबकि अब्बास अराघची पहले से ही कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय हैं. ऐसे में अगर इन नेताओं को निशाना बनाया जाता, तो शांति वार्ता की सारी संभावनाएं खत्म हो सकती थीं.

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि जंग की शुरुआत में आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या हो चुकी है, और कई सैन्य कमांडर भी मारे गए हैं. ऐसे में ईरान अब किसी भी नए हमले को लेकर बेहद संवेदनशील हो गया है. मसलन, यह मामला सिर्फ दो नेताओं की सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे युद्ध के भविष्य का है. अगर हालात और बिगड़े, तो कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद हो सकते हैं.

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