फिलिस्तीन में इजरायली बस्तियों के खिलाफ UN में प्रस्ताव, जानें भारत ने किसके पक्ष में किया वोट

संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव 'पूर्वी येरुशलम और कब्जे वाले सीरियाई गोलान सहित फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजरायली बस्तियां' भारी बहुमत से पास हुआ. यूएन में प्रस्ताव पर मतदान की एक फोटो शेयर करते हुए TMC सांसद साकेत गोखले ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि भारत गणराज्य ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया.

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 इजरायल-हमास के बीच पिछले 36 दिन से जंग जारी है. इजरायल-हमास के बीच पिछले 36 दिन से जंग जारी है.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 नवंबर 2023,
  • अपडेटेड 7:02 AM IST

इजरायल-हमास की जंग पिछले 37 दिन से जारी है. इसी बीच यूएन में एक अहम प्रस्ताव पास हुआ. ये प्रस्ताव फिलिस्तीन में इजरायली बस्तियों के खिलाफ था. यूएन में भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया. जबकि इस प्रस्ताव के खिलाफ कनाडा, हंगरी, इजरायल, मार्शल द्वीप, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, नाउरू, अमेरिका मतदान किया. जबकि 18 मतदान से अनुपस्थित रहे. बता दें कि प्रस्ताव के समर्थन में 145 देशों ने वोट किया.

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यूएन के इस प्रस्ताव में पूर्वी येरुशलम समेत फिलिस्तीनी क्षेत्र और कब्जे वाले सीरियाई गोलान में जिस तरह से समस्या का समाधान करने के लिए इजरायल की ओर से जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनकी निंदा की गई थी. मसौदा प्रस्ताव को 9 नवंबर को मंजूरी दी गई.

संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव 'पूर्वी येरुशलम और कब्जे वाले सीरियाई गोलान सहित फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजरायली बस्तियां' भारी बहुमत से पास हुआ. यूएन में प्रस्ताव पर मतदान की एक फोटो शेयर करते हुए TMC सांसद साकेत गोखले ने कहा कि उन्हें बहुत खुशी है कि भारत गणराज्य ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. इज़राइल ने फ़िलिस्तीन में कई बस्तियां बना रखी हैं, जो कि एक अवैध कब्जे की तरह हैं. साकेत गोखले ने कहा कि इजराइल का रंगभेद अब खत्म होना चाहिए.

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पिछले महीने इजरायल-हमास जंग पर आया था ये प्रस्ताव

पिछले महीने भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNSC) में जॉर्डन द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज किया था, जिसमें इजरायल-हमास जंग में तत्काल मानवीय संघर्ष विराम का आह्वान किया गया था. क्योंकि इसमें आतंकवादी समूह हमास का कोई उल्लेख नहीं किया गया था. नागरिकों की सुरक्षा, कानूनी और मानवीय दायित्वों को कायम रखने संबंधी प्रस्ताव को भारी बहुमत से पास किया गया. 120 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया, जबकि 14 देशों ने इसके खिलाफ वोट किया था. वहीं 45 देशों ने मतदान नहीं किया.

भारत ने क्यों बनाई थी वोटिंग से दूरी

पिछले प्रस्ताव का मकसद गाजा में "तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम" का आह्वान करना तो था, लेकिन इसमें आतंकी कृत्य को अंजाम देने वाले समूह हमास का कोई उल्लेख नहीं किया गया था. इसी कारण भारत ने इस मसौदा प्रस्ताव पर मतदान करने से दूरी बना ली.

नेतन्याहू ने दोहराया अपना संकल्प

वहीं, इजरायल के पीएम नेतन्याहू साफ कह चुके हैं कि जब तक बंधकों की सकुशल वापसी नहीं हो जाती, वह हमले जारी रखेंगे. नेतन्याहू ने कहा कि हमास के खिलाफ युद्ध के बाद इज़रायल गाजा में फिलिस्तीनी प्राधिकरण की वापसी का विरोध करेगा. उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद भी इज़राइल समग्र सुरक्षा नियंत्रण बनाए रखेगा, जिसमें जब भी हम आतंकवादियों को खत्म करना चाहें हैं तो ऐसा कर सकें. क्योंकि वह फिर से सिर उठा सकते हैं. 

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इजरायली पीएम ने बताया- युद्ध के बाद कैसे होंगे गाजा के हालात

नेतन्याहू ने कहा कि मैं बताता हूं कि युद्ध के बाद गाजा में क्या नहीं होगा. वहां हमास नहीं होगा. ऐसा कोई नागरिक प्राधिकरण भी नहीं होगा, जो अपने बच्चों को इज़रायल से नफरत करने, इज़रायलियों को मारने, इज़रायल को खत्म करने के लिए ट्रेनिंग दे. ऐसा कोई प्राधिकरण नहीं होगा जो हत्यारों के परिवारों को उनकी हत्या की संख्या के आधार पर भुगतान करे. ऐसा कोई प्राधिकारी नहीं होगा, जिसके नेता ने 30 दिन बाद भी भयानक नरसंहार की निंदा न की हो.

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